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Tula Pahta Movie Review: इमोशन से भरपूर है 3 पीढ़ियों की प्रेम कहानी

Admin by Admin
September 11, 2026
in मनोरंजन
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Tula Pahta Movie Review: इमोशन से भरपूर है 3 पीढ़ियों की प्रेम कहानी

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नई दिल्ली. सच्चा प्यार उम्र, जमाने या समाज की बंदिशों का मोहताज नहीं होता. यही खूबसूरत मैसेज मयूरा प्रधान की फिल्म ‘तुला पाहता’ देती है. तीन अलग-अलग पीढ़ियों के नजरिए को एक इमोशनल धागे में पिरोती यह फिल्म अधूरे प्यार के दर्द और आज के रिश्तों की समझ को बहुत अच्छे से दिखाती है. थिएटर में रिलीज होने के बाद, अब अमेजन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध यह मराठी और हिंदी ड्रामा दर्शकों को एक आरामदायक सिनेमाई सफर पर ले जाती है. इला भाटे और सतीश पुलेकर की मैच्योर एक्टिंग और रोहन-रोहन के दिल को छू लेने वाले म्यूजिक के साथ, यह फिल्म एक साफ-सुथरी और दिल को छू लेने वाली लव स्टोरी है.

कहानी
फिल्म ‘तुला पहाता’ की कहानी एक बहुत ही दिलचस्प मोड़ के साथ शुरू होती है. कहानी के सेंटर में अरुंधति देशपांडे (इला भाटे) हैं, जो एक मशहूर बेस्ट-सेलिंग लेखिका हैं, जो अपनी नई किताब की सक्सेस पार्टी में यह अनाउंस करके सबको सरप्राइज कर देती हैं कि उनकी अगली किताब उनकी पर्सनल लाइफ की सच्ची कहानी होगी. अरुंधति का पोता, सागर वैद्य (नचिकेत लेले), जो मुंबई में रहता है, एक प्रोफेशनल वायलिन प्लेयर है. दूसरी तरफ, तन्वी देशमुख (मानसी पाटिल) हैं, जो एक मशहूर और कॉन्फिडेंट चेस प्लेयर हैं. सागर और तन्वी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और शादी से पहले एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का हिम्मत वाला फैसला करते हैं.

कहानी में असली मोड़ तब आता है जब अरुंधति अपनी ऑटोबायोग्राफी लिखना शुरू करती हैं और उनका मन दशकों पुरानी यादों के फ्लैशबैक में चला जाता है. दर्शकों को महाराष्ट्र के एक छोटे से, शांत गांव में ले जाया जाता है, जहां जवान आरू (अरुंधति) अपने आर्मी लवर हरि (सतीश पुलेकर का छोटा रूप) के साथ खुशहाल जिंदगी का सपना देखती है. इसी बीच, पाकिस्तान के साथ बॉर्डर पर जंग छिड़ जाती है और हरि अपने देश की सेवा करने के लिए चला जाता है, लौटने का वादा करके. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. हरि कभी वापस नहीं आता. समय बीतता है, आरू शादी करती है, परिवार शुरू करती है और अपनी बेटी और पोते के साथ खुशहाल जिंदगी जीती है. फिर अचानक अपनी उम्र के आखिरी दौर में, जब उसकी जिंदगी अपने आखिरी पड़ाव पर होती है, अरुंधति की मुलाकात हरि से होती है, जो उसका बचपन का अधूरा प्यार है. इस मुलाकात से उसके अतीत के ऐसे राज सामने आते हैं जो सागर और तन्वी के रिश्ते और उनके भविष्य में काफी रुकावट डालते हैं.

एक्टिंग
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कास्टिंग और एक्टर्स की परफॉर्मेंस है. अनुभवी एक्ट्रेस इला भाटे अरुंधति के बूढ़े होते किरदार में जबरदस्त गरिमा, संवेदनशीलता और गहराई लाती हैं. बिना बोले, वह सिर्फ अपने चेहरे के हाव-भाव और आंखों से अधूरे प्यार के दर्द को जिंदा कर देती हैं. सतीश पुलेकर भी अपनी मैच्योर एक्टिंग से इला भाटे का साथ देते हैं. दोनों के बीच के सीन फिल्म के सबसे मजबूत इमोशनल पिलर हैं.

नई पीढ़ी के एक्टर्स में मानसी पाटिल तन्वी के रोल में दमदार छाप छोड़ती हैं. वह सिर्फ एक ट्रेडिशनल लवर के तौर पर नहीं, बल्कि अपने फैसलों को लेकर साफ और मॉडर्न सोच वाली महिला के तौर पर दिखती हैं. नचिकेत लेले ने वायलिन बजाने वाले सागर के रोल में एक नेचुरल और शानदार परफॉर्मेंस दी है. सपोर्टिंग एक्टर्स आनंद काले, निशिगंधा वाड, दीपाली विचारे, स्वप्निल परजाने और आकाश अनंत शिंदे ने भी अपने-अपने रोल ईमानदारी से निभाए हैं, जिससे फिल्म का फैमिली माहौल बहुत नेचुरल और रिलेटेबल लगता है.

डायरेक्शन
मयूरा प्रधान इस फिल्म की राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के तौर पर अपनी वर्सेटिलिटी दिखाती हैं. उनकी सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि वह प्यार को सिर्फ जवानी के रोमांटिक गानों या ड्रामा तक सीमित नहीं रखतीं. वह प्यार को तीन अलग-अलग पीढ़ियों के नजरिए से दिखाती हैं. बुजुर्गों का अधूरा अतीत, माता-पिता की जिम्मेदारियां और आज के युवाओं की मॉडर्न सोच. मयूरा का डायरेक्शन कहानी को बिना किसी जबरदस्ती के मेलोड्रामा के, नैचुरल रफ्तार से आगे बढ़ाता है. वह डायलॉग्स में सादगी बनाए रखते हैं और रिश्तों के खट्टे-मीठे अनुभवों को खूबसूरती से पिरोते हैं. तीन पीढ़ियों के अलग-अलग नजरिए को एक साथ पिरोना एक मुश्किल काम था, लेकिन डायरेक्टर ने इसे कमाल के बैलेंस के साथ किया है.

म्यूजिक
फिल्म ‘तुला पहता’ की आत्मा इसके म्यूजिक में बसती है. कंपोजर जोड़ी रोहन-रोहन का काम तारीफ के काबिल है. फिल्म की शुरुआत में बैकग्राउंड में बजने वाला टाइटल ट्रैक ‘तुला पहता’ इतना कोमल, रोमांटिक और मधुर है कि सुनने वाले के दिल को छू जाता है. यह गाना शुरू से ही पूरी फिल्म का मूड सेट कर देता है. क्योंकि मेन कैरेक्टर सागर एक वायलिन बजाने वाला है, इसलिए वायलिन की धुनों का इस्तेमाल सीन को और भी इमोशनल बना देता है.

कमियां
हर फिल्म की तरह ‘तुला पहता’ में भी कुछ छोटी-मोटी कमियां हैं. 2 घंटे 20 मिनट की यह फिल्म दूसरे हाफ में कुछ जगहों पर अपनी रफ्तार खो देती है. पास्ट और प्रेजेंट के बीच बार-बार होने वाले ट्रांजिशन की वजह से कुछ सीन रुके हुए लगते हैं, जिससे कहानी थोड़ी खिंची हुई लगती है. अगर एडिटिंग टेबल पर 10 से 12 मिनट ध्यान से काटे गए होते, तो यह फैमिली ड्रामा और भी छोटा और दिलचस्प हो सकता था. इसके अलावा, कुछ सपोर्टिंग कैरेक्टर्स की बैकस्टोरीज को और अच्छे से दिखाया जा सकता था.

अंतिम फैसला
‘तुला पहाता’ एक बहुत ही साफ-सुथरी, मैच्योर, दिल को छूने वाली और इमोशनल लव स्टोरी है. यह फिल्म इस हमेशा रहने वाली सच्चाई को दिखाती है कि भले ही किसी इंसान की उम्र और शरीर बूढ़ा हो जाए, लेकिन उसके अंदर पनपने वाला सच्चा प्यार हमेशा जवान और अमर रहता है. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार.

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