मुख्य संवाददाता@सौरभ गोस्वामी…..

नगर पंचायत ओबरा में सीवेज निस्तारण की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण शुरू होते ही विवादों में घिर गया। रेणुका नदी के किनारे प्रस्तावित छह एमएलडी क्षमता के प्लांट के निर्माण को लेकर शुक्रवार को तापीय परियोजना प्रशासन और नगर पंचायत के बीच जमीन के स्वामित्व का मुद्दा सामने आ गया।
परियोजना प्रशासन की आपत्ति के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया। शुक्रवार को तापीय परियोजना के सुरक्षाकर्मियों के साथ सीआइएसएफ के जवान निर्माण स्थल पर पहुंचे। मौके पर चल रहे कार्य को बंद करा दिया गया। अचानक काम रुकने से निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी रही। इसके बाद नगर पंचायत प्रशासन और तापीय परियोजना प्रबंधन के बीच जमीन को लेकर विवाद और गहरा गया।

नगर पंचायत क्षेत्र में निकलने वाले घरेलू सीवेज के समुचित उपचार के लिए इस परियोजना को तैयार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) की ओर से करीब 22.31 करोड़ रुपये की लागत से एसटीपी का निर्माण प्रस्तावित है। प्लांट के संचालन में आने के बाद नगर क्षेत्र से निकलने वाले सीवेज को बिना उपचार के नदी में जाने से रोकने और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलने की उम्मीद है। निर्माण स्थल पर कुछ दिन पहले ही प्रारंभिक कार्य शुरू किया गया था।

कार्य आगे बढ़ने के दौरान तापीय परियोजना प्रशासन की ओर से जमीन के अधिकार को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। परियोजना प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि उसके अधिकार क्षेत्र से जुड़ी है।

इसी आधार पर शुक्रवार को निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। फिलहाल जमीन के स्वामित्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। विवाद का समाधान होने तक एसटीपी का निर्माण कार्य प्रभावित रहने की संभावना है।