Noida Sports City: गौतमबुद्ध नगर का नोएडा अब सिर्फ एजुकेशन और आईटी-हेल्थ हब के तौर पर ही नहीं, बल्कि देश के एक बड़े स्पोर्ट्स हब के रूप में नई पहचान बनाने जा रहा है. पिछले कई सालों से कागजों और विवादों में अटकी महत्वाकांक्षी ‘नोएडा स्पोर्ट्स सिटी’ परियोजना को लेकर आखिरकार बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है. प्रमुख बिल्डरों लॉजिक्स इंफ्रा, 3C ग्रीन कंस्ट्रक्शन और एटीएस होम्स ने स्पोर्ट्स सिटी का संशोधित लेआउट प्लान नोएडा विकास प्राधिकरण को सौंप दिया है. करीब 14 साल के लंबे इंतजार के बाद खेल सुविधाओं और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है.
प्राधिकरण ने इस नए लेआउट को सार्वजनिक करते हुए 28 सितंबर से आम नागरिकों और बायर्स से 15 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं. इन आपत्तियों के निपटारे के साथ ही परियोजना में फंसे लगभग 20 हजार फ्लैट खरीदारों के फ्लैटों की रजिस्ट्री, एनओसी और पजेशन का अटका हुआ रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा.
70 फीसदी जमीन पर खेल सुविधाएं, 20% फ्लैट रहेंगे बंधक
प्राधिकरण द्वारा जारी संशोधित लेआउट प्लान के मुताबिक, स्पोर्ट्स सिटी की कुल भूमि का 70 फीसदी हिस्सा केवल खेल गतिविधियों के लिए आरक्षित रहेगा. इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के दो क्रिकेट स्टेडियम, दो गोल्फ कोर्स, स्विमिंग सेंटर, इनडोर मल्टीपर्पज स्पोर्ट्स हॉल, टेनिस कोर्ट और स्क्वैश कोर्ट जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं बनाई जाएंगी. बचे हुए हिस्से में से 26 से 28 फीसदी क्षेत्र में आवासीय हाउसिंग सोसायटियां और 2 से 4 फीसदी हिस्से में व्यावसायिक (कमर्शियल) गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी.
इन नियमों का रखना होगा ख्याल
- बिल्डरों को खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर 3 साल के भीतर तैयार करना होगा.
- ग्रुप हाउसिंग रिहायशी टावरों को पूरा करने के लिए 5 साल की समयसीमा तय की गई है.
- जब तक बिल्डर खेल सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं कर लेते, तब तक प्राधिकरण परियोजनाओं के 20 प्रतिशत फ्लैटों को बंधक रखेगा.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और बकाए के भुगतान का फॉर्मूला
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का खाका नोएडा प्राधिकरण ने साल 2007 से 2011 के बीच करीब 800 एकड़ जमीन पर खींचा था. चार प्रमुख प्लॉटों पर 311.60 हेक्टेयर जमीन सेक्टर-78, 79, 101, 150 और 152 में फैली है. उप-विभाजन के बाद इसके 84 टुकड़े हो चुके हैं, जिनमें से 74 के लेआउट को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और 46 पर ग्रुप हाउसिंग के नक्शे पास हैं. हालांकि, खेल सुविधाएं न बनाकर सिर्फ आवासीय टावर खड़े करने पर कैग ऑडिट के बाद जनवरी 2021 में प्राधिकरण ने रजिस्ट्री और नक्शों पर रोक लगा दी थी.
अप्रैल 2026 में 5 साल पुराने प्रतिबंध हटने और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब प्राधिकरण इसका ठोस समाधान निकाल रहा है. प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर सिंह के अनुसार, तीनों संशोधित प्लान वेबसाइट पर अपलोड हैं.
वित्तीय समाधान के तहत:
- बिल्डरों को जमीन के कुल बकाए का 20 प्रतिशत तुरंत देना होगा.
- बाकी 80 प्रतिशत बकाया 3 साल की आसान किस्तों में जमा कराना होगा.
- बिल्डरों को बकाए पर 6 साल का ‘जीरो पीरियड’ लाभ भी दिया जाएगा.
- इसी फॉर्मूले के तहत सेक्टर-150 के प्लॉट नंबर-2 पर फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री के लिए प्राधिकरण ओसी भी जारी कर चुका है.
किन सेक्टरों में किस बिल्डर का कितना बड़ा प्रोजेक्ट?
संशोधित मास्टर प्लान लेआउट के तहत बिल्डर खेल सुविधाओं के लिए जमीन अलग और स्पष्ट करके दे रहे हैं:
- लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स: सेक्टर-150 के प्लॉट संख्या-1 में मुख्य आवंटी के तौर पर लगभग 9.86 लाख वर्गमीटर क्षेत्र का संशोधित लेआउट पेश किया है.
- 3C ग्रीन कंस्ट्रक्शन: सेक्टर-78 और 79 में लगभग 6.6 लाख वर्गमीटर जमीन पर संशोधित लेआउट प्रस्तुत किया है.
- एटीएस होम्स: सेक्टर-152 में लगभग 5.06 लाख वर्गमीटर क्षेत्र का संशोधित लेआउट जमा कराया है.
कनेक्टिविटी का पावरहाउस: एक्सप्रेसवे, मेट्रो और बुलेट ट्रेन रूट
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी, विशेषकर सेक्टर 150 और 152, पूरे दिल्ली-एनसीआर में सबसे बेहतरीन कनेक्टिविटी वाले इलाकों में शुमार हैं. यह इलाका सीधे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित है. डीएनडी फ्लाईवे से दिल्ली और दूसरी ओर यमुना एक्सप्रेसवे से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा और आगरा तक सिग्नल-फ्री आवागमन मिलता है. साथ ही, फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (FNG) एक्सप्रेसवे इसे पूरे रीजन से हाई-स्पीड लिंक देगा.
एक्वा लाइन का सेक्टर-148 मेट्रो स्टेशन स्पोर्ट्स सिटी (सेक्टर 150) से महज 3 से 5 किमी की दूरी पर है. वहीं, फरवरी में केंद्र सरकार द्वारा मंजूर सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन नई मेट्रो लाइन विस्तार के बाद यहां के लोगों को दिल्ली मेट्रो की ब्लू और मैजेंटा लाइन के लिए सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. 865 किलोमीटर लंबे दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का एक स्टेशन नोएडा सेक्टर-144 और दूसरा जेवर एयरपोर्ट पर प्रस्तावित है. सेक्टर-144 स्पोर्ट्स सिटी के बेहद नजदीक है, जिसका अंतिम निर्णय डीपीआर और फाइनल अलाइनमेंट के बाद होगा.

