मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…
..‘जियो और जीने दो’ के संदेश को रक्तदान से किया चरितार्थ, जैन समाज के साथ आम नागरिकों ने भी लिया हिस्सा

रॉबर्ट्सगंज नगर के दीप नगर स्थित जैन साधना भवन में शनिवार को जैन समाज की ओर से पर्यूषण पर्व के पावन अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। आठ दिवसीय पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन आयोजित शिविर में जैन समाज के साथ आम नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शिविर में कुल 33 लोगों ने रक्तदान कर जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा में योगदान दिया।

कार्यक्रम दिल्ली से पधारे स्वध्याय भाई नरेश जी एवं आदिश जी के सानिध्य में हुआ। इससे पूर्व जैन समाज के लोगों ने जप-तप और धार्मिक साधना की। इसके बाद रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। रक्तदान करने वाले लोगों में उत्साह देखने को मिला।

संरक्षक सत्यपाल जैन ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने मानवता को ‘जियो और जीने दो’ का संदेश दिया है। रक्तदान इसी संदेश को व्यवहार में उतारने का सशक्त माध्यम है। रक्त की एक यूनिट किसी अनजान व्यक्ति के जीवन की रक्षा कर सकती है।

जैन दर्शन में जीवदया को सर्वोच्च धर्म माना गया है। जरूरतमंद को रक्त उपलब्ध कराना जीवदया का प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जैन परंपरा में आहार दान, औषधि दान, अभय दान और ज्ञान दान को प्रमुख माना गया है। रक्तदान औषधि दान और अभयदान का स्वरूप है, इसलिए इसे महादान कहा जाता है।

अध्यक्ष सुबोध जैन ने कहा कि पर्यूषण पर्व आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन, त्याग और तपस्या का पर्व है। इन दिनों जप-तप और साधना के बाद क्षमावाणी पर्व मनाया जाता है, जिसमें वर्षभर में मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी जाती है।
उन्होंने कहा कि इसी आध्यात्मिक भावना को मानव सेवा से जोड़ते हुए रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके।

इस अवसर पर संजय जैन, प्रशांत जैन, धर्मराज जैन, नीतू जैन, मोनिका जैन, पिंकी जैन, रोहित जैन, अनिल जैन, पवन कुमार जैन, हर्ष अग्रवाल, सारिका जैन, रूचि जैन, मनोज जैन, नरेंद्र गर्ग, मोनिका जैन, कौशल शर्मा, देवराज जैन, काजू जैन, जोगीराम जैन, विनोद जैन आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भगवान महावीर के करुणा, जीवदया और ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए मानव सेवा का संकल्प लिया।
