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Jaunpur News: 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती देशभर में मनाई जाती है. महात्मा गांधी से जुड़े कई किस्से लोग आज भी याद करते हैं. ऐसा ही एक किस्सा जौनपुर से भी जुड़ा है, जहां एक जमींदार के घर बापू जी अपने जन्मदिन पर आए थे.
जौनपुर: 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती देशभर के लिए खास दिन है, लेकिन जौनपुर के लिए इस दिन की याद और भी ऐतिहासिक हो जाती है. 2 अक्टूबर 1929 को महात्मा गांधी जौनपुर पहुंचे थे. बताया जाता है कि उस समय शहर में उनका बड़ा सम्मेलन हुआ था. इसी दौरान जौनपुर के जमींदार परिवार से गांधी जी की ऐसी मुलाकात हुई, जिसकी कहानी आज भी परिवार के पास मौजूद यादों और उस पुराने मकान से जुड़ी हुई है.
डॉ. विमला सिंह ने बताया कि गांधी जी को बाबू रामेश्वर प्रसाद सिंह जौनपुर के रामसमंडल आवास पर लेकर आए थे. वहां उनका बड़ा सम्मेलन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे थे. उस समय उनके परिवार का जमींदारी से संबंध था. गांधी जी के विचारों और आह्वान का परिवार पर ऐसा असर पड़ा कि एक बड़ा फैसला उसी समय ले लिया गया.
कागजों में लगा दी आग
डॉ. विमला सिंह बताती हैं कि बाबू साहब ने गांधी जी से पूछा कि उन्हें क्या उपहार दिया जाए. गांधी जी ने कोई धन-संपत्ति या दूसरी वस्तु मांगने के बजाय कहा कि जमींदारी से जुड़े कागजात वाला बक्सा मंगवा दीजिए. परिवार के पास वह पुराना बक्सा आज भी मौजूद बताया जाता है. डॉ. विमला सिंह ने बताया कि जमींदारी के कागजात आंगन में लाए गए. गांधी जी ने उन कागजों में माचिस लगा दी और कहा, ‘आज से जमींदारी खत्म है, जो जहां रहता है वहीं रहेगा.’ परिवार ने गांधी जी के इस आह्वान को सहर्ष स्वीकार कर लिया. उस समय परिवार की जमीन पर करीब 32 मकान थे. उन्होंने कहा कि आज भी परिवार की कोशिश रहती है कि वहां रहने वाले लोगों का सहयोग किया जाए.
बाबू साहब की मूर्ति पर करते थे माल्यार्पण
डॉ. विमला सिंह ने इस बात पर अफसोस जताया कि गांधी जी से जुड़े इतने महत्वपूर्ण प्रसंग के बावजूद आज इस स्थान को वह पहचान नहीं मिल पाई हैं, जिसकी वह हकदार हैं. उन्होंने बताया कि पहले गांधी जयंती के आसपास लोग यहां आते थे और उनके परिवार के पूर्वज बाबू साहब की मूर्ति पर माल्यार्पण करते थे. उन्होंने उम्मीद जताई कि जौनपुर प्रशासन गांधी जी से जुड़े इस ऐतिहासिक प्रसंग को संज्ञान में लेकर इस स्थान को उचित महत्व देगा.
2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के मौके पर एक बार फिर यह कहानी सामने आती है कि करीब 97 साल पहले जौनपुर की धरती पर गांधी जी ने सिर्फ भाषण नहीं दिया था, बल्कि उनके विचारों से प्रभावित होकर एक जमींदार परिवार ने अपनी जमींदारी के कागजात तक आग के हवाले कर दिए थे.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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