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बॉलीवुड के बेहतरीन डायरेक्टर्स में से एक अनुराग कश्यप का आज बर्थडे है. उन्होंने अपने करियर में कई शानदार फिल्मों से फैंस को अपना मुरीद बनाया है. वो ना सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए बल्कि अपनी रईसी को लेकर भी सुर्खियों में बने रहते हैं. आज करोड़ों कमाने वाले अनुराग कश्यप कभी सड़कों पर भी सोए हैं.मनोज बाजपेयी की सिफारिश पर ही उन्हें इंडस्ट्री में अपनी धाक जमाने का मौका मिला था.
कहानियों में फूंक देते हैं जान
नई दिल्ली. अनुराग कश्यप ने अपनी अनोखी कहानियों से इंडस्ट्री में अपनी अलग जगह बनाई है. शुरुआत से ही उन्होंने काफी संघर्ष किया. आज उनके 54वें जन्मदिन पर उनके संघर्ष से जुड़े कुछ किस्से जानते हैं. वह ना सिर्फ एक बेहतरीन निर्देशक हैं, बल्कि इसके साथ-साथ वह निर्माता, लेखक और अभिनेता भी हैं. बॉलीवुड को ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘देव डी’ और ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसी फिल्में देने वाले अनुराग की फिल्मों के लोग दीवाने हो जाते हैं.
10 सितंबर यानी आज ही के दिन साल 1972 को गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में जन्मे अनुराग कश्यप ने शुरुआती पढ़ाई देहरादून के ग्रीन स्कूल और ग्वालियर के सिंधिया स्कूल से की थी. पिता की नौकरी के चलते अनुराग कश्यप का बचपन कई शहरों में बीता था. साल 1993 में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई खत्म करने के बाद अनुराग ने मुंबई का रुख किया और यह सफर काफी संघर्षों से भरा रहा. वह पांच हजार रुपए लेकर मुंबई पहुंचे थे.
करोड़ों कमाने वाले ने सड़कों पर गुजारी रातें
अनुराग कश्यप आज एक लग्जरी लाइफ जीते हैं और वो अरबों की संपत्ति के मालिक हैं. हालांकि कभी उन्हें सड़क पर सोकर रातें गुजारनी पड़ती थीं. उन्होंने संघर्ष से सफलता तक का शानदार सफर तय किया है. बॉलीवुड में कुछ फिल्ममेकर ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी अलग सोच और कहानी कहने के अंदाज से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई है. अनुराग कश्यप भी उन्हीं नामों में शामिल हैं. एक वक्त ऐसा भी रहा है, जब वह मुंबई की सड़कों और फुटपाथ पर रातें गुजारते थे. इस बात का खुलासा खुद उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में किया था. आज उनकी गिनती इंडस्ट्री के चर्चित फिल्ममेकर्स में होती है.
मनोज बाजपेयी की सिफारिश ने बदली किस्मत
1998 में अनुराग कश्यप की किस्मत तब बदली, जब अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राम गोपाल वर्मा के सामने उनके नाम की सिफारिश की. मनोज उस वक्त राम गोपाल वर्मा के साथ काम कर रहे थे और उन्होंने नए राइटर के तौर पर अनुराग का नाम सुझाया. इसके बाद अनुराग को ‘सत्या’ की स्क्रिप्ट पर काम करने का मौका मिला. इसके बाद धीरे-धीरे वह स्क्रिप्ट लिखने की तरफ बढ़े. उन्होंने ‘ऑटो नारायण’ जैसे प्रोजेक्ट पर काम किया और इसके बाद कई फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखीं. लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी फिल्म ‘सत्या’.
बता दें कि ‘सत्या’ ने न सिर्फ मनोज बाजपेयी के करियर को नई ऊंचाई दी, बल्कि अनुराग कश्यप को भी इंडस्ट्री में एक मजबूत लेखक के तौर पर पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने ‘शूल’ और ‘कौन’ जैसी फिल्मों के लिए भी काम किया. आगे चलकर अनुराग ने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और ‘देव डी’, ‘गुलाल’, ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…
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