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Raj Kapoor Story : ‘शो मैन’ के नाम से मशहूर राज कपूर सच्चे अर्थों में सिनेमा के जानकार थे. एक बार तो रामानंद सागर की रामायण के भजन को सुनकर दुखी हुए थे. संगीतकार रविंद्र जैन ने उन्हें यह भजन खुशी में सुनाया था लेकिन राज साहब मायूस हो गए और उन्हें लेकर 25 दिन के लिए कश्मीर चले गए थे. इन 25 दिन में उन्होंने एक बार भी काम की बातचीत नहीं की. सिर्फ खान-पान और घूमने पर फोकस किया. रविंद्र जैन की भी उनसे हिम्मत नहीं पड़ी. आगे क्या हुआ, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा…

मशहूर संगीतकार रविंद्र जैन के नाम से भला कौन परिचित नहीं है. रामानंद सागर की रामायण, श्रीकृष्णा धारवाहिक में उन्होंने संगीत दिया था. 1985 में आई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में राज कपूर के साथ काम किया था. इस फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर रहा था. फिल्म के सभी गाने बेहद पॉप्युलर हुए थे. एक बार रविंद्र जैन जब रामायण फिल्म के लिए म्यूजिक दे रहे थे तब वो राज कपूर के घर पहुंचे और रामायण का भजन ‘ओ मैय्या तैने, का ठानी बन में, राम सिया भेज दए री बन में..’ सुनाया. साथ ही राज कपूर को बताया कि यह भजन उन्होंने रामायण के लिए रिकॉर्ड किया है. यह भजन सुनकर राज कपूर बहुत दुखी हो गए थे. आखिर क्यों? आइये जानते हैं.

रविंद्र जैन और राज कपूर साहब की वैसे तो पहली मुलाकात ‘दो जासूस’ फिल्म के म्यूजिक के रिकॉर्डिंग के दौरान हुई थी. राज साहब ने इस फिल्म के गीत पास किए थे. इसके बाद रविंद्र काम के सिलसिले में उन्हें गाहे-बगाहे फोन करते रहते थे. हर बार राज साहब एक ही जवाब देते थे तो कहते थे कि जब भी आपके लायक कहानी या काम होगा तो मैं जरूर बताऊंगा. फिर दोनों के बीच एक और मुलाकात दिल्ली में एक शादी के कार्यक्रम में हुई. इस कार्यक्रम में रविंद्र ने एक भजन ‘एक राधा एक मीरा, दोनों ने श्याम को चाहा…’ सुनाया था. यह भजन राज कपूर को बहुत पसंद आया था. उन्होंने सवा रुपये देकर यह भजन उसी समय अपनी अगली फिल्म के लिए ले लिया था. रविंद्र जैन उन्हें बीच-बीच में फोन लगाते रहते थे. यहां तक कि आरके स्टूडियो के पास चैंबूर में किराए पर रहने लगे थे.

एक दिन राज साहब ने रविंद्र को फोन किया और अपनी बर्थडे पार्टी के लिए इनवाइट किया. सभी पुणे के फॉर्म हाउस में गए. उस रात तो कोई बात नहीं हुई. दूसरे दिन शाम के समय चाय पीते समय राज कपूर ने कहा कि ‘मेरे पास एक छोटा सा आइडिया है, कहानी नहीं है. मन में विचार है कि रामकृष्ण परमहंस को तोतापुरी महाराज ने ताना मारा था कि राम तेरी गंगा मैली. वहां से गंगा का रंग बदलने लगता है, मैं इसे जस्टिफाइ कैसे करूं. लोग मुझे माफ नहीं करेंगे अगर मैं कहूंगा कि राम तेरी गंगा मैली हो गई है. मैं ‘जिस देश में गंगा रहता है’ पहले ही बना चुका हूं.’

जैन ने किस्से के बारे में बताया, ‘मैंने राज साहब से कहा कि यह जिम्मेदारी मैं ले लेता हूं. तत्क्षण एक मुखड़ा मेरे जेहन में आया. मैंने सुनाया ‘गंगा हमारी कहे बात ये रोते-रोते, राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते.’ मुखड़ा सुनते ही राज साहब ने कहा कि मेरी समस्या का हल हो गया. ‘एक राधा एक मीरा, दोनों ने श्याम को चाहा’ गीत उनके जेहन में था. उन्होंने एक ट्रायंगल बनाया और राम तेरी गंगा मैली की कहानी तैयार की.’

रविंद्र जैन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया, ‘राम-शिव और गंगा राज साहब की दुर्बलताएं थीं. मैं रामयण का एक गाना रिकॉर्ड करने उनके घर गया था. वो गाना था ‘ओ मैया मोरी, का ठानी मन में, राम सिया भेज दए री बन में…’. वो गाना मैंने राज साहब को सुनाया. वो गाना सुनते ही बोले कि सॉन्ग तो बहुत अच्छा है, मेरे रोंगटे खड़े हो गए लेकिन अब तुम हिना फिल्म में काम नहीं कर सकते हो. मैं परेशान हो गया. उस दिन की सिटिंग ऐसे ही खत्म हो गई. फिर एक दिन उनके मैनेजर का मुझे फोन आया. उसने कहा कि राज साहब ने कहा कि कश्मीर चलना है. कश्मीर में हम 25 दिन रहे लेकिन म्यूजिक का कोई जिक्र नहीं हुआ. मैं बहुत परेशान था. मैं बहुत लोगों का काम छोड़कर गया था. मैं उनसे कह भी नहीं सकता था कि मुझे जाना है. कभी पहलगाम तो कभी गुलमर्ग घुमाया. खाओ-पियो और मस्ती करो, बस यही मोटो था. जब मैं वापस मुंबई आया तो पता चला कि वो मुझे इसलिए कश्मीर घुमाने ले गए थे ताकि मेरे दिमाग से रामायण को निकाला जा सके और ‘हिना’को अंदर डाला जा सके.’

रामायण में म्यूजिक देने वाले संगीतकार रविंद्र जैन ने आगे बताया, ‘राज साहब ने मेरे साथ’हिना’ के तीन गाने रिकॉर्ड किए थे. ‘मैं देर करता नहीं देर हो जाती है, चिट्ठिए दर्द फिराक वालिए…’ राज कपूर की मौत के बाद रणधीर कपूर ने फिल्म पूरी की. उन्होंने भी मुझे फ्री हैंड दिया. सोच, ख्वाब और सपना उनका था, जिसे रणधीर कपूर ने पूरा किया. ‘

रविंद्र जैन आगे कहते हैं, ‘मैं राज साहब के लिए एक ही शेर हमेशा कहता हूं… राज ने वर्षों दिल पर राज किया, अपने अंदाज से जिंदगी को जिया, दे गया जाते-जाते निशानी यही, उसने गंगा को मैला न होने दिया. उनके साथ काम करके मेरे जीवन सार्थक हो गया. वह कंप्लीट सिनेमा थे. उनका सोचना, सांस-लेना, उठना-बैठना सब कुछ सिनेमा थे. वो बहुत अच्छे होस्ट थे. कृष्णा भाभी सबका ख्याल रखती थीं. वो मेरी खिचड़ी बनवाकर रखते थे. रात को 9 बजे फोन करते थे और रातभर हमारी महफिल चलती थी.’

