संवाददाता@वीरेंद्र यादव…..

साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था सोन संगम शक्तिनगर की ओर से कबीर जयंती की पूर्व संध्या पर विचार गोष्ठी एवं काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात कवि पंडित रामखेलावन मिश्र रहे, जबकि अध्यक्षता चंद्रशेखर जोशी ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। सोन संगम के कार्यकारी अध्यक्ष विजय कुमार दुबे ने कहा कि आधुनिक हाईटेक दौर में भी संत कबीर की वाणी और हिंदवी भाषा की प्रासंगिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कबीर के विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में चंद्रशेखर जोशी ने कहा कि मध्यकालीन साहित्य में कबीर जैसा मानवतावादी कवि दूसरा नहीं मिलता। उन्होंने समाज के दबे-कुचले, शोषित और कमजोर वर्ग की आवाज को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से स्थान दिया। मुख्य वक्ता एवं विद्या भारती काशी संभाग के प्रभारी गोपाल तिवारी ने कहा कि कबीर अपने समय के सबसे प्रभावशाली, स्पष्टवादी और निर्भीक कवि थे। उन्होंने सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए मानवीय मूल्यों की स्थापना का संदेश दिया।

सेंट जोसेफ स्कूल शक्तिनगर के भौतिकी विभाग के प्राध्यापक विमल शर्मा ने कबीर के दोहों के माध्यम से दया, प्रेम, करुणा और मानवता का संदेश प्रस्तुत किया। वहीं डॉ. मानिक चंद पांडेय ने कहा कि कबीर का फक्कड़ स्वभाव, निर्गुण भक्ति, उलटबांसियां और रहस्यवाद भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।
विचार गोष्ठी के बाद आयोजित काव्य संध्या में कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। वरिष्ठ गीतकार रमाकांत पांडेय ने भोजपुरी गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी। वरिष्ठ कवि कृपाशंकर उर्फ माहिर मिर्जापुरी ने समकालीन व्यवस्था पर व्यंग्यात्मक कविता सुनाई। मुख्य अतिथि पंडित रामखेलावन मिश्र ने अपनी बघेली कविता से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
गोपाल तिवारी ने समसामयिक घटनाओं पर आधारित रचना प्रस्तुत की, जबकि शायर बहर बनारसी ने अपनी ग़ज़ल से सामाजिक परिस्थितियों पर मार्मिक टिप्पणी की। बैढ़न से आए कवि कमल शुक्ल ‘अज्ञान’ ने अपनी कविता के माध्यम से संवेदनाओं और मानवीय रिश्तों पर विचार रखने को प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मानिक चंद पांडेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन हरिशंकर गुप्ता ने दिया। इस अवसर पर अक्षय लाल, रामकृष्ण मिश्र, अंकित कुमार, सुरेंद्र सिंह, बद्रीनारायण प्रसाद, पवन कुमार, रमाशंकर पांडेय, सरस सिंह, कार्तिकेय सिंह, गौरव यादव सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।





