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Millets Benefits : भारतीय सेना जल्द ही मोटे अनाज को सैनिकों की डाइट का हिस्सा बनाने जा रही है. प्रधानमंत्री मोदी की पहल के बाद सेना ने इस दिशा में कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है. इसके लिए सैन्य अफसरों ने कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संपर्क किया है. संस्थान के शोध निदेशक डॉ. महक सिंह बताते हैं कि सैनिकों की थाली में मोटा अनाज पहुंचाने के लिए सिर्फ जागरूकता ही नहीं, बल्कि उन्हें इसके सही इस्तेमाल की जानकारी देना भी जरूरी है. सैनिकों के साथ उनके परिवारों को भी मोटे अनाज के बारे में बताया जाएगा, ताकि श्रीअन्न सिर्फ जवानों की डाइट तक सीमित न रहे, बल्कि उनके घरों की थाली का भी हिस्सा बने.
कानपुर. प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सैनिकों की सेहत को लेकर चिंता जताते हुए उनकी थाली में मोटा अनाज (श्रीअन्न) शामिल करने की पहल के बाद अब सेना ने इस दिशा में कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है. सेना के अधिकारियों ने कृषि विशेषज्ञों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में कानपुर में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के शोध निदेशक डॉ. महक सिंह से भी सैन्य अधिकारियों ने संपर्क किया है. सीएसए ने सेना को हर संभव तकनीकी और कृषि विशेषज्ञता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है. जल्द ही कानपुर से सैनिकों और उनके परिवारों को मोटे अनाज के फायदे बताने की पहल शुरू की जाएगी. डॉ. महक सिंह बताते हैं कि सैनिकों की थाली में मोटा अनाज पहुंचाने के लिए सिर्फ जागरूकता ही नहीं, बल्कि उन्हें इसके सही इस्तेमाल की जानकारी देना भी जरूरी है. इसके लिए सेमिनार आयोजित किए जाएंगे. कृषि विभाग की ओर से प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें ज्वार, बाजरा, रागी समेत अलग-अलग मोटे अनाजों को प्रदर्शित किया जाएगा. इनमें मौजूद पोषक तत्वों और भोजन में इनके इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी.
डॉ. महक सिंह कहते हैं कि बहुत जल्द कानपुर से इस पहल की शुरुआत की जाएगी. सैनिकों के साथ उनके परिवारों को भी मोटे अनाज के बारे में जागरूक किया जाएगा, ताकि श्रीअन्न सिर्फ जवानों की डाइट तक सीमित न रहे, बल्कि उनके घरों की थाली का भी हिस्सा बने. डॉ. महक सिंह के मुताबिक, 500 से 700 साल पहले देश में मोटे अनाज की खेती बड़े स्तर पर होती थी. उस समय इन्हें सामान्य अन्न के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. किसानों को इनकी बेहतर कीमत नहीं मिलती थी और लोगों में इनके पोषण संबंधी फायदों को लेकर भी ज्यादा जानकारी नहीं थी. धीरे-धीरे किसानों ने इनकी खेती कम कर दी और दूसरी फसलों का रकबा बढ़ता गया. समय के साथ मोटे अनाज के पोषक गुणों पर ध्यान बढ़ा. प्रधानमंत्री मोदी ने मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए इन्हें ‘श्रीअन्न’ के नाम से पहचान दिलाने पर जोर दिया. इसके बाद इन अनाजों के प्रति किसानों और आम लोगों की रुचि बढ़ी है. अब देश के कई हिस्सों में किसान दोबारा ज्वार, बाजरा, रागी और दूसरे मोटे अनाजों की खेती कर रहे हैं.
किसमें क्या-क्या
डॉ. महक सिंह बताते हैं कि मोटे अनाजों में अलग-अलग तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. ज्वार ऊर्जा और फाइबर का अच्छा स्रोत है. बाजरे में आयरन, जिंक और फोलिक एसिड पाया जाता है. रागी कैल्शियम का समृद्ध प्राकृतिक पादप स्रोत है. कंगनी में विटामिन बी-1 पाया जाता है, जो तंत्रिका तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है. इसी तरह कोदो में एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल पाए जाते हैं. कुटकी मैग्नीशियम और फास्फोरस का अच्छा स्रोत है. सांवा में सुपाच्य फाइबर और आयरन पाया जाता है, जबकि चीना प्रोटीन और खनिजों से भरपूर होता है.
किन तरीकों से इस्तेमाल
डॉ. महक सिंह का मानना है कि सैनिकों की डाइट में पोषण की विविधता बढ़ाने में मोटे अनाज उपयोगी हो सकते हैं. इसके लिए जवानों को सिर्फ अनाज की जानकारी देने के बजाय यह भी बताया जाएगा कि इन्हें रोजमर्रा के भोजन में किस तरह शामिल किया जा सकता है. रोटी, दलिया, खिचड़ी समेत कई रूपों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. इस पहल के जरिए सेना की थाली में श्रीअन्न पहुंचाने के साथ जवानों और उनके परिवारों के बीच भी पौष्टिक अनाज को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश होगी.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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