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Animal Husbandry Business : इंटर तक की पढ़ाई करने के बाद रणजीत ने डेयरी शुरू करने की सोची. इसके लिए उन्होंने राजस्थान, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों का दौरा किया और वहां की बड़ी-बड़ी डेयरियों की बारीकियां देखीं. इसके बाद गोंडा में अपनी डेयरी की नींव डाली. लोकल 18 से रणजीत सिंह बताते हैं कि उन्होंने 8 से 10 गाय और भैंस के साथ अपनी डेयरी शुरू की. आज उनकी डेयरी में मुर्रा नस्ल की भैंस के साथ एचएफ, साहिवाल समेत कई नस्ल की गायें भी हैं. रणजीत बताते हैं कि दूध की बिक्री से डेली 4,000 से 5,000 रुपये तक की आय हो रही है. गोबर से अतिरिक्त आमदनी हो जाती है.
गोंडा. डेयरी व्यवसाय तेजी से फल फूल रहा है. गोंडा के युवक रणजीत सिंह ने खेती-किसानी के साथ डेयरी व्यवसाय को अपनी कमाई का जरिया बनाया लिया है. इंटर तक की पढ़ाई करने के बाद खेती-किसानी कर रहे रणजीत के मन में डेयरी शुरू करने का विचार आया. इसके बाद उन्होंने राजस्थान, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों का दौरा किया और वहां की बड़ी-बड़ी डेयरियों को देखा. कई जगहों पर जाकर पशुपालन और डेयरी व्यवसाय की जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने गोंडा में डेयरी की नींव डाली. लोकल 18 से रणजीत सिंह बताते हैं कि शुरुआत में उन्होंने 8 से 10 गाय और भैंस के साथ डेयरी शुरू की. यह उनके लिए नया काम था, इसलिए शुरुआती दौर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. धीरे-धीरे उन्होंने पशुपालन से जुड़ी जानकारी जुटाई और डेयरी को आगे बढ़ाया. आज उनकी डेयरी में 20 से 25 पशु हैं. इनमें गाय और भैंस दोनों शामिल हैं. डेयरी में मुर्रा नस्ल की भैंस के साथ एचएफ, साहिवाल समेत कई नस्ल की गायें भी हैं.
खान-पान कैसा
रणजीत सिंह के मुताबिक डेयरी में पशुओं के खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाता है. पशुओं को हरा चारा, भूसा, चोकर और पशु आहार दिया जाता है. एक पशु को जरूरत के अनुसार करीब 3 किलो तक चोकर और पशु आहार दिया जाता है. इसके साथ हरा चारा और भूसा भी उपलब्ध कराया जाता है. पशुओं के लिए साफ-सफाई और पीने के पानी की उचित व्यवस्था की गई है. पशुओं की नियमित देखभाल और सही खान-पान से दूध उत्पादन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है. रणजीत सिंह कहते हैं कि उनकी डेयरी से रोजाना 90 से 95 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है. दूध की सप्लाई स्थानीय स्तर पर करने के साथ गोंडा की बड़ी डेयरियों में भी की जा रही है. दूध की बिक्री से प्रतिदिन 4,000 से 5,000 रुपये तक की आय हो रही है. गोबर को खाद के रूप में बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है.
गोमूत्र से भी कमाई का प्लान
रणजीत सिंह अब डेयरी व्यवसाय को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. उनका कहना है कि भविष्य में गोमूत्र को एकत्र करके उसका प्रसंस्करण और बिक्री करने की योजना है. इससे डेयरी से अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार हो सकता है. उनका कहना है कि डेयरी व्यवसाय शुरू करने से पहले उन्होंने दूसरे राज्यों की डेयरियों का अध्ययन किया और पशुपालन की बारीकियों को समझा. इसके बाद अपने क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से डेयरी शुरू की. उनका मानना है कि पशुओं की सही देखभाल, संतुलित आहार और नियमित प्रबंधन के जरिए डेयरी को धीरे-धीरे बड़ा कारोबार बनाया जा सकता है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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