यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जेल से बाहर आने का सपना देख रहे सपा नेता आजम खां अब मुसीबत में पड़ गए हैं। लखनऊ में दर्ज हुई एफआईआर के बाद आजम का जेल से आना मुश्किल लग रहा है।
Azam Khan: हाईकोर्ट से पैनकार्ड मामले में राहत की उम्मीद के बीच सलाखों से बाहर आने का सपना संजोए सपा नेता आजम खां और उनके समर्थकों को बड़ा झटका लगा है। कानूनी शिकंजे में फंसते जा रहे आजम खां के खिलाफ अब लखनऊ में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हो गया है। जिसके बाद चर्चाए-आम हैं कि अब विधानसभा चुनाव से पहले आजम खां की रिहाई मुश्किल लग रही है। वहीं, कानून के जानकार भी इस पर अपनी सहमति जता रहे हैं।
सपा नेता आजम खां की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उन पर राज्य हज समिति की जमीन बेचने में गड़बड़ी के आरोप में विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की है। आजम उस समय राज्य हज समिति के अध्यक्ष थे। मामले में तत्कालीन सचिवों लईक अहमद व डॉ. एमएए खान, आमिश डेवलपर्स के प्रोपराइटर मो. अयूब और मुस्तकीम अहमद को भी आरोपी बनाया है। विजिलेंस जांच में जमीन की बिक्री से समिति को 2.08 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान की पुष्टि हुई है।
धोखाधड़ी मामले में रामपुर जेल में बंद हैं आजम
मालूम हो कि आजम खां धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद हैं। बेटे अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड मामले में आजम खां को 10 साल और अब्दुल्ला आजम को सात साल की स्थानीय एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट से सजा हो चुकी है, जिसको लेकर आजम खां और अब्दुल्ला आजम ने हाईकोर्ट की शरण ली हुई है। वहां उन्होंने जमानत अर्जी भी दाखिल की हुई है। अभी तक माना जा रहा था कि हाईकोर्ट से इस चर्चित मामले में जमानत हुई तो आजम खां जल्द ही सलाखों से बाहर आ जाएंगे। आजम खां के मुकदमे लड़ने वाले एक अधिवक्ता का कहना है कि पैनकार्ड का इकलौता मामला है जिसमें जमानत मिलते ही सलाखों से रिहाई हो जाती लेकिन, आजम से डरी हुई सरकार नहीं चाहती कि वह चुनाव से पहले बाहर आएं। वहीं, सरकारी वकील का कहना है कि लखनऊ में दर्ज भ्रष्टाचार का केस आजम खां की मुश्किलें और बढ़ाएगा। अब चुनाव से पहले बाहर आना मुश्किल है।
विजिलेंस के लखनऊ सेक्टर में दर्ज हुआ है केस
विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि जमीन की बिक्री में आजम व अन्य आरोपियों ने निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया और जमीन बिक्री में नियमों को नजर अंदाज किया गया। जांच के बाद विजिलेंस ने धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर विवेचना इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह को सौंपी है। शासन ने तीन मई 2024 को मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच में सामने आया कि आमिश डेवलपर्स को फायदा पहुंचाने के लिए जमीन बेचने में नियमों का पालन नहीं किया गया।
ईडी का भी कसा है शिकंजा, फिर आ सकती है रामपुर
आजम खां पर ईडी का भी शिकंजा कसा हुआ है। जिसके चलते पूर्व मंत्री आजम खां के करीबी माने जाने वाले बिल्डर एवं ठेकेदार से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पूछताछ कर सकता है। कुछ अन्य से पूछताछ के लिए दोबारा ईडी रामपुर आ सकती है। मालमू हो कि ईडी ने बीते माह जौहर ट्रस्ट के ठिकानों पर छापे मारे थे, जिसमें कई बिल्डरों और ठेकेदारों द्वारा चंदा देने के सुराग हाथ लगे थे। रामपुर और दिल्ली के यह लोग आजम के करीबियों में माने जाते थे। जांच में पता चला कि बजट की रकम का बड़ा हिस्सा ट्रस्ट को बतौर चंदा दिया गया।

