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अमेठी में अलग-अलग स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाएं अलग-अलग प्रोडक्ट जिसमें सिलाई कढ़ाई के लिए कपड़े अचार चिप्स पापड़ मुरब्बा घरेलू उपयोगी सामान में हार्पिक फिनायल झाड़ू खिलौने अगरबत्ती धूपबत्ती मोमबत्ती के अलावा मिट्टी के बर्तन सहित अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार कर रही है. महिलाओं का प्रोडक्ट घर पर मेहनत और संघर्ष से तैयार होता है. खास बात यह है कि महिलाओं को उसकी बिक्री के लिए कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि उनका प्रोडक्ट आसानी से स्वयं सहायता समूह के अधिकारियों द्वारा स्टॉल लगवा कर बिक्री करवाया जाता है.
अमेठीः शहर हो या गांव महिलाओं के पास रोजगार के अवसर बहुत ही सीमित होते हैं, लेकिन आज के बदलते दौर में महिलाओं के पास भी रोजगार के अवसर हैं. जो महिलाएं कभी काम के लिए भटकती थी आज उनके पास खुद का रोजगार है. अलग-अलग कुछ ना कुछ प्रोडक्ट तैयार कर महिलाएं न सिर्फ खुद रोजगार पा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं की भी किस्मत को बदल रही हैं. उन्हें भी अपने साथ समूह में जोड़कर आत्मनिर्भर बना रही है स्वयं सहायता समूह उनकी किस्मत बदल रहा है.
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रहीं उत्पाद
अमेठी में अलग-अलग स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाएं अलग-अलग प्रोडक्ट जिसमें सिलाई कढ़ाई के लिए कपड़े अचार चिप्स पापड़ मुरब्बा घरेलू उपयोगी सामान में हार्पिक फिनायल झाड़ू खिलौने अगरबत्ती धूपबत्ती मोमबत्ती के अलावा मिट्टी के बर्तन सहित अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार कर रही है. महिलाओं का प्रोडक्ट घर पर मेहनत और संघर्ष से तैयार होता है. खास बात यह है कि महिलाओं को उसकी बिक्री के लिए कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि उनका प्रोडक्ट आसानी से स्वयं सहायता समूह के अधिकारियों द्वारा स्टॉल लगवा कर बिक्री करवाया जाता है. इसके साथ ही खुद स्वयं सहायता समूह के पास आकर लोग उनके प्रोडक्ट को खरीद लेते हैं.
अलग-अलग है महिलाओं की कहानी सुनिए उन्हीं की जुबानी
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सुधा देवी बताती है कि पहले उनके पास कोई काम नहीं था रोजगार का अभाव था. उन्हें सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के बारे में पता चला जिसके बाद उन्होंने अपना आवेदन किया. आवेदन के बाद उन्हें अनुदान मिला अनुदान के साथ-साथ उन्होंने खुद करीब दो से ढाई लाख रुपये अपने पास से लगाए और अपना खुद का टैक्सटाइल बिजनेस शुरू किया. आज वह इस काम से अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. इसके साथ ही करीब 5 से 6 अन्य लोगों को भी अपने बिजनेस में रोजगार दे रही है उन्होंने कहा की सहायता समूह से बहुत सारा फायदा है. आज वे इस समूह के जरिए करीब 40 से 50000 महीने का कमा रही है. वही स्वयं सहायता समूह में ही जुड़ी दूसरी महिला रेणु देवी बताती है कि पहले परिवार को संभालने में ही पूरा वक्त भी जाता था जब आर्थिक समस्या होती थी तो दूसरों से कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन आज स्वयं सहायता समूह के जरिए मोटे अनाज पर वह काम कर रही हैं. मोटे अनाज के प्रोडक्ट वह तैयार करती हैं और उसकी बिक्री के जरिए उन्हें अच्छा मुनाफा होता है. इसके साथ ही गांव की अन्य महिलाओं को भी उन्होंने अपने साथ जोड़ा है और उन्हें भी स्वयं सहायता समूह से फायदा हो रहा है.
स्वयं सहायता समूह से बनी पहचान
वही एक और अन्य महिला नीलम बताती है कि स्वयं सहायता समूह से ही पहचान बनी पहले तो लोग नहीं जानते थे. बैंक से जब अनुदान की आवश्यकता होती थी तो बैंक अनुदान देने से मना करता था, लेकिन आज बिना किसी गारंटी के उन्हें लोन मिल जा रहा है. स्वयं सहायता समूह से पहचान बनी है और आज उनके पास उनका खुद का रोजगार है जिसके जरिए वे फायदा कमा रही हैं. उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में आगे बढ़ रहा है.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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