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BJP Rajya Sabha List 2026: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव के लिए जबसे BJP ने 8 उम्मीदवारों का ऐलान किया है. तबसे कई चर्चित नामों के टिकट कटने की चर्चा तेज हो गई है. पश्चिमी यूपी से संजीव बालियान, सुरेश राणा और सत्यपाल सिंह जैसे नाम भी संभावित उम्मीदवारों में बताए जा रहे थे, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं मिली. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों BJP ने इन दिग्गजों को दरकिनार किया? इसके पीछे पार्टी के कौन से 4 ‘गेम प्लान’ हो सकते हैं? जानते हैं पूरी बात.
न बालियान, न राणा… सत्यपाल सिंह भी राज्यसभा की रेस से बाहर, BJP के इस फैसले में 2027 का क्या कनेक्शन है?
- नो बैकडोर एंट्री’ नीति और हार के बाद राज्यसभा का रास्ता नहीं: भाजपा नेतृत्व ने इस राज्यसभा चुनाव के जरिए पार्टी के भीतर एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश प्रसारित किया है. पार्टी की नई नीति के तहत, हालिया चुनावों में शिकस्त झेलने वाले बड़े नेताओं को राज्यसभा के रास्ते संसद भेजने (बैकडोर एंट्री) पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. संजीव बालियान मुजफ्फरनगर से 2024 का लोकसभा चुनाव हार चुके हैं, जबकि सुरेश राणा भी पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे. पार्टी अब इन दिग्गजों को कोई ‘सहानुभूति का पुरस्कार’ देने के मूड में नहीं है, बल्कि उन्हें वापस जमीन पर उतरकर जनता के बीच संघर्ष करने का टास्क सौंपा गया है. हालांकि BJP ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि राज्यसभा उम्मीदवार चुनने में ऐसी कोई नीति अपनाई गई है. इसलिए इसे पार्टी के फैसले का राजनीतिक विश्लेषण ही माना जाना चाहिए.
- भीतरघात और आपसी गुटबाजी पर आलाकमान का हंटर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच की आपसी खींचतान और गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है. विशेषकर संजीव बालियान और संगीत सोम जैसे कद्दावर नेताओं का विवाद सार्वजनिक मंचों और बयानों तक पहुंच गया था, जिसका सीधा नुकसान पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ा. मीडिया रिपोर्टों में बालियान की हार के पीछे स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के साथ राजपूत वोटरों की नाराजगी और स्थानीय नेताओं के विरोध का भी जिक्र हुआ था. ऐसे में 2027 से पहले पार्टी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है. राज्यसभा की सूची में किसी एक बड़े गुट के चेहरे को जगह नहीं मिलने को इसी संदर्भ में भी देखा जा रहा है. भाजपा हाईकमान का दूसरा मास्टर प्लान किसी भी विवादित या गुटबाजी में शामिल चेहरे को टिकट न देकर यह संदेश देना है कि पार्टी में अनुशासनहीनता और भीतरघात को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
- आरएलडी (RLD) पर दांव और गठबंधन धर्म का पालन: तीसरा मास्टर प्लान पश्चिमी यूपी की जाट और किसान राजनीति को साधने के लिए जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ अपने गठबंधन को और अधिक मजबूत करना है. जाट मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाए रखने के लिए भाजपा अब अपने खुद के पुराने जाट चेहरों (जैसे संजीव बालियान या सत्यपाल सिंह) को आगे बढ़ाकर आरएलडी के राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र में कोई नया टकराव पैदा नहीं करना चाहती. पार्टी का मानना है कि इस क्षेत्र की कमान आरएलडी के हाथों में सुरक्षित रखकर विपक्षी खेमे को ज्यादा मजबूती से घेरा जा सकता है. हम यहां पहले ही आपको बता दें कि यह BJP की घोषित वजह नहीं कहा जा सकता. यह 2027 की संभावित रणनीति को लेकर किया जा रहा राजनीतिक आकलन है.
- सिटिंग सांसदों की छुट्टी और संगठन को ‘रीबूट’ करना, पुराने नामों की जगह संगठन पर जोर: बीजेपी ने इस बार ऐतिहासिक फैसला लेते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा समेत सभी 8 मौजूदा राज्यसभा सांसदों के टिकट काट दिए हैं. पार्टी का चौथा और सबसे बड़ा मास्टर प्लान संगठन के लिए समर्पित, लो-प्रोफाइल और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाना है. पश्चिमी यूपी से भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय राम प्रताप सिंह चौहान जैसे नेताओं को तवज्जो दी है, ताकि 2027 के चुनाव से पहले आम कार्यकर्ताओं में यह सकारात्मक संदेश जाए कि जमीन पर मेहनत करने वालों को बड़ा इनाम मिलता है. इससे पूरी चुनावी मशीनरी नई ऊर्जा के साथ रीबूट हो सकेगी. नई सूची में संगठन से जुड़े नेताओं को जगह मिली है. प्रकाश पाल पार्टी के पिछड़ा वर्ग मोर्चा से जुड़े रहे हैं. राम प्रताप सिंह चौहान BJP के प्रदेश महामंत्री हैं. प्रियंका सिंह रावत भी संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं. सूची में OBC, दलित, ब्राह्मण और ठाकुर समाज का संतुलन भी नजर आता है.
2027 का अंतिम लक्ष्य: सपा के PDA फॉर्मूले की काट
इन 4 मास्टर प्लान के जरिए भाजपा ने समाजवादी पार्टी (SP) के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को ध्वस्त करने के लिए अपनी नई फील्डिंग सेट कर दी है. पुराने और भारी-भरकम नामों को विश्राम देकर बीजेपी ने गैर-यादव ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और राजपूतों का एक नया सोशल इंजीनियरिंग गुलदस्ता तैयार किया है, जो आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत की राह आसान करेगा. हालांकि संजीव बालियान, सुरेश राणा और सत्यपाल सिंह को राज्यसभा टिकट नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि 2027 में उनकी भूमिका खत्म हो गई. विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी इन नेताओं को संगठन या चुनावी राजनीति में किस जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतारती है, यह आगे तस्वीर साफ करेगा.
BJP ने किन आठ नामों पर राज्यसभा के लिए लगाई मुहर
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए BJP ने 8 उम्मीदवार घोषित किए हैं. पार्टी की सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम हैं. लेकिन पश्चिमी यूपी के जिन बड़े नेताओं के नाम संभावित उम्मीदवारों के तौर पर चर्चा में थे, उनमें से किसी को जगह नहीं मिली. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, संजीव बालियान, सुरेश राणा और सत्यपाल सिंह के नाम को लेकर भी चर्चा थी. अंतिम सूची सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि BJP ने पश्चिमी यूपी के इन चेहरों से दूरी क्यों बनाई? 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस फैसले के पीछे चार संभावित राजनीतिक संकेत माने जा रहे हैं.

