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इंजीनियरिंग छोड़ पकड़ा संगीत, उस्ताद के निधन से टूटा सपना, रेशमी आवाज से अमर हुए हेमंत कुमार

Admin by Admin
September 27, 2026
in मनोरंजन
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इंजीनियरिंग छोड़ पकड़ा संगीत, उस्ताद के निधन से टूटा सपना, रेशमी आवाज से अमर हुए हेमंत कुमार


Last Updated:September 27, 2026, 04:31 IST

हेमंत कुमार ने हिंदी और बंगाली सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी रेशमी आवाज से श्रोताओं के दिलों में जगह बनाई थी. वे सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि संगीतकार और फिल्म निर्माता भी थे. 26 सितंबर को उनकी पुण्यतिथि है. आइए, हिंदी सिनेमा के दिग्गज संगीतकार की जिंदगी को छोड़ और करीब से जानते हैं.

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पढ़ाई छोड़ पकड़ा संगीत, उस्ताद के निधन से टूटा सपना, रेशमी आवाज से हुए अमरZoom

हेमंत कुमार अपने दौर के मशहूर गायक, संगीतकार थे. (फोटो साभार: IANS)

नई दिल्ली: हेमंत कुमार का जन्म वाराणसी में हुआ था, जबकि उनके परिवार की जड़ें पश्चिम बंगाल के बहारू गांव से जुड़ी थी. बीसवीं सदी के शुरुआती सालों में उनका परिवार कोलकाता आकर बस गया. हेमंत कुमार का बचपन और शिक्षा कोलकाता में ही हुई. इसी शहर में उनकी मुलाकात कवि और लेखक सुभाष मुखोपाध्याय से हुई, जो उनके करीबी मित्र बने.

हेमंत कुमार ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, लेकिन संगीत के प्रति बढ़ते लगाव के कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. उन्होंने कुछ समय तक साहित्य में भी हाथ आजमाया. उनकी कई लघुकथाएं उस दौर की मशहूर बांग्ला पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं. हालांकि, संगीत ही उनका जीवन और करियर बन गया. हेमंत कुमार ने 1933 में ऑल इंडिया रेडियो के लिए अपना पहला गीत रिकॉर्ड कराया. बंगाली संगीतकार शैलेश दासगुप्ता से उन्हें काफी प्रेरणा मिली. उन्होंने 1980 के दशक में एक टेलीविजन इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने उस्ताद फैयाज खान से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी, लेकिन उस्ताद के निधन के बाद यह ट्रेनिंग आगे जारी नहीं रह सकी.

संगीत का सफर नहीं था आसान
संगीत की दुनिया में शुरुआती सफर उनके लिए आसान नहीं था. कई जगह स्वर परीक्षा देने के बावजूद उन्हें असफलता मिली और कोई संगीत निर्देशक उन्हें अपने साथ काम देने के लिए तैयार नहीं था. लेकिन संगीत के प्रति उनका जुनून और अपनी आवाज पर विश्वास कायम रहा. संघर्ष के उस दौर में उन्होंने हार मानने के बजाय साहित्य की ओर भी रुख किया. बाद में जब उन्हें संगीत की दुनिया में अवसर मिला, तो उनकी विशिष्ट आवाज ने उन्हें अलग पहचान दिलाई. 1937 में हेमंत कुमार ने कोलंबिया लेबल के लिए अपना पहला गैर-फिल्मी रिकॉर्ड जारी किया. इसमें संगीत शैलेश दासगुप्ता का था और गीत नरेश भट्टाचार्य ने लिखा था. इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया के लिए गैर-फिल्मी गीत रिकॉर्ड किए. उनका पहला हिंदी रिकॉर्ड भी इसी कंपनी के लिए जारी हुआ, जिसमें ‘कितना दुख भुलाया तुमने’ और ‘ओ प्रीत निभाने वाली’ जैसे गीत शामिल थे.

रवींद्र संगीत के अहम गायक रहे हेमंत कुमार
हेमंत कुमार रवींद्र संगीत के प्रमुख गायकों में भी गिने जाते हैं. 1944 में उन्होंने बांग्ला फिल्म ‘प्रिया बंधाबी’ के लिए पहली बार रवींद्र संगीत रिकॉर्ड किया. इसी वर्ष उन्होंने कोलंबिया लेबल के लिए गैर-फिल्मी रवींद्र संगीत भी रिकॉर्ड किया. उन्होंने 1947 में बांग्ला फिल्म ‘अभियात्री’ के लिए संगीत निर्देशन किया. हिंदी सिनेमा में भी उनकी आवाज ने अमिट छाप छोड़ी. ‘है अपना दिल तो आवारा,’ ‘बेकरार करके हमें यूं न जाइए,’ ‘याद किया दिल ने’ और ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं’ जैसे गीत उनकी पहचान का हिस्सा बने. उनके गायन में भावुकता, ठहराव और सहजता का अनूठा मेल था. यही वजह रही कि उनकी आवाज कई पीढ़ियों के श्रोताओं तक पहुंची. उनका निधन 26 सितंबर 1989 को कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुआ.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…

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Location :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

September 27, 2026, 04:31 IST





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