उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने 2 अक्टूबर की शाम अपनी टीम में कुछ बदलाव किए हैं. भूमिहार जाति से आने वाले अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है. उनकी जगह दिग्गज कांग्रेसी प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. मोना प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास सीट से लगातार तीन बार से विधायक चुनी जा रही हैं. 2022 में जब कांग्रेस के केवल दो विधायक जीते उसमें से मोना एक हैं. इसी सीट से मोना के पिता प्रमोद तिवारी लगातार नौ बार विधायक रहे.
दिलचस्प बात यह है कि रामपुर खास सीट पर करीब 40 फीसदी ओबीसी जिसमें अकेले कुर्मी समाज के 45 हजार वोट हैं. इसके अलावा यहां मुस्लिमों की भी करीब 10 फीसदी आबादी है. इसके बावजूद ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रमोद तिवारी और अब उनकी बेटी आराधना मिश्रा ‘मोना’ लगातार तीन बार से चुनाव जीत रही हैं. क्षेत्र के लोग यही कहते हैं कि उन्हें अपने विधायक से कोई दिक्कत परेशानी है ही नहीं तो भला वो उन्हें बदलने की क्यों सोचें.
वहीं कांग्रेस आलाकमान ने देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को उत्तर प्रदेश में पार्टी का वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। देवेंद्र निषाद ओबीसी कैटेगरी की मल्लाह समुदाय से हैं. आलोक कुमार अनुसूचित जाति कैटेगरी में पासी समाज से हैं.
मोना को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी देने के बाद फरेन्दा (महराजगंज) सीट से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र चौधरी को विधायक दल का नेता चुना गया है. वह ओबीसी कैटेगरी में कुर्मी समाज से आते हैं.
इससे पहले 26 जून 2026 को कांग्रेस ने राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया. दलित समाज से आने वाले राजेंद्र पाल गौतम आम आदमी पार्टी की उपज हैं. वह दिल्ली की सीमापुरी सीट से विधायक और अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं. फिलहाल वह यूपी प्रभारी के साथ कांग्रेस के एससी/एसटी मोर्चा के चेयरमैन भी हैं.
कांग्रेस की यूपी टीम है असली PDA
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भले ही पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की बात करते हैं, लेकिन उनकी पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों की लिस्ट देखकर दावे झूठे लगते हैं. अगर यूपी कांग्रेस की नई टीम से सपा की तुलना की जाए तो कहानी स्पष्ट रूप से समझ में आती है.
तो चलिए PDA की कसौटी पर पहले समाजवादी पार्टी की टीम का परीक्षण करते हैं-:
- अखिलेश यादव : राष्ट्रीय अध्यक्ष, लोकसभा में पार्टी नेता. वह यादव जाति से हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी कैटेगरी में है.
- श्याम लाल पाल: उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष, ये ओबीसी कैटेगरी की पाल/गड़ेरिया जाति से आते हैं.
- माता प्रसाद पांडेय : उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, सवर्ण कैटेगरी की ब्राह्माण जाति से हैं.
- महबूब अली : उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक, ये मुस्लिम यानी अल्पसंख्यक समाज से हैं.
- किरनमेय नंदा : राष्ट्रीय उपाध्यक्ष. यह ब्राह्मण जाति से हैं जो सवर्ण कैटेगरी में है.
- प्रो. रामगोपाल यादव : राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव. यह भी यादव जाति से हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी कैटेगरी में है.
शिवपाल सिंह यादव : राष्ट्रीय महासचिव, यादव जाति से हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी कैटेगरी में है.
- लालजी वर्मा : राष्ट्रीय महासचिव, ये कुर्मी जाति से हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC कैटेगरी में है.
- राम अचल राजभर : राष्ट्रीय महासचिव, इनकी जाति राजभर है जो ओबीसी कैटेगरी में है.
- अवधेश प्रसादपद: राष्ट्रीय महासचिव, अयोध्या सीट से सांसद हैं, पासी जाति से हैं जो अनुसूचित जाति कैटेगरी में आती है.
- विशंभर प्रसाद निषाद: राष्ट्रीय महासचिव, ओबीसी कैटेगरी की निषाद/मल्लाह जाति से हैं.
- रामजी लाल सुमन: राष्ट्रीय महासचिव (राज्यसभा सांसद), ये अनुसूचित जाति कैटेगरी में जाटव समाज से आते हैं.
- हरेंद्र सिंह मलिक: राष्ट्रीय महासचिव (सांसद – मुजफ्फरनगर), ये भी ओबीसी कैटेगरी की जाट जाति से आते हैं.
समाजवादी पार्टी का संगठन संभाल रहे नेताओं की लिस्ट देखें तो उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव समेत दो ओबीसी और एक ब्राह्मण और एक मुस्लिम हैं. वहीं ओवरऑल 13 लोगों की टीम को देखें तो अखिलेश यादव समेत 8 नेता ओबीसी कैटेगरी के हैं. यानी यहां पर सपा अपने पीडीए फॉर्मूले में P की कसौटी पर खरे उतरते हैं. लिस्ट में D को तलाशे तो केवल अवधेश प्रसाद और रामजीलाल सुमन का नाम दिखता है. केवल ये दोनों नेता ही अनुसूचित जाति से हैं. वहीं A यानी अल्पसंख्यक के नाम पर केवल यूपी की टीम महबूब अली को रखा गया है, जो ज्यादा लाइमलाइट रहते भी नहीं हैं.
वहीं पिछले कुछ समय से अखिलेश यादव ब्राह्मणों को साथ लाने के लिए PDA में P का मतलब पंडित भी बता रहे हैं. P से पंडित के हिसाब से समाजवादी पार्टी के संगठन में केवल माता प्रसाद और किरनमेय नंदा ही नजर आते हैं. यानी समाजवादी पार्टी में प्रमुख पदों पर बैठे नेताओं की लिस्ट के हिसाब से अखिलेश यादव भले ही PDA का नारा देते हैं, लेकिन अपनी पार्टी में ही इसका अनुपाल नहीं नहीं कर रहे हैं.
यूपी कांग्रेस PDA की कसौटी पर सपा से ज्यादा असरदार
इसी साल एक जुलाई को अखिलेश यादव के जन्मदिन पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट लिखकर उन्हें बधाई दी थी. इसमें राहुल गांधी ने भरोसा दिलाया था कि वह अखिलेश यादव के PDA को मजबूत करने की पूरी कोशिश करेंगे. अब जब कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपनी टीम में बदलाव किए हैं उसे देखकर साफ हो रहा है कि वह भी अपनी पार्टी में PDA फॉर्मूले को ही अपना रहे हैं. इतना ही नहीं तुलनात्मक रूप से देखेंगे तो राहुल गांधी ने अखिलेश यादव के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से पीडीए को फॉलो किया है.
- राहुल ने PDA में P को ध्यान में रखकर आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष, देवेंद्र निषाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष और वीरेंद्र चौधरी को यूपी विधानसभा में विधायक दल का नेता चुना है. यहां अराधना P से पंडित के कॉलम को फुलफील कर रही हैं. देवेंद्र निषाद और वीरेंद्र चौधरी P से पिछड़ा का प्रतिनिधि हैं.
- वहीं PDA में D को ध्यान में राहुल गांधी ने दलित समाज से आने वाले राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी और पासी जाति से आने वाले आलोक कुमार को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया है. दोनों D कॉलम पर सौ फीसदी खरे उतरते हैं.
- PDA में A के कॉलम को फुल करने के लिए राहुल गांधी ने सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है.
तुलनात्मक रूप से देखें तो राहुल गांधी की टीम PDA का फॉर्मूला अपनी टीम में लागू करने के मामले में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव से कहीं आगे हैं. पिछले दो चुनावों से भले ही यूपी का मुसलमान बिलकुल एकतरफा सपा को वोट देता रहा है, लेकिन संगठन पर नजर डालें तो वहां भी अल्पसंख्यक नदारद ही नजर आता है.
अजय राय को हटाने और आराधना मिश्रा को लाने की वजह क्या?
यूपी कांग्रेस के नेताओं से बातचीत में एक बात पता चलती है कि अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और आराधना मिश्रा मोना को यह जिम्मेदारी सौंपने के पीछे समाजवादी पार्टी वजह है. दरअसल, अजय राय थोड़े कड़क मिजाजी नेता हैं. गठबंधन में सीट शेयरिंग जैसे मुद्दों पर बातचीत के दौरान वह बिलकुल ठसक के साथ अपनी बातें रखते हैं. वह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुकाबले काफी वरिष्ठ भी हैं. ऐसे में कांग्रेस को लग रहा था कि सीट शेयरिंग की बातचीत की टेबल पर बात बिगड़ सकती है. वहीं आराधना मिश्रा सॉफ्ट स्पोकिंग हैं. दूसरी वह महिला हैं. पिता प्रमोद तिवारी की वजह से समाजवादी पार्टी के ज्यादातर बड़े नेताओं के साथ उनके घरेलू रिश्ते हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि सपा के साथ सीट शेयरिंग का मसला आसानी से सुलझ सकता है.

