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पीएनबी करेंसी चेस्ट में मिले 17 करोड़ से ज्यादा के जाली नोटों को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। एनआईए ने इस मामले में मैनेजर अमित कुमार को चंडीगढ से गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस मामले की जांच में 5 महीने पहले सहारनपुर में सामने आए नकली नोटों से जुड़े मामलों को भी शामिल कर लिया गया है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पीएनबी की करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये की नकली भारतीय मुद्रा बरामद होने के बाद जांच अब बैंक की करेंसी चेस्ट से आगे बढ़कर संभावित नेटवर्क तक पहुंच गई है। एनआईए ने करीब पांच महीने पहले सहारनपुर में सामने आए नकली नोटों से जुड़े मामलों को भी अपनी पड़ताल में शामिल किया है। इससे पुराने मामलों और करेंसी चेस्ट से बरामद नकली नोटों के बीच संभावित कनेक्शन की जांच तेज हो गई है। बुधवार को एनआईए लखनऊ के एसपी ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर मामले की अब तक की जांच और पुराने प्रकरणों से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की।
माना जा रहा है कि एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अलग-अलग मामलों में सामने आए नकली नोटों के स्रोत, नेटवर्क या सप्लाई चेन में कोई समानता है या नहीं। सहारनपुर में नकली नोटों को लेकर पहले भी पुलिस स्तर पर सतर्कता बरती जाती रही है। पुराने मामलों की जांच के दौरान पुलिस टीम कानपुर तक पहुंची थी। अब एनआईए की पड़ताल में नकली करेंसी के स्रोत के साथ उसे आगे पहुंचाने वाले लोगों और संभावित नेटवर्क की भूमिका भी जांच के केंद्र में है।
जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि करेंसी चेस्ट जैसी सुरक्षित व्यवस्था तक इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट कैसे पहुंचे। इसी कड़ी में निलंबित चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार की भूमिका और उसके संपर्कों की जांच की जा रही है। उसके निजी सहायक के आवास पर बुधवार को हुई कार्रवाई भी इसी पड़ताल का हिस्सा मानी जा रही है।
एनआईए की ओर से दो अन्य आरोपितों की पहचान तक पहुंचने और जल्द गिरफ्तारी के संकेत दिए गए हैं। हालांकि एजेंसी ने विदेशी कनेक्शन समेत किसी भी संभावित पहलू पर अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। जांच आगे बढ़ने के साथ पुराने मामलों, वित्तीय लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और संभावित नेटवर्क के बीच कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है।
बड़े ट्रांजेक्शन की भी पड़ताल होगी
वहीं, पीएनबी करेंसी चेस्ट से जुड़े नकली नोट प्रकरण की जांच का दायरा अब बैंक के उन खातों तक पहुंच सकता है, जिनसे बड़ी मात्रा में नकदी निकाली गई। घंटाघर के सोफिया मार्केट में करेंसी चेस्ट से सटी पीएनबी शाखा में महानगर के कई बड़े कारोबारियों के खाते संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसियां नकदी निकासी के पैटर्न को भी परख सकती हैं।
ऐसे मामले में खाताधारक से भी हो सकती है पूछताछ
जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि संबंधित खाताधारकों ने किस तारीख को कितनी नकदी निकाली और उस रकम का आगे इस्तेमाल किस तरह किया गया। खास तौर पर बड़ी या असामान्य नकदी निकासी को जांच के नजरिये से देखा जा सकता है। यदि किसी खाते से सामान्य कारोबार की तुलना में अचानक बड़ी रकम निकाली गई हो तो खाताधारक से रकम की जरूरत और उसके इस्तेमाल के संबंध में जानकारी ली जा सकती है। पूछताछ की स्थिति में यह जानने का प्रयास किया जा सकता है कि नकदी कारोबारी भुगतान, उधारी, संपत्ति संबंधी सौदे, कर्मचारियों के भुगतान या किसी अन्य काम में इस्तेमाल हुई थी या नहीं। रकम से जुड़े दस्तावेज और संबंधित व्यक्तियों के खातों में हुए लेन-देन का मिलान भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
केवल बड़ी रकम निकालना संदेह का आधार नहीं
जांच एजेंसियों के लिए बैंक के सीसीटीवी फुटेज, कैश निकासी रिकार्ड, खातों के स्टेटमेंट, चेक और अन्य बैंकिंग दस्तावेज अहम साक्ष्य हो सकते हैं। इनका मिलान चेस्ट से जुड़े घटनाक्रम के साथ किए जाने पर नकदी के आवागमन की कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल जांच का एक अहम सवाल यह है कि बड़ी मात्रा में निकाली गई नकदी आखिर कहां गई और उससे जुड़े लोगों के बीच क्या संबंध था। हालांकि, किसी खाताधारक की भूमिका केवल बैंक से बड़ी रकम निकालने के आधार पर संदिग्ध नहीं मानी जा सकती। जांच में सामने आने वाले ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।
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