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Shahjahanpur ki local news : शाहजहांपुर में कल से जारी भारी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की कमर तोड़ दी है. पककर तैयार खड़ी धान, तिल और बाजरे की फसलें खेतों में बिछ गई हैं. किसान रनजोद सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि जलभराव के कारण हार्वेस्टर चलना मुश्किल है. इससे मजदूरों की लागत बढ़ेगी और दानों में फंगस लगने का डर है. कई जगहों पर धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. पौधों के ऊपर से पानी बह रहा है. किसान गुलजार सिंह बताते हैं कि अभी भी बारिश लगातार जारी है, जिससे बचे हुए खेतों में भी और अधिक नुकसान होने का खतरा है.
शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कल (25 सितंबर) सुबह से लगातार हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बहुत बढ़ा दी है. अचानक बदले इस मौसम के कारण धान और गन्ने की फसलों को काफी भारी नुकसान हुआ है. कई खेतों में धान की फसल पूरी तरह से पककर कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन बारिश और तेज हवा के कारण यह जमीन पर बिछ गई है. गिरे हुए पौधों के ऊपर से पानी बहने से पूरी फसल खराब हो रही है. किसान बेहद परेशान हैं क्योंकि उनकी महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिर गया है. मौसम विभाग के अनुसार अभी बारिश रुकने में कुछ समय लग सकता है, जिससे नुकसान और बढ़ने का डर बना हुआ है.
सबसे ज्यादा इनको नुकसान
शाहजहांपुर के किसान रनजोद सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि कल सुबह चार बजे से रुक-रुक कर बारिश हो रही थी, लेकिन रात 10-11 बजे से भारी बारिश शुरू हो गई. मौसम विभाग का कहना है कि मध्य रात्रि तक बारिश रुक सकती है. इस बारिश से धान, तिल और बाजरे की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. कई जगहों पर धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है और पौधों के ऊपर से पानी बह रहा है. कटाई के लिए तैयार फसल जमीन पर गिर गई है. सरकार को इस नुकसान का जल्द सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए. अगर यह बारिश जारी रहती है तो धान की कटाई में बीस दिन का विलंब होगा, जिससे आगे गेहूं की बुआई भी प्रभावित होगी.
किसान गुलजार सिंह ने बताया कि बारिश के साथ बहुत तेज हवाएं भी चली हैं. हवा के कारण धान की पकी हुई फसल खेतों में गिर गई है. इससे किसानों का बहुत नुकसान हुआ है. अभी भी बारिश लगातार जारी है, जिससे बचे हुए खेतों में भी और अधिक नुकसान होने की संभावना है. हमारी सरकार से यही मांग है कि जिन भी किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, उनके नुकसान का सही से आकलन किया जाए. सरकार को आगे आकर सभी प्रभावित किसानों को फसल क्षतिपूर्ति का उचित मुआवजा देना चाहिए ताकि उन्हें इस संकट से कुछ राहत मिल सके.
आगे क्या होगा
बारिश और तेज हवा की वजह से धान की फसल गिरने से जहां किसानों को अभी तक नुकसान हुआ है लेकिन इसके बाद अब किसानों के सामने कटाई के लिए कई चुनौतियां हैं. कई जगह पर पानी इतना भरा है कि अगले कई दिनों तक हार्वेस्टर से भी कटाई नहीं हो सकती, ऐसे में किसानों को मजदूरों की मदद से धान की कटाई करनी पड़ेगी, जिससे किसानों की लागत और बढ़ेगी और कटाई के बाद तुरंत धान की थ्रेशिंग करनी होगी, अन्यथा धान के दानों में फंगस लग सकता है, जिससे किसानों की बची हुई उपज भी मिट्टी में मिल जाएगी. सही अब गिरी हुई फसल से गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है, धान की फसल को व्यापारी भी होने दामों में खरीदेंगे.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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