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Suresh Bakolia Success Story: सीकर जिले के डांसरोली गांव के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी सुरेश बाकोलिया ने संघर्ष और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है. हाल ही में उन्हें खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया. सुरेश बहरीन में आयोजित पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और ऐसा करने वाले सीकर के पहले तथा राजस्थान के दूसरे खिलाड़ी बने. अब तक वे 30 से अधिक मेडल जीत चुके हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

सीकर जिले के डांसरोली गांव के रहने वाले पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी सुरेश बाकोलिया को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है. खेल क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों को ही यह सम्मान दिया जाता है. हाल ही में उन्होंने बहरीन में आयोजित पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया. इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले वे सीकर जिले के पहले और राजस्थान के दूसरे खिलाड़ी हैं.

सुरेश बाकोलिया की सफलता की कहानी संघर्ष और मेहनत से भरी हुई है. बचपन से ही वह सामान्य विद्यार्थियों की तरह पढ़ाई कर सरकारी नौकरी करना चाहते थे. स्कूल और कॉलेज के दिनों में कम हाइट होने की वजह से लोग उन्हें चिढ़ाते थे और कई बार उनका मजाक भी उड़ाया जाता था. इन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. समाज की सोच को बदलने और खुद को साबित करने का जज्बा उनके अंदर लगातार बढ़ता गया.

सरकारी नौकरी की तैयारी करने के लिए सुरेश जयपुर चले गए थे. वहीं उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उनका पूरा भविष्य बदल दिया. एक दिन कोचिंग से लौटते समय बस में उनकी मुलाकात एक नेशनल खिलाड़ी से हुई. उस खिलाड़ी ने उन्हें बताया कि पैरा खिलाड़ियों के लिए भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं. उसने सुरेश को खेलों में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को पहचान देने की सलाह दी. इसके बाद सुरेश ने पैरा खेलो की जानकारी जुटाना शुरू किया.
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साल 2019 में सुरेश बाकोलिया ने महेश नेहरा को अपना कोच बनाया और नियमित प्रशिक्षण शुरू किया. उसी वर्ष उन्हें जयपुर में आयोजित अपने पहले राज्यस्तरीय खेलों में भाग लेने का मौका मिला. खास बात यह रही कि अपने पहले ही राज्यस्तरीय मुकाबले में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर शानदार शुरुआत की. इसके बाद उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया. उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ खेल को भी बराबर महत्व दिया और लगातार मेहनत करते रहे.

इसके बाद साल 2020 में जोधपुर में आयोजित राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में सुरेश ने दो गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. इसके बाद उन्होंने पुणे में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए मेडल हासिल किया. धीरे-धीरे सुरेश राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गए. उनकी उपलब्धियों के कारण उन्हें देशभर में पहचान मिलने लगी. लगातार बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर दो बार स्वर्ण भारत राष्ट्रीय खेल रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरेश बाकोलिया ने भारत का नाम रोशन किया है. उन्होंने सबसे पहले अफ्रीका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, जहां दो सिल्वर मेडल जीते. इसके बाद युगांडा में आयोजित प्रतियोगिता में एक गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. वहीं यूरोप में उन्होंने दो ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए. इंडोनेशिया में आयोजित प्रतियोगिता में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं.

सुरेश बाकोलिया ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर खेल जगत में खास पहचान बनाई है. वे अब तक राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 30 से अधिक मेडल जीत चुके हैं. सुरेश ने बैडमिंटन के साथ-साथ जैवलिन थ्रो में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत का प्रतिनिधित्व किया है. उनकी उपलब्धियां युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर इंसान में मेहनत करने का जज्बा और आगे बढ़ने की लगन हो, तो कोई भी मुश्किल उसके रास्ते की बाधा नहीं बन सकती.
