मुरादाबाद: खेती के साथ कमाई का दूसरा जरिया तलाश रहे किसानों के लिए मधुमक्खी पालन भी अच्छा विकल्प बन सकता है. बिजनौर के किसान अंकुर त्यागी ने मधुमक्खी पालन से शहद तैयार करने का काम शुरू किया और अब इसी से अच्छी कमाई कर रहे हैं. उन्होंने अपने खेत के आसपास सरसों और दूसरे फूलों वाली जगहों पर मधुमक्खी के बॉक्स लगाए हैं. मधुमक्खियां फूलों से रस और पराग इकट्ठा करती हैं, जिससे शहद तैयार होता है. किसान इसे खुद पैक करके बाजार तक पहुंचाते हैं.
अंकुर बताते हैं कि उन्होंने मधुमक्खी पालन को सिर्फ शहद निकालने तक सीमित नहीं रखा. वह खुद शहद का उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग का काम संभालते हैं. उनके पास सरसों के शहद के अलावा लीची और पर्वतीय शहद भी होता है. उनका शहद करीब 500 रुपये किलो बिकता है और बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद के साथ बरेली, हरियाणा, कानपुर और मेरठ तक उनके ग्राहक हैं.
फूलों के पास लगाए जाते हैं मधुमक्खी के बॉक्स
अंकुर त्यागी बताते हैं कि मधुमक्खी पालन के लिए बॉक्स को उन जगहों पर रखा जाता है, जहां फूल ज्यादा होते हैं. सरसों के सीजन में मधुमक्खी के बॉक्स सरसों के खेतों के आसपास रखे जाते हैं. मधुमक्खियां फूलों से रस और पराग लेकर बॉक्स में शहद तैयार करती हैं. वह नियमित रूप से बॉक्स की सफाई और मधुमक्खियों की देखभाल करते हैं. अंकुर का कहना है कि मधुमक्खी पालन भी खेती की तरह ही एक काम है. इसमें खास तरह की मधुमक्खियां कॉलोनी बनाकर बॉक्स में रहती हैं और जिस इलाके में जिस फसल के फूल ज्यादा होते हैं, वहां बॉक्स लगाए जाते हैं.
लीची और पर्वतीय शहद भी तैयार करते हैं
अंकुर बताते हैं कि लीची के फूल आने के समय वह रामनगर और देहरादून जैसे इलाकों में मधुमक्खी के बॉक्स रखते हैं. इससे लीची का शहद तैयार होता है. इसके अलावा पर्वतीय शहद भी उनके पास उपलब्ध रहता है. उनका कहना है कि शहद सीधे मधुमक्खी पालन के बॉक्स से तैयार होता है और इसे पैक करके ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है. उनका दावा है कि उनका शहद शुद्ध होता है और इसी वजह से ग्राहक दोबारा भी उनसे शहद मंगाते हैं.
500 रुपये किलो तक बिकता है शहद
किसान के मुताबिक, उनका शहद करीब 500 रुपये प्रति किलो बिकता है. बिजनौर और आसपास के जिलों के अलावा अमरोहा, मुरादाबाद, बरेली, हरियाणा, कानपुर और मेरठ तक उनके ग्राहक हैं. कृषि प्रदर्शनियों, कृषि मेलों और खादी ग्रामोद्योग की प्रदर्शनियों में वह स्टॉल लगाकर शहद बेचते हैं. यहां से कई ग्राहक उनके साथ जुड़ते हैं. अंकुर बताते हैं कि ग्राहक पहली बार शहद लेने के बाद पसंद आने पर दोबारा कूरियर के जरिए भी ऑर्डर करते हैं.
किसान खुद संभाल रहे उत्पादन से बिक्री तक का काम
अंकुर बताते हैं कि वह किसान हैं और मधुमक्खी पालन के साथ शहद का उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग खुद कर रहे हैं. वह अकेले नहीं बल्कि एक ग्रुप के रूप में भी काम कर रहे हैं. अमरोहा, मुरादाबाद और बिजनौर के कई किसान उनके साथ जुड़े हैं. समूह में शहद की अलग-अलग वैरायटी जैसे जामुन का शहद और सरसों का शहद भी तैयार कर एक ही मंच से बेचा जाता है. इसके अलावा उनका मुख्य काम गन्ने का उत्पादन भी है, जिससे वह गुड़ और शक्कर तैयार करते हैं. उनके सभी उत्पाद ‘वैदिक किसान’ नाम से बाजार में आते हैं.
अंकुर का कहना है कि मधुमक्खी पालन और शहद की बिक्री से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है. खेती के साथ उन्होंने शहद के उत्पादन से लेकर ग्राहक तक पहुंचाने का पूरा काम अपने स्तर पर खड़ा किया है, जिससे यह उनके लिए कमाई का एक अलग जरिया बन गया है.
