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Who was Raja Kudwar Sultanpur : सुल्तानपुर के इतिहास में कुड़वार रियासत की अलग छाप है. अंग्रेजी शासन के दौर में यहां के राजा को एक ऐसा अधिकार मिला, जो दूसरे राजाओं के लिए दुर्लभ था. सुल्तानपुर गजेटियर 1903 के मुताबिक उस दौर में ग्रामीण समाज में राजा और स्थानीय शासकों की भूमिका काफी प्रभावशाली मानी जाती थी. सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि कुड़वार राजा को मिले इस न्यायिक अधिकार से पता चलता है कि अंग्रेजी शासन ने स्थानीय रियासतों और प्रभावशाली राजपरिवारों को प्रशासनिक व्यवस्था में किस तरह शामिल किया. ये चीज सुल्तानपुर की उस व्यवस्था की याद दिलाती है, जब राजाओं की भूमिका सिर्फ शासन तक सीमित नहीं थी.
सुल्तानपुर. यूपी के सुल्तानपुर के इतिहास में कुड़वार रियासत का नाम अलग स्थान रखता है. अंग्रेजी शासन के दौर में यहां के राजा को ऐसा अधिकार मिला था, जो पूरे उत्तर प्रदेश में बेहद दुर्लभ माना जाता था. राजा कुड़वार को अपने क्षेत्र में कुछ मामलों में फैसला सुनाने का अधिकार दिया गया था. सवाल है कि आखिर अंग्रेजों ने एक स्थानीय राजा को न्यायिक अधिकार क्यों सौंपा. इसके पीछे कुड़वार रियासत की प्रशासनिक स्थिति, अंग्रेजी हुकूमत से उसके संबंध और स्थानीय प्रभाव जैसी कई वजहें जुड़ी थीं. आज भी ये चीज सुल्तानपुर की उस व्यवस्था की याद दिलाती है, जब राजाओं की भूमिका सिर्फ शासन तक सीमित नहीं थी.
कैसे मिला ये मौका
सुल्तानपुर के इतिहास में कुड़वार रियासत का नाम सिर्फ एक स्थानीय राजघराने के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी अलग प्रशासनिक व्यवस्था के कारण भी जाना जाता रहा है. अंग्रेजी शासन के दौर में कुड़वार के राजा को अपने क्षेत्र में कुछ मामलों की सुनवाई और फैसला सुनाने का अधिकार प्राप्त था. यह व्यवस्था उस दौर की प्रशासनिक जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी थी. अंग्रेजी हुकूमत ने स्थानीय स्तर पर जनता के बीच प्रभाव रखने वाले राजा को सीमित न्यायिक शक्तियां दी थीं, जिससे छोटे-मोटे विवादों का निपटारा स्थानीय स्तर पर हो सके.
जनता के बीच राजा की कैसी पकड़
सुल्तानपुर गजेटियर 1903 के मुताबिक उस दौर में ग्रामीण समाज में राजा और स्थानीय शासकों की भूमिका काफी प्रभावशाली मानी जाती थी. कुड़वार के राजा का भी अपने क्षेत्र में सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव था. ऐसे में अंग्रेजों को स्थानीय विवादों को निपटाने में इस प्रभाव का इस्तेमाल करना प्रशासनिक रूप से सुविधाजनक लगा. राजा के प्रति जनता का विश्वास होने की वजह से लोग स्थानीय विवादों को उनके सामने रखने के लिए भी तैयार रहते थे. इससे अंग्रेजी प्रशासन पर छोटे मामलों का बोझ कम करने में मदद मिलती.
व्यावहारिक व्यवस्था का हिस्सा
सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि कुड़वार राजा को जो अधिकार मिला था, वह पूरी न्याय व्यवस्था पर नियंत्रण का अधिकार नहीं था, बल्कि सीमित न्यायिक शक्तियों से जुड़ा था. स्थानीय स्तर के कुछ मुकदमों और विवादों की सुनवाई राजा के स्तर पर की जा सकती थी. कुड़वार राजा को मिला यह न्यायिक अधिकार सुल्तानपुर के इतिहास में इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि अंग्रेजी शासन ने स्थानीय रियासतों और प्रभावशाली राजपरिवारों को प्रशासनिक व्यवस्था में किस तरह शामिल किया था. अंग्रेजों के लिए स्थानीय प्रभाव रखने वाले शासकों की मदद से शासन चलाना कई जगह व्यावहारिक व्यवस्था का हिस्सा रहा. कुड़वार में भी राजा की सामाजिक स्वीकार्यता और स्थानीय प्रभाव को प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ा गया.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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