बहराइच: जिस खेत में कुछ दिन पहले तक धान की फसल लहलहा रही थी, उसी खेत में अब पानी भरा है और फसल जमीन पर पड़ी है. मिर्जापुर गांव के किसान त्रिलोकी ने 10 बीघे यानी करीब 2 एकड़ में धान की खेती की थी. इसके लिए उन्होंने 25 से 30 हजार रुपये खर्च किए थे. फसल अच्छी थी और दाने भी पकने लगे थे. उन्हें उम्मीद थी कि इस बार करीब 80 क्विंटल धान होगा और इससे करीब 1.60 लाख रुपये की आमदनी हो जाएगी. लेकिन 27 तारीख को आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने उनकी पूरी फसल बर्बाद कर दी.
आंधी और बारिश के बाद धान की पूरी फसल खेत में गिर गई. पानी में डूबने के कारण अब फसल के सड़ने का खतरा भी है. त्रिलोकी ने खेती के लिए लोन लिया था, लेकिन फसल का बीमा नहीं कराया था. ऐसे में फसल बर्बाद होने के बाद उनके सामने परिवार का खर्च चलाने और कर्ज चुकाने की चिंता खड़ी हो गई है.
“80 क्विंटल धान की उम्मीद थी, अब कुछ नहीं बचा”
किसान त्रिलोकी का कहना है कि अगर मौसम खराब नहीं होता तो करीब 80 क्विंटल धान पैदा होता. इससे उन्हें लगभग 1.60 लाख रुपये की आमदनी होती. फसल तैयार होने की स्थिति में थी, लेकिन बारिश और आंधी ने कुछ ही समय में पूरी मेहनत खराब कर दी. 10 बीघे में लगी फसल के लिए उन्होंने करीब 25 से 30 हजार रुपये लगाए थे. अब खेत में धान गिरा पड़ा है और पानी भरा होने के कारण फसल के बचने की उम्मीद भी कम है.
धान के साथ पेड़-पौधों को भी नुकसान
बहराइच में तेज आंधी और बारिश से सिर्फ धान की फसल ही प्रभावित नहीं हुई है. कई जगह केले और दूसरे पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचा है. गांव के लोगों के अनुसार, कई खेतों में फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इस तरह की तबाही पहले नहीं देखी. लगातार बारिश और तेज हवा से कई जगह पेड़ और बिजली के पोल भी गिर गए हैं.
कई किसानों की फसल बर्बाद, नुकसान का सर्वे शुरू
बहराइच में त्रिलोकी अकेले किसान नहीं हैं, जिनकी फसल को नुकसान हुआ है. जिले के कई इलाकों में किसानों की फसल खराब हुई है. नुकसान का सही आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है. विभाग की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है. प्राकृतिक आपदा से हुए फसल नुकसान के बाद किसानों को अब सर्वे का इंतजार है. इसी के आधार पर नुकसान का आंकलन किया जाएगा और पात्र किसानों को राहत दी जाएगी.
बीमित और गैर-बीमित किसानों को मिलेगी राहत
प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर बीमित और गैर-बीमित दोनों श्रेणी के पात्र किसानों को राहत राशि मिलने का प्रावधान है. फसल नुकसान के सर्वे के दौरान खेत में लेखपाल, कानूनगो, ग्राम प्रधान या किसान की मौजूदगी जरूरी है. किसानों को सलाह दी गई है कि सर्वे के समय वे खुद खेत पर मौजूद रहें. अगर किसान खुद मौजूद नहीं रह सकते तो अपने प्रतिनिधि के तौर पर ग्राम प्रधान को साथ रख सकते हैं. इसके अलावा विभाग बिना मौके पर गए फर्जी रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों और दलालों पर कार्रवाई कर रहा है.
फसल नुकसान की मदद के लिए ये नंबर रखें नोट
फसल नुकसान से जुड़ी मदद के लिए किसान टोल फ्री नंबर 14447 और 1070 पर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा 7065514447 नंबर पर व्हाट्सऐप के जरिए भी जानकारी ली जा सकती है. किसान pmfby.gov.in पोर्टल पर भी जानकारी देख सकते हैं. फसल का नुकसान होने के बाद किसानों के लिए जरूरी है कि वे सर्वे के समय खेत पर मौजूद रहें और अपनी खराब हुई फसल का सही आकलन कराएं. इससे नुकसान के आधार पर मिलने वाली राहत की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.

