संवाददाता@रामबली मिश्रा…..

पुत्र की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए रखा जाने वाला तीन दिवसीय कठिन जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ। शनिवार को व्रती महिलाओं ने 24 घंटे का निर्जला व्रत धारण कर विधि-विधान से भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की। रविवार को पारण के साथ व्रत का समापन होगा।
शनिवार को निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं सोलह श्रृंगार कर डलिया में फल, फूल, पकवान और पूजा सामग्री लेकर क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में पहुंचीं। बेड़िया हनुमान मंदिर, मां दूधइया मंदिर जरहा और अजीरेश्वर मंदिर परिसर में महिलाओं ने अपनी-अपनी वेदी बनाकर धूप-दीप जलाया और भगवान जीमूतवाहन की पूजा की। महिलाओं ने पुत्र की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए मंगलकामना की।

बेड़िया हनुमान मंदिर के पुजारी आचार्य अनूप कुमार शुक्ला ने बताया कि जीवित्पुत्रिका व्रत की शुरुआत सप्तमी तिथि को नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती महिलाएं मड़ुआ की रोटी, नोनी का साग और तोरई सहित पारंपरिक भोजन ग्रहण करती हैं। इसके बाद अष्टमी तिथि पर निर्जला व्रत रखकर भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की जाती है।

शनिवार शाम मंदिरों में पहुंची महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा के बाद चील-सियारिन की कथा सुनी और परिवार के साथ-साथ समाज एवं देश के कल्याण की कामना की। पूजा स्थलों पर महिलाओं की भीड़ और भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया।
रविवार को व्रती महिलाएं भीगे चने, तोरई और अन्य पारंपरिक व्यंजनों से पारण कर तीन दिवसीय व्रत का समापन करेंगी।
