इटावा: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में अपने तीन मासूम बच्चों की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाई महिला प्रियंका को हाईकोर्ट ने मुक्त कर दिया हो, लेकिन पिता ने अदालती फैसले पर सवाल उठाया है. पिता का तर्क है कि बेसक अदालत ने बेटी को तीन बच्चों की हत्या से मुक्त कर दिया गया है, लेकिन उसके लिए बेटी अभी भी दोषी है, इसलिए बेटी को घर पर रखने का सवाल ही नहीं उठता है. अपने तीन बच्चों की हत्यारी प्रियंका के पिता प्रमोद का तर्क है कि मेरी बेटी ने बच्चों को मारा है. अब उससे हम न कोई रिश्ता रखेंगे, न उसको हम अपने घर पर रखेंगे. हम उसे अपनाना नहीं चाहते. बच्चों की मौत के बाद न मैं उससे कभी मिला और न ही उसके केस में पैरवी की.
पति की मौत के बाद चचेरे देवर संग रहती थी प्रियंका
बता दें कि प्रियंका पर अपने 3 बच्चों को डुबोकर मारने का आरोप था. सेशन कोर्ट ने उसे फांसी की सजा दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने पलट दिया. हाईकोर्ट ने जिंदा बचे बच्चे की गवाही को भी खारिज कर दिया. पूरा मामला औरैया जिले के कोतवाली इलाके के बरौआ गांव का है, जहां रहने वाली प्रियंका की शादी 2009 में इटावा के लुहिया गांव के रहने वाले अवनीश से हुई थी. दोनों के 4 बेटे सोनू, आदित्य, माधव और मंगल हुए. 2020 में अवनीश की करंट लगने से मौत हो गई थी. पति की मौत के बाद प्रियंका अपने चचेरे देवर आशीष उर्फ डैनी के साथ रहने लगी थी. गांव में दोनों के साथ रहने पर लोग ताने मारते थे.
बच्चों को लेकर घर में होती थी लड़ाई
इसके बाद बच्चों को लेकर दोनों शहर के बनारसीदास मोहल्ले में किराए के मकान में रहने लगे. आशीष सैलून में काम करने लगा. इसी बीच, बच्चों की परवरिश को लेकर झगड़ा शुरू हो गया. आशीष प्रियंका और बच्चों के साथ मारपीट करता था. वह बार-बार कहता था कि तुम अपने बच्चों को मार डालो, तभी मैं तुम्हें साथ रखूंगा. प्रियंका के मायके बरौआ गांव में पिता प्रमोद, चाचा कन्हैयालाल और चाची गीता देवी रहते हैं. गीता देवी ने बताया कि प्रियंका को मैंने ही पाला-पोसा है. जब वह डेढ साल की थी, तभी उसकी मां की मौत हो गई थी. एक भाई पवन था, उसकी भी बीमारी से मौत हो गई थी.
मां ने बताया कि मैं एक बार प्रियंका से मिलने गई थी, तब उसे अपने किए पर पछतावा था. प्रियंका के पिता प्रमोद पहले तो हमसे बात करने को राजी नहीं हुए, फिर उन्होंने कहा- बेटी भले ही बरी हो गई हो, लेकिन उसने बच्चों को मार दिया था. वो आज तक न उससे मिलने गए हैं, न ही उसकी कोई पैरवी की है. उससे अपने पिता कोई रिश्ता नहीं है. घर में उसके लिए कोई जगह नहीं है. पिता का कहना है कि वो बेटी को कभी नहीं अपनाएंगे.
मां ने 4 बच्चों को सेंगर नदी में फेंका
बता दे, प्रियंका और आशीष दोनों के घरवालों ने कोई पैरवी नहीं की. इस कारण शासन की तरफ से दोनों को सरकारी वकील दिया गया. दोनों के घर से कभी कोई मिलने नहीं आया. जेल में दोनों का व्यवहार शांत ही रहा. प्रियंका को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं दिखता था, जबकि आशीष असहज रहता था. कोर्ट में भी उसने फंसाने की बात कही थी. आरोप था कि 27 जून, 2024 को प्रियंका ने प्रेमी देवर के ताने से परेशान होकर 4 बच्चों को सेंगर नदी में फेंक दिया था. इसमें से 3 बच्चों की मौत हो गई थी ,वहीं 8 साल के सोनू को गांववालों ने बचा लिया था. सोनू ने ही मां के खिलाफ कोर्ट में गवाही दी थी.
रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस करार
10 जुलाई, 2025 को सेशन कोर्ट ने प्रियंका को फांसी की सजा दी. जबकि देवर आशीष को उम्रकैद दी गई. दोनों पर 1-1 लाख जुर्माना भी लगा था. एडीजे सैफ अहमद ने घटना को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए कहा था कि जो महिला अपने बेटों को मार सकती है, उसे समाज में जीने का अधिकार नहीं है. बच्चों को डुबोने के बाद महिला के मन में ममता नहीं जागी. ऐसी घटना समाज में भय का माहौल पैदा करती है. इस घटना के बाद कैसे कोई यह दावे से कह सकता है कि एक बच्चा अपनी मां के साथ सुरक्षित रहगा.
8 साल के बच्चे का बयान विरोधाभास
कोर्ट में जज के सामने बेटे सोनू ने बताया कि मैं पहले इटावा में अपनी बुआ के यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था. अचानक एक दिन पिता की करंट से मौत हो गई. मां हम सबको नाना-नानी के घर ले गईं. यहां आशीष उर्फ डैनी अंकल आते थे. कोर्ट ने कहा कि 8 साल के सोनू के बयान में विरोधाभास है. उस पर सिखाए-पढ़ाए जाने का प्रभाव दिख रहा है. यह दावा समझ नहीं आता कि एक मां, जो अपने तीन बच्चों को मारना चाहती थी, उसने सबसे बड़े बच्चे को गवाह के रूप में जिंदा छोड़ दिया. मामले की पहली सूचना देने वाले तालेपुर के ग्राम प्रधान जितेंद्र भूषण को कोर्ट में गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया. पुलिस जांच और विवेचना अधिकारी की कार्यप्रणाली में कई खामियां मिली हैं.
बच्चे का बयान घटना के दिन दर्ज न करके 8 दिन बाद किया गया. बच्चों के चाचा, जिन्होंने केस कराया, उनका बयान विश्वसनीय नहीं लगा. हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष प्रियंका और आशीष के खिलाफ अपराध साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है, इसलिए निचली अदालत के फैसले को रद्द किया गया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अदालत के आदेश के आने के बाद आरोप पत्र दाखिल करने वाले और लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

