Last Updated:
Jaipur Sports News: जयपुर के रेलवे टिकट चेकर (TC) ने जैवलिन थ्रो में प्रदर्शन करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अरशद नदीम को पीछे छोड़कर सुर्खियां बटोरी हैं. उनकी इस उपलब्धि के बाद उन्हें भारत का अगला नीरज चोपड़ा माना जा रहा है. खिलाड़ी ने लगातार बेहतर प्रदर्शन से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है. अब उनकी नजर आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और ओलंपिक पर है, जहां उनसे भारत के लिए पदक जीतने की उम्मीद की जा रही है. उनकी सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा और भारतीय एथलेटिक्स के लिए उत्साहवर्धक संकेत मानी जा रही है.
जयपुर के खिलाफ दुनियाभर में अपनी खेल की प्रतिभा से जयपुर का नाम रौशन कर रहे हैं. ऐसे ही जयपुर के रेलवे टिकट क्लर्क (टीसी) यशवीर सिंह जेवलिन थ्रोअर जिन्होंने हालही में ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में जेवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर जयपुर और राजस्थान का नाम रौशन किया हैं. लम्बे समय बाद राजस्थान से किसी खिलाड़ी ने जेवलिन थ्रो में कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल का सुखा खत्म किया हैं. जीत को बाद यशवीर सिंह जयपुर पहुंचे जहां लोगों ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. एक समय था जब यशवीर सिंह चोट के कारण ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाएं थे. लेकिन अब वह कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद उनके लिए 2028 अमेरिका ओलंपिक क्वालिफाई करने के दरवाजे खुल गए हैं.
कॉमनवेल्थ गेम्स में जयपुर के रेलवे टिकट क्लर्क (टीसी) यशवीर सिंह जिन्होंने अपने आखरी थ्रो जीत का नतीजा बदलते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता, हालही यशवीर सिंह जेवलिन थ्रो के पहले पांच प्रयासों तक पदक की दौड़ में पीछे चल रहे थे, लेकिन छठे और अंतिम प्रयास में उन्होंने 85.41 मीटर का शानदार थ्रो कर न सिर्फ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया बल्कि इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना पुराना पर्सनल बेस्ट 83.72 मीटर थ्रो को भी पीछे छोड़. कॉमनवेल्थ गेम्स में यशवीर सिंह ने पूर्व विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स और मौजूदा ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अरशद नदीम जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए पोडियम पर अपनी जगह बनाई.
कॉमनवेल्थ गेम्स के जेवलिन थ्रो खेल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर यशवीर ने युवाओं को एक बड़ा मैसेज दिया हैं कि सफलता और जीत के लिए जीवन में चुनौतियां और उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन कभी इन चुनौतियां से हार नहीं माननी चाहिए क्योंकि यशवीर को इस सफलता के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था कभी वह बैक पेन और शोल्डर चोट के कारण मैदान से बाहर रहे तो कभी कंधे के ऑपरेशन के कारण 2024 ओलिंपिक में क्वालिफाई ही नहीं कर पाए थे. लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद वह लगातार अपने खेल में मेहनत करते रहे और अब भारत के साथ राजस्थान का भी नाम रौशन किया हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
आपको बता दें कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले यशवीर सिंह अपने पिता की वजह से इस खेल से जुड़े क्योंकि उनके पिता खुद बहुत अच्छे जेवलिन खिलाड़ी रहे हैं. यशवीर सिंह के शुरुआती समय में उनके पिता ने ही उन्हें जेवलिन थ्रो खेल की बारीकियां सिखाईं. लम्बे समय तक यशवीर ने जयपुर के रेलवे ग्राउंड पर अपने पिता के साथ जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस की, पिछले 7 सालों से वह इस खेल से जुड़े हुए हैं. कॉमनवेल्थ मेडल जीतने के बाद अब यशवीर का लक्ष्य ओलिंपिक मेडल जीतना हैं.
जयपुर के रेलवे टिकट क्लर्क (टीसी) यशवीर सिंह लम्बे समय से जेवलिन थ्रो खेल से जुड़े हुए हैं और उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के अलावा जेवलिन थ्रो खेल में कई अचीवमेंट्स हासिल किए हैं. यशवीर सिंह ने 2025 में एशियन एथलेटिक्स में वह मेडल नहीं जीत पाए लेकिन उन्होंने इस इवेंट में 5वां स्थान हासिल किया. इसके अलावा स्टेट और नेशनल लेवल पर वह कई मेडल जीत चुके हैं लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि रही हैं.
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले जैवलिन थ्रोअर यशवीर सिंह ने भले ही अपने पिता के कहने पर जैवलिन थ्रो खेल की शुरुआत की थी, लेकिन भारत के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा से वह प्रेरित हैं. हालही में जयपुर पहुंचे यशवीर सिंह ने कहां था कि जैवलिन थ्रो एक ऐसा गेम है जिसमें कोई भी खिलाड़ी किसी भी दिन किसी भी खिलाड़ी को पीछे छोड़ सकता है. हां, बस खिलाड़ी की टैक्नीक और मौसम उसके अनुकूल होना चाहिए. ऐसे ही हालही में कॉमनवेल्थ गेम्स में यशवीर सिंह भले ही नीरज चोपड़ा से पीछे रहे थे, लेकिन पाकिस्तान के ओलिंपिक चैम्पियन नदीम को उन्होंने पीछे छोड़ा हैं. यशवीर का कहना हैं कि कॉमनवेल्थ मेडल तो अभी शुरुआत है, उनका लक्ष्य ओलिंपिक मेडल है और वह इसकी इसके में जुट गए हैं.
कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले जैवलिन थ्रोअर यशवीर सिंह दो साल पहले जयपुर में रेलवे टीसी लगे थे, हालांकि उनका मूल जन्म स्थान हरियाणा के भिवानी (देवसर) से हैं उनके पिता भारतीय रेलवे में नौकरी करते हैं। इसी कारण उनका परिवार हरियाणा से जयपुर आ गया. यशवीर की स्कूली शिक्षा जयपुर में हुई है यशवीर के पिता जयपुर रेलवे में कंप्लेंट इंचार्ज हैं। वह खुद भी जयपुर जंक्शन पर टीसी है. दो साल पहले जयपुर रेलवे स्टेशन पर टीसी लगने के बाद अब यशवीर की कर्मभूमि जयपुर बन गई. यशवीर सिंह के घर उनके पिता से लेकर उनका छोटा भाई उत्सव भी जैवलिन खिलाड़ी हैं. जो जूनियर नेशनल मेडलिस्ट रहे हैं लेकिन फिलहाल वह चोटिल हैं. लेकिन दोनों ने लम्बे समय तक जयपुर में रेलवे ग्राउंड और एसएमएस स्टेडियम में प्रेक्टिस की हैं. यशवीर सिंह रेलवे की नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपने खेल को कभी नहीं छोड़ा और लगातार अभ्यास करते रहे और कॉमनवेल्थ में जीत का परचम लहरा दिया.








