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Lovepreet Singh won silver: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 8वें दिन भारत के लवप्रीत सिंह ने पुरुषों की +110 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीता. बर्मिंघम के कांस्य को सिल्वर में बदलते हुए लवप्रीत ने कुल 388 किग्रा वजन उठाया. हालांकि, वे स्वर्ण पदक से बेहद करीब आकर चूक गए. न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने 389 किग्रा उठाकर महज 1 किग्रा के अंतर से गोल्ड जीता. लवप्रीत की इस शानदार उपलब्धि के साथ भारत का वेटलिफ्टिंग अभियान समाप्त हुआ और कुल पदक तालिका 16 पहुंच गई.
लवप्रीत सिंह ने भारत को दिलाया 16वां मेडल.
नई दिल्ली. भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह का आखिरी पलों में दिल टूट गया. हालांकि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वह अपने पदक का रंग बदलने में जरूर सफल रहे लेकिन गोल्ड से चूक गए. पुरुषों की +110 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में भारत के स्टार वेटलिफ्टर लवप्रीत ने अपनी ताकत और जज्बे का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इस पदक के साथ ही ग्लासगो खेलों में भारत की आधिकारिक पदक तालिका 16 तक पहुंच गई है. हालांकि, लवप्रीत लगभग पूरे मुकाबले के दौरान स्वर्ण पदक जीतने की दहलीज पर खड़े थे, लेकिन अंतिम पलों में पासा पलट गया और बेहद करीबी अंतर से सोना उनके हाथ से फिसल गया. इसके बावजूद, उनके इस प्रदर्शन ने पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है.
मुकाबले की शुरुआत से ही लवप्रीत सिंह (Lovepreet Singh) बेहद सटीक और संतुलित नजर आ रहे थे. उन्होंने अपनी पहली ही लिफ्ट में ऐसा शानदार प्रदर्शन किया कि प्रतिस्पर्धा में शामिल अन्य सभी खिलाड़ी उनसे पीछे छूट गए. स्नैच और क्लीन एंड जर्क के पहले चार प्रयासों तक लवप्रीत लगातार बढ़त बनाए हुए थे. उनकी तकनीक, एकाग्रता और भार उठाने की क्षमता को देखकर स्टेडियम में मौजूद हर भारतीय प्रशंसक को यह लगने लगा था कि भारत की झोली में एक और स्वर्णिम पदक आने वाला है. अपने पांचवें प्रयास तक लवप्रीत शीर्ष पर काबिज रहे और मुकाबला पूरी तरह से उनके नियंत्रण में दिखाई दे रहा था.
डेविड लिटी का चमत्कारिक कमबैक और 15 किग्रा की बढ़त का अंत
जब लग रहा था कि लवप्रीत का स्वर्ण पदक पक्का है, तभी न्यूजीलैंड के दिग्गज और अनुभवी वेटलिफ्टर डेविड एंड्रयू लिटी ने खेल का पासा पलट दिया. लिटी उस वक्त लवप्रीत से 15 किलोग्राम के बड़े अंतर से पीछे चल रहे थे. लेकिन अपने पेनल्टीमेट (दूसरे-अंतिम) प्रयास में उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. लिटी ने 223 किलोग्राम का भार बेहद सफाई से उठाया (क्लीन एंड जर्क) और 15 किग्रा के बड़े अंतर को पाटते हुए लवप्रीत से महज एक किलोग्राम की बढ़त हासिल कर ली.
लिटी का यह प्रयास इतना अभूतपूर्व था कि इसने स्वर्ण पदक पर उनके नाम की मुहर लगा दी. इस चमत्कारी लिफ्ट के बाद उन्हें अपने अंतिम प्रयास की जरूरत ही नहीं पड़ी. न्यूजीलैंड के इस खिलाड़ी ने कुल 389 किलोग्राम का वजन उठाकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया, जबकि लवप्रीत सिंह कुल 388 किलोग्राम का भार उठाकर सिर्फ एक किलोग्राम से स्वर्ण पदक से चूक गए.
दिल टूटने का लम्हा, लेकिन गर्व से भरा प्रदर्शन
किसी भी एथलीट के लिए इतने करीब आकर स्वर्ण पदक खोना यकीनन दिल तोड़ने वाला क्षण होता है. लवप्रीत के लिए भी यह पल बेहद भावुक और कसक भरा रहा. हालांकि, निराशा के बीच उनकी यह उपलब्धि गर्व करने लायक है. लवप्रीत ने बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य (ब्रोंज) पदक जीता था. ग्लासगो 2026 में उन्होंने अपने पदक का रंग बदलते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया और राष्ट्रमंडल खेलों में अपने रिकॉर्ड को और बेहतर किया. हार-जीत के इस खेल में लवप्रीत ने यह साबित कर दिया कि वे दुनिया के शीर्ष वेटलिफ्टरों में से एक हैं.
वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार अंत
लवप्रीत सिंह के इस रजत पदक के साथ ही ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का वेटलिफ्टिंग अभियान एक और सुखद और यादगार मोड़ पर समाप्त हुआ. भारत ने वेटलिफ्टिंग में लगातार अपना दबदबा कायम रखा है और लवप्रीत का यह पदक देश के सफल अभियान की एक और नई मिसाल बना. आठवें दिन मिली इस सफलता से भारतीय दल का उत्साह चरम पर है. भले ही कुछ ग्राम का अंतर लवप्रीत को पोडियम के सबसे ऊपरी पायदान पर खड़े होने से रोक गया, लेकिन उनकी मेहनत, संघर्ष और अंतिम सेकंड तक लड़ी गई जंग ने करोड़ों भारतवासियों का दिल जीत लिया है.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…
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