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देश में इन दिनों ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि चर्चा, बहस और अदालत तक पहुंचा मुद्दा बना हुआ है. ऐसे में खंडवा पहुंचे अभिनेता अन्नू कपूर ने ‘वंदे मातरम्’ से अपने जुड़ाव की वो कहानी सुनाई, जो करीब 13 साल पुरानी है और अब एक बार फिर वायरल हो रही है. जो जेन जी के बीच भी वायरल है. ‘मुन्नी बदनाम’ को ‘वंदे मातरम्’ में बदलने की कहानी जानिए, अन्नू कपूर की जुबानी.
अन्नू कपूर से जानें ‘मुन्नी बदनाम’ को ‘वंदे मातरम्’ में बदलने की कहानी
खंडवा. इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लाल किले की प्राचीर से भी ‘वंदे मातरम्’ का गायन कराया गया. लेकिन इसी दौरान सवाल भी उठे-पूरे छह अंतरे गाए जाएं या सिर्फ पहले दो? क्या इसे गाना अनिवार्य किया जा सकता है? और क्या इसे लेकर किसी व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है? सवाल अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है.
खंडवा में अन्नू कपूर ने ‘वंदे मातरम्’ की अपनी कहानी सुनाई. मौका था साहित्यकार डॉ. आलोक सेठी की पुस्तक ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ के विमोचन का. मंच पर पुस्तक का विमोचन हुआ. अन्नू कपूर ने साहित्य और सिनेमा पर बात की और फिर बात पहुंची ‘वंदे मातरम्’ तक. अन्नू कपूर ने बताया कि करीब 13 साल पहले उन्होंने एक प्रयोग किया था. उनका कहना है कि गाना कहीं से भी शुरू हो. लेकिन उसका अंत ‘वंदे मातरम्’ पर होगा. इसी प्रयोग में ‘मुन्नी बदनाम’ जैसे गीत को भी उन्होंने अपनी शैली में ‘वंदे मातरम्’ से जोड़ा था. अब इतने साल बाद वही वीडियो सोशल मीडिया पर फिर वायरल है और अन्नू कपूर के मुताबिक जेन-जी के बीच भी यह चर्चा में आया है.
‘सफल’ नहीं, ‘सुफल’ शब्द का किया गया उपयोग
लेकिन, अन्नू कपूर की बात सिर्फ गाने तक सीमित नहीं रही. उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के एक शब्द ‘सुफलाम’ को लेकर अपनी व्याख्या की. उन्होंने कहा- बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘सफल’ नहीं, ‘सुफल’ शब्द का इस्तेमाल किया. मतलब सिर्फ सफलता नहीं बल्कि ऐसा फल, जिसका परिणाम भी अच्छा हो. उन्होंने पेड़ का उदाहरण देते हुए कहा-अगर जड़ में विष होगा, तो फल भी विषैला होगा. यानी देश की प्रगति सिर्फ सफलता तक सीमित न हो. उसका परिणाम भी समाज और देश के लिए बेहतर हो- यही ‘सुफल’ की भावना है.
किशोर कुमार को भारत रत्न देने की मांग
एक तरफ देश में ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने का उत्सव है. दूसरी तरफ इसके गायन, इसके अलग-अलग अंतरों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर कानूनी बहस जारी है. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह तय करने से परहेज किया है कि गीत के दो अंतरे गाए जाएं या छह. अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि किसी व्यक्ति के न गाने पर आपराधिक दंड का प्रावधान कितना संवैधानिक है. इसी बीच खंडवा में अन्नू कपूर ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अपनी 13 साल पुरानी कहानी सुनाई और किशोर कुमार को भारत रत्न देने की मांग को लेकर अपनी बात देश के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की इच्छा भी जताई.
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