• Privacy Policy
Sonebhadra Live
  • Home
  • सोनभद्र
  • सिंगरौली
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राष्ट्रीय
  • वायरल वीडियो
No Result
View All Result
  • Home
  • सोनभद्र
  • सिंगरौली
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राष्ट्रीय
  • वायरल वीडियो
No Result
View All Result
Sonebhadra Live
No Result
View All Result

‘मदर इंडिया’ जैसी अमर फिल्म बनाने वाले महबूब खान कभी ठोकते थे घोड़े की नाल, एक ‘औरत’ न ऐसे पहुंचाया ऑस्कर तक

Admin by Admin
September 9, 2026
in मनोरंजन
0
‘मदर इंडिया’ जैसी अमर फिल्म बनाने वाले महबूब खान कभी ठोकते थे घोड़े की नाल, एक ‘औरत’ न ऐसे पहुंचाया ऑस्कर तक


Last Updated:September 09, 2026, 04:01 IST

महबूब खान ने हिंदी सिनेमा को कई बड़ी और यादगार फिल्में दीं. एक वक्त ऐसा था, जब वह मुंबई में अस्तबल में काम किया करते थे, पर मेहनत के दम पर उन्होंने आगे चलकर ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्म बनाकर अलग पहचान बनाई और एक बड़ा स्टूडियो खड़ा किया. 9 सितंबर 1907 को गुजरात में जन्में महबूब खान की जिंदगी का यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था.

बचपन से ही महबूब खान का मन फिल्मों की दुनिया में लगता था. वह एक्टर बनने का सपना देखते थे और इसके लिए कम उम्र में ही वह मुंबई पहुंच गए थे, लेकिन उनका शुरुआती सफर आसान नहीं था. यहां वह फिल्मों के लिए घोड़े उपलब्ध कराने वाले नूर मोहम्मद के संपर्क में आए, जिसने उन्हें अस्तबल में घोड़ों की नाल ठोकने का काम दिया. वह रोज घोड़ों के बीच काम करते थे, लेकिन उनके मन में फिल्मों का सपना खत्म नहीं हुआ. एक दिन वह एक फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर पहुंचे और फिल्मी दुनिया में काम करने की अपनी इच्छा जाहिर की. (फोटो क्रेडिट: IMDb)

महबूब खान की लगन देखकर उन्हें स्टूडियो में छोटे-मोटे काम करने का मौका मिला और धीरे-धीरे वह उस दुनिया के अंदर पहुंच गए, जिसका सपना वह बचपन से देखते थे. उन्होंने फिल्मी करियर की शुरुआत एक्स्ट्रा कलाकार और सहायक के तौर पर की. यह साइलेंट फिल्मों का दौर था. कैमरे के सामने छोटे काम करते-करते वह कैमरे के पीछे की दुनिया को भी समझने लगे. (फोटो क्रेडिट: IMDb)

फिल्म बनाने की पूरी प्रक्रिया में उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई और आखिरकार 1935 में उन्हें निर्देशक के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘अल हिलाल’ बनाने का मौका मिला. यहीं से वह निर्देशक बनने की राह पर चलने लगे. (फोटो क्रेडिट: IMDb)

Add News18 as
Preferred Source on Google

इसके बाद महबूब खान ने लगातार कई फिल्में बनाईं. ‘दक्कन क्वीन’, ‘एक ही रास्ता’, ‘अलीबाबा’, ‘औरत’ और ‘बहन’ जैसी फिल्मों ने उन्हें निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई. वह फिल्मों के जरिए आम लोगों की जिंदगी, गरीबी, गांव, रिश्तों और समाज की परेशानियों को बड़े पर्दे पर लेकर आते थे. खासतौर पर महिलाओं के किरदारों को उन्होंने अपनी फिल्मों में बहुत मजबूती से दिखाया. (फोटो क्रेडिट: IMDb)

Advertisement
Advertisement

1940 में आई ‘औरत’ महबूब खान के करियर की बेहद अहम फिल्म थी. करीब 17 साल बाद महबूब खान ने इसी कहानी को एक नए और कहीं बड़े रूप में दोबारा पर्दे पर उतारने का फैसला किया. यह फिल्म थी ‘मदर इंडिया’. इस फिल्म को बनाने के लिए महबूब खान ने बहुत बड़ा जोखिम उठाया. (फोटो क्रेडिट: IMDb)

फिल्म के निर्माण में इतना पैसा लगा कि उन पर कर्ज भी बढ़ गया, जब ‘मदर इंडिया’ ऑस्कर की दौड़ तक पहुंची, तब उनके पास अमेरिका जाकर फिल्म के प्रचार के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं था. फिल्म सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के ऑस्कर से बेहद मामूली अंतर से चूक गई, लेकिन इसने भारतीय सिनेमा को दुनिया के सामने एक नई पहचान दिलाई.(फोटो क्रेडिट: IMDb)

1957 में रिलीज हुई ‘मदर इंडिया’ में नरगिस ने राधा का किरदार निभाया, जबकि सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राज कुमार भी अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म को जबरदस्त सफलता मिली और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महान फिल्मों में गिना जाने लगा. ‘मदर इंडिया’ ने फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक समेत कई सम्मान जीते और महबूब खान का नाम देश के सबसे बड़े फिल्मकारों में शामिल हो गया. (फोटो क्रेडिट: IMDb)

‘मदर इंडिया’ से पहले भी महबूब खान ‘अंदाज’, ‘आन’ और ‘अमर’ जैसी बड़ी फिल्मों से अपनी पहचान बना चुके थे. उनकी तुलना हॉलीवुड के मशहूर निर्देशक सेसिल बी. डीमिल से की गई और उनकी जीवनी का नाम भी ‘महबूब: इंडियाज डीमिल’ रखा गया. (फोटो क्रेडिट: IMDb)

महबूब खान ने 1940 के दशक में अपना बैनर महबूब प्रोडक्शंस शुरू किया और 1954 में मुंबई के बांद्रा में महबूब स्टूडियो की स्थापना की. उनको भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए 1963 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया. हालांकि ‘मदर इंडिया’ जैसी बड़ी सफलता के बाद उनकी अन्य फिल्में उसी स्तर की कामयाबी हासिल नहीं कर सकीं. उनकी आखिरी फिल्म ‘सन ऑफ इंडिया’ 1962 में आई. इसके दो साल बाद 28 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ने से महबूब खान का निधन हो गया. वह सिर्फ 56 साल के थे. (फोटो क्रेडिट: IMDb)

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
First Published :

September 09, 2026, 04:01 IST



Source link

Advertisement
Advertisement
Previous Post

राम मंदिर में दर्शन कर अभिजीत मुहूर्त में CEO जीतेंद्र मिश्र संभाली कमान, सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत करेंगे, Uttar-pradesh Hindi News

Next Post

लियोनल मेसी पर टूटा दुखों का पहाड़… सुपरस्टार बनाने वाले पिता का निधन, 68 की उम्र में ली आखिरी सांस

Next Post
लियोनल मेसी पर टूटा दुखों का पहाड़… सुपरस्टार बनाने वाले पिता का निधन, 68 की उम्र में ली आखिरी सांस

लियोनल मेसी पर टूटा दुखों का पहाड़... सुपरस्टार बनाने वाले पिता का निधन, 68 की उम्र में ली आखिरी सांस

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
Advertisement
  • Privacy Policy

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.

No Result
View All Result
  • Privacy Policy

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.