ओबरा/सोनभद्र. @सौरभ गोस्वामी……

डाला से ओबरा का मुख्य मार्ग वर्षों से जनमानस के लिए परेशानी का कारण बना रहा है। सड़क की बदहाल स्थिति के चलते बरसात में कीचड़ और जलभराव, गर्मी में भारी धूल और प्रदूषण तथा टूटे गड्ढों के कारण पैदल यात्रियों, दोपहिया चालकों और आसपास रहने वाले लोगों को रोज़ जोखिम उठाना पड़ता था।इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा जिले को दी गई सौगातों के क्रम में इस मार्ग की विशेष मरम्मत हेतु 4 करोड़ 93 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई। इसके उपरांत लोक निर्माण विभाग द्वारा नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया।
डाला से ओबरा मार्ग कोई साधारण सड़क नहीं है। यह शक्तिनगर से वाराणसी स्टेट हाईवे से जुड़ा प्रमुख संपर्क मार्ग है और साथ ही खनन क्षेत्र से सटा है, जहाँ ट्रक, डम्फर और भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही रहती है। ऐसे मार्ग पर किया गया निर्माण तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह मानकों के अनुरूप, मजबूत और टिकाऊ हो। लेकिन वर्तमान में धरातल पर दिखाई दे रही स्थिति को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या निर्माण कार्य मुख्यमंत्री की मंशा और स्वीकृत धनराशि के उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता और मानकों पर सख़्त निगरानी नहीं हुई, तो वर्षों से चली आ रही समस्या जस की तस रह सकती है।ऐसी स्थिति में जनमानस को पुनः उसी धूल, प्रदूषण और जोखिम भरे आवागमन का सामना करना पड़ेगा। अब ज़रूरत है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस कार्य को केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि इसे गंभीरता से लेकर सड़क का निर्माण पूरे मानक के साथ कराये,ताकी लोगो को पुरानी समस्या से निजात मिल सके।