लखनऊ/रामपुर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी को लेकर पिछले 48 घंटे से एक खबर सुर्खियो में है. दरअसल, यह जेल में बंद वरिष्ठ समाजवादी नेता आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद फैली है. मीडिया में खबरें आईं कि आजम खान ने अखिलेश यादव से आगामी विधानसभा चुनाव में अपने लिए 15 सीटों की डिमांड की है. इसी डिमांड को रखने के लिए पत्नी तजीन फातिमा को आजम खान ने अखिलेश यादव के पास भेजा था.
तजीन फातिमा बोलीं- ‘अखिलेश यादव को औलाद मानते हैं आजम खान’
राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया में यह खबर आने के बाद आजम खान की पत्नी और सपा की पूर्व राज्य सभा सांसद तजीन फातिमा खुद कैमरे पर आईं. तजीन फातिमा ने कहा- ‘मैं 4-5 दिन पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात करने गई थी. मैं आजम खान साहब का खत लेकर गई थी और उस खत में 15 सीटों की डिमांड की गई थी. यह बिलकुल गलत है. समाचार पत्र ने विश्वस्त सूत्रों से यह खबर प्रकाशित की है. वो समाचार पत्र बताएं कि उनके विश्वस्त सूत्र कौन हैं, जिन्होंने बिना पुष्टी के इतनी बड़ी खबर उन्हें दे दी.’
तजीन फातिमा ने आगे कहा- ‘पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मेरी मुलाकात बिलकुल पारिवारिक थी. हमारे बीच किसी राजनीतिक बातों को पर कोई बातचीत ही नहीं हुई. आजम साहब का खत ले जाने का सवाल ही नहीं उठता है. वो किस तरह से खत भेज सकते हैं. वह समय-समय पर कहते रहे हैं कि अखिलेश यादव उनकी औलाद की तरह हैं. अपनी औलाद को खत भेजकर कोई क्यों दबाव डलवाएगा कि वो हमें 15 या 21 सीटें हमारे कैंडिडेट खड़े करने के लिए दे. इस तरह की खबरें देने वाले अखबारों की विश्वसनीयता भी भी सवाल उठते हैं कि वो जनता के सामने क्या परोस रहे हैं.’
बातचीत के दौरान उन्होंने दोबारा दोहराया कि यह मुलाकात पूरी तरह से पारिवारिक था. इसमें बिलकुल व्यक्तिगत और परिवार की बातें हुई थी. इसका राजनीति या सीटों से कुछ भी लेना देना नहीं था.
मुलायम सिंह यादव के इतने करीब कैसे आए अजाम खान?
यह बात समाजवादी पार्टी के गठन से कई साल पहले की बात है. वही तकरीबन 1980 से 1985 के बीच की. तब पार्टी में पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधित्व को लेकर झगड़ा हो गया था. उस वक्त मुलायम सिंह यादव को पार्टी में अपनी ताकत दिखाने की नौबत आ गई थी.
आजम खान बताते हैं- ‘तब मैं विधायक हो गया था और पार्टी को दो हिस्सों में बंटना था. तभी विधानसभा की गैलरी में एक बार मुलायम सिंह यादव ने आजम खान से कहा ‘हम किस वक्त आपके यहां आ जाएं’. इसपर आजम खान ने पूछा ‘किस लिए’. इसपर मुलायम सिंह यादव ने कहा- ‘वो जो पूर्व और पश्चिम का झगड़ा चल रहा है.’ इसपर आजम खान ने पूछा- ‘आप क्या चाहते हैं?’ मुलायम का जवाब आया- ‘मैं चाहता हूं आप हमारे साथ आ जाएं.’
उस पहली मुलाकात को याद करते हुए आजम खान ने बताया कि उस वक्त हम तीन लोग थे, एक मुजफ्फरनगर के अमीर आलम खां और गोंडा वाले मुन्नन खां (फ़सी-उर-रहमान मुन्नन खां) थे. ये माना जाता था कि ये तीन वोट एक तरफ जाएंगे. आजम खान ने मुलायम सिंह यादव को जवाब दिया- ‘जी हम आपके साथ आ गए.’ क्योंकि उनके अलावा किसी ने हमसे पूछा ही नहीं. जिस दिन इस फैसले को लेकर मीटिंग होनी थी उस दिन सुबह साढ़े पांच बजे लखनऊ के 34 दारुल सफा के दरवाजे की घंटी बजी.
आजम खान को लगा कि पता नहीं इस वक्त कौन दरवाजे पर आ गया. दरवाजा खोलते ही आजम खान ने देखा अकेले मुलायम सिंह यादव खड़े हैं बाकी उनके साथ आए लोग नीचे सीढ़ियों पर हैं. आजम खान बेहद घबरा गए, उन्हें समझ में नहीं आया कि इतना बड़ा आदमी उनके दरवाजे पर इतनी सुबह क्यों आ गया.
आजम खान का हावभाव देखते ही मुलायम सिंह यादव बोल पड़े- ‘भाई उसी के सिलसिले में आए थे.’ इसपर आजम खान ने जवाब दिया- ‘मैंने आपसे जो कह दिया वही पत्थर की लकीर है. और अंदर इस वक्त हम आपको लेंगे नहीं, क्योंकि आपको चाय पिलाने और नाश्ता कराने के लिए मेरे घर में कुछ है नहीं. फिर आप मुझपर शुबहा (शंका) करके आए हैं.’ इतना सुनते ही आजम खान बहुत हंसे और बोले- ‘अब मैं आउंगा भी नहीं. जा रहा हूं.’
इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने अपने साथियों से कहा- ‘अगर कोई भी वोट नहीं मिलेगा तो कम से कम ये तीन वोट जरूर मिलेंगे.’ यही वो पहली राजनीतिक घटना रही जिसके चलते मुलायम सिंह यादव और आजम खान की दोस्ती पनपी जो आजीवन बनी रही. यहां तक कि मुलायम सिंह यादव ने एक बार कुछ सालों के लिए आजम खान को पार्टी से बाहर भी कर दिया, लेकिन वह कहीं और नहीं गए. दोबारा सपा में लौटे और अखिलेश यादव की सरकार में नगर विकास जैसा मजबूत मंत्रालय भी संभाला. शायद यही वजह है कि तजीन फातिमा ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि अखिलेश यादव को आजम खान अपनी औलाद समझते हैं.

