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हिंदी सिनेमा की दिग्गज एक्ट्रेस आशा पारेख ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाए हैं. 60 और 70 के दशक में तो वह डिमांडिंग एक्ट्रेस रही थीं. अपने करियर में सफलता के शिखर तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था. महज 11 रुपये में फिल्म के लिए साइन किया गया, तो कुछ दिनों की शूटिंग के बाद यह कहकर फिल्म से बाहर कर दिया गया. लेकिन रिजेक्शन के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, मनोज कुमार और जितेंद्र जैसे स्टार संग काम किया.
नई दिल्ली. 60 और 70 के दशक की वो बला की खूबसूरत हसीना, जिसने अपने करियर में हर तरह के रोल निभाए. हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री बनने के साथ सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली. हम बात कर रहे है आशा पारेख की. आशा का जन्म आज ही के दिन 2 अक्टूबर 1942 को मुंबई के सांता क्रूज में हुआ था. अपने करियर में उन्हें धर्मेंद्र से लेकर राजेश खन्ना तक हर स्टार के साथ काम किया.
आशा पारेख का नाम उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई. उनकी अदाकारी, डांस और स्क्रीन प्रेजेंस के लोग दीवाने थे. लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब उन्हें एक फिल्म की हीरोइन के तौर पर सिर्फ 11 रुपये साइनिंग अमाउंट मिला था और कुछ दिनों की शूटिंग के बाद उन्हें फिल्म से यह कहकर निकाल दिया गया कि वह ‘स्टार मैटीरियल’ नहीं हैं.
उस वक्त यह उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था. हालांकि, उन्होंने इस रिजेक्शन को खुद पर हावी नहीं होने दिया और आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई.आशा पारेख का जन्म 2 अक्टूबर 1942 को मुंबई के सांता क्रूज में हुआ था. उन्हें बचपन से ही डांस का काफी शौक था. महज आठ साल की उम्र में उन्होंने स्कूल के एक इनेंट में डांस परफॉर्म किया था.
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इसके बाद उन्होंने कथक और भरतनाट्यम की ट्रेनिंग भी ली. उनकी डांस परफॉर्मेंस को देखकर मशहूर निर्देशक बिमल रॉय काफी प्रभावित हुए और उन्हें बतौर बाल कलाकार फिल्म ‘बाप बेटी’ में काम करने का मौका दिया. इसके बाद आशा पारेख ने ‘मां’, ‘आसमान’ और ‘श्री चैतन्य महाप्रभु’ जैसी फिल्मों में भी बाल कलाकार के तौर पर काम किया. धीरे-धीरे उनका रुझान फिल्मों की तरफ बढ़ता गया और वह बतौर लीड एक्ट्रेस काम करने के सपने देखने लगीं.
आशा पारेख के करियर में एक समय ऐसा आया, जब उन्हें विजय भट्ट की फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ में बतौर हीरोइन साइन किया गया. फिल्म के लिए उन्हें 11 रुपये साइनिंग अमाउंट के तौर पर मिले थे. आशा इस मौके को लेकर काफी खुश थीं और उन्होंने फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर दी थी.लेकिन कुछ दिनों की शूटिंग के बाद अचानक उन्हें फिल्म से बाहर कर दिया गया. उन्हें बताया गया कि वह ‘स्टार मैटीरियल’ नहीं हैं. उनकी जगह फिल्म में अमीता को कास्ट कर लिया गया. इस घटना ने आशा पारेख को काफी निराश किया, लेकिन यही रिजेक्शन आगे चलकर उनके करियर का बड़ा मोड़ बन गया.
‘गूंज उठी शहनाई’ से बाहर होने के कुछ समय बाद फिल्ममेकर नासिर हुसैन ने आशा पारेख को अपनी फिल्म ‘दिल देके देखो’ के लिए स्क्रीन टेस्ट देने के लिए बुलाया. आशा ने स्क्रीन टेस्ट दिया और उन्हें फिल्म में काम करने का मौका मिल गया. 1959 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनके साथ शम्मी कपूर नजर आए थे. फिल्म दर्शकों को पसंद आई और हिट रही. इसके साथ ही आशा पारेख को बतौर हीरोइन अपनी पहचान मिल गई. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
‘दिल देके देखो’ की सफलता के बाद आशा पारेख ने एक के बाद एक कई हिट फिल्मों में काम किया. ‘जब प्यार किसी से होता है’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘लव इन टोक्यो’, ‘मेरे सनम’, ‘आए दिन बहार के’, ‘उपकार’, ‘कटी पतंग’, ‘आन मिलो सजना’, ‘कारवां’ और ‘मेरा गांव मेरा देश’ जैसी फिल्मों में उनके काम को दर्शकों ने खूब पसंद किया.फिल्म ‘कटी पतंग’ में आशा पारेख के अभिनय की खास तौर पर तारीफ हुई. इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी मिला. इन फिल्मों में आशा पारेख ने राजेश खन्ना,
आशा पारेख ने सिर्फ फिल्मों में एक्टिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने निर्माता और निर्देशक के तौर पर भी काम किया. वह टीवी इंडस्ट्री से भी जुड़ीं और गुजराती सीरियल ‘ज्योति’ का निर्देशन किया. इसके अलावा वह ‘कोरा कागज’ जैसे टीवी प्रोजेक्ट का भी हिस्सा रहीं. आशा पारेख सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली. वह 1998 से 2001 तक इस पद पर रहीं और इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं.



