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इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल…” फिल्म ‘धरम करम’ का यह गाना आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है. मुकेश की आवाज, आरडी बर्मन का संगीत और मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे शब्दों ने इस गाने को यादगार बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सदाबहार गीत के पीछे संघर्ष और खुद्दारी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी है? बताया जाता है कि मजरूह ने जेल में रहते हुए इस गीत से जुड़ी रचना लिखी थी, जिसे बाद में राज कपूर ने अपनी फिल्म में इस्तेमाल किया.
राज कपूर ने यूं दिया था साथ
नई दिल्ली. जरूह सुल्तानपुरी का जन्म 1 अक्टूबर 1919 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुआ था. वह हिंदी सिनेमा के मशहूर गीतकार होने के साथ-साथ उर्दू के बड़े शायर भी थे. मजरूह प्रगतिशील लेखक आंदोलन से जुड़े हुए थे और अपनी रचनाओं के जरिए समाज के मुद्दों पर खुलकर बात करते थे. उनके लिखने का अंदाज बेबाक था और वह अपने विचारों को शब्दों में उतारने से पीछे नहीं हटते थे.
1940 के दशक के आखिर में देश का राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण था. मजरूह के वामपंथी विचारों और सरकार की नीतियों पर उनकी कविताओं के कारण वह भी सरकारी कार्रवाई के दायरे में आ गए. उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. इस मुश्किल दौर में भी उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा और अपनी कलम के जरिए अपने विचारों को सामने रखते रहे.
जेल में लिखी रचना, जो बाद में बनी सदाबहार गीत
मजरूह सुल्तानपुरी के जेल जाने के बाद उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. घर चलाना मुश्किल हो रहा था और जेल में बंद होने के कारण उनके लिए काम करना भी संभव नहीं था. इसी बीच राज कपूर को उनकी परिस्थितियों के बारे में पता चला. राज कपूर मजरूह के हुनर को जानते थे और उनकी मदद करना चाहते थे. किस्से के मुताबिक, राज कपूर ने मजरूह को आर्थिक मदद देने की पेशकश की. लेकिन मजरूह ने सीधे पैसे लेने के बजाय काम मांगना बेहतर समझा. वह नहीं चाहते थे कि उन्हें किसी तरह की खैरात मिले. उनकी इच्छा थी कि उन्हें अपनी मेहनत और हुनर के बदले काम मिले. मजरूह की यह बात सुनकर राज कपूर ने उन्हें एक गीत लिखने का काम देने का फैसला किया. बताया जाता है कि उस समय मजरूह के पास जेल में लिखी हुई एक रचना मौजूद थी. उन्होंने वही रचना राज कपूर को दे दी. हालांकि, यह रचना तुरंत किसी फिल्म का हिस्सा नहीं बनी.
कई साल बाद ‘धरम करम’ में सुनाई दिए ये बोल
मजरूह सुल्तानपुरी की जेल में लिखी गई रचना से जुड़ा यह किस्सा सालों से सुनाया जाता रहा है. बाद में राज कपूर ने फिल्म ‘धरम करम’ में इसके बोलों का इस्तेमाल किया. इस फिल्म में ‘इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल’ गीत को मुकेश ने अपनी आवाज दी थी, जबकि इसका संगीत आरडी बर्मन ने तैयार किया था. गाने के बोल जिंदगी की सच्चाई और इंसान के पीछे रह जाने वाली उसकी पहचान की बात करते हैं. इंसान एक दिन इस दुनिया से चला जाता है, लेकिन उसके काम और उसके शब्द लोगों के दिलों में लंबे समय तक जिंदा रह सकते हैं. शायद यही वजह है कि यह गीत आज भी लोगों को पसंद आता है.
हिंदी सिनेमा को दिए कई यादगार गीत
मजरूह सुल्तानपुरी ने अपने लंबे करियर में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कई ऐसे गीत दिए, जिन्हें आज भी सुना जाता है. उन्होंने अलग-अलग दौर के संगीतकारों के साथ काम किया और अपने शब्दों से कई फिल्मों के गानों को खास बनाया. उनकी लेखनी में रोमांस, जिंदगी के अनुभव और भावनाओं की गहराई देखने को मिलती है. भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. मजरूह सुल्तानपुरी का जीवन इस बात की मिसाल है कि मुश्किल हालात के बावजूद इंसान अपने हुनर और आत्मसम्मान को कायम रख सकता है. ‘इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल’ जैसे गीत आज भी उनके शब्दों की ताकत और उनकी विरासत की याद दिलाते हैं.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…
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