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Former IAS Divya Mittal visit to Mirzapur: अपने इस्तीफे और राजनीति में कदम बढ़ाने का ऐलान कर चुकीं पूर्व पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल11 अक्टूबर को मिर्जापुर पहुंचीं. यहां समर्थकों ने जिस अंदाज में स्वागत किया वह चर्चा में है. मिर्जापुर पहुंच कर दिव्या मित्तल ने नवरात्रि के पहले दिन प्रसिद्ध विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और यहीं से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने का स्पष्ट संकेत दे दिया है. तो आइए इस मौके पर जानते हैं कि क्या मिर्जापुर से ही उतरने जा रहीं पूर्व IAS दिव्या मित्तल? आखिर मिर्जापुर का लहुरियादह मामला जो बन सकता है उनके करियर का सबसे बड़ा पहलू. समझते हैं पूरी बात.
पूर्व IAS दिव्या मित्तल के स्वागत में जुटे समर्थक, भाजपा नेता भी दिखे, क्या मिर्जापुर से चुनाव लड़ने का करेंगी ऐलान?
मां विंध्यवासिनी के दरबार से क्या दिया संकेत?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नवरात्रि के पहले दिन दिव्या मित्तल विंध्याचल धाम पहुंचीं. उन्होंने आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए. उन्हें करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा. पूजा-अर्चना और हवन के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की. उन्होंने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वे राजनीति में तो आ रही हैं, लेकिन किसी भी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल नहीं होने जा रही हैं. वे किसी दल का झंडा उठाने के बजाय जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र मंच के जरिए अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रही हैं और नवरात्रि में ही अपने अगले कदम को सार्वजनिक करेंगी.
क्या है लहुरियादह का सच
अब जानते हैं कि आखिर क्या है लहुरियादह मामला? असल में दिव्या मित्तल ने अपने सोशल मीडिया एक्स (ट्विटर) हैंडल पर जिस लहुरियादह मामले को पिन कर रखा है, वह इस इलाके की सबसे बड़ी प्रशासनिक और मानवीय कहानी रही है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस गांव में आजादी के 75 साल बाद भी पीने का पानी उपलब्ध नहीं था. भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम होने के कारण प्रशासन भी यहां पानी पहुंचाने को असंभव मानता था. गांव में पानी की इतनी भयंकर किल्लत थी कि लोग इस गांव में अपनी बेटियों की शादी तक करने को तैयार नहीं होते थे.
आधार कार्ड से मिलता था पानी
इस गांव का सबसे दर्दनाक सच यह था कि सरकारी टैंकरों से मिलने वाले पानी की बंदरबांट रोकने के लिए ग्रामीणों को लाइन में लगकर अपना आधार कार्ड दिखाना पड़ता था. दिव्या मित्तल जब बतौर डीएम पहली बार वहां निरीक्षण करने गईं, तो ग्रामीणों की प्यास देखकर उनकी खुद की हिम्मत नहीं हुई कि वे अपनी गाड़ी से निकालकर पानी की बोतल से पानी पी सकें. इसके बाद उन्होंने इसे एक मिशन के रूप में लिया और पूरे प्रशासनिक अमले को इस काम में झोंक दिया.
9 महीने की कठिन जंग
तमाम वित्तीय, भौगोलिक और लॉजिस्टिक्स की अड़चनों को पार करते हुए दिव्या मित्तल और उनकी टीम ने महज 9 महीनों की दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद इतिहास रच दिया. ‘जल जीवन मिशन’ (हर घर जल योजना) के तहत पहली बार पाइपलाइन बिछाकर पहाड़ी पर स्थित लहुरियादह गांव के हर एक घर में सीधे नल से साफ और सुरक्षित पानी पहुंचा दिया गया. जब पहली बार गांव के नलों से पानी की धार बही, तो पानी के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले थे.
राजनीति बदलने का है दिव्या मितल का इरादा
दिव्या मित्तल अगले नौ दिनों तक विंध्याचल धाम में ही रहकर अनुष्ठान कर रही हैं और यहीं से वे अपनी भविष्य की पूरी राजनीतिक रूपरेखा और चुनावी सीट का आधिकारिक एलान करेंगी. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वे मिर्जापुर विधानसभा सीट से ही आगामी चुनाव में ताल ठोक सकती हैं. दिव्या का कहना है कि वे राजनेता बनने नहीं बल्कि व्यवस्था और राजनीति को सही मायनों में बदलने आई हैं.
बुजुर्ग दुईजी देवी से मुलाकात
दिव्या मित्तल ने बताया कि वे अपने इस 9 दिनों के विंध्याचल प्रवास के दौरान लहुरियादह गांव की उसी बुजुर्ग महिला दुईजी देवी से भी मुलाकात करने जाएंगी, जिन्होंने उन्हें गांव की बदहाली की कहानी सुनाई थी. दुईजी देवी की तबीयत इन दिनों काफी खराब चल रही है. दिव्या मित्तल ने कहा कि उनका आशीर्वाद आज भी उनके साथ है और वे जनता के हक की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में उतर रही हैं.
क्या लहुरियादह बनेगा दिव्या मित्तल की राजनीति का आधार?
दिव्या मित्तल के मिर्जापुर दौरे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह इसी जिले से अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ाएंगी. लहुरियादह में पानी पहुंचाने का काम उनके कार्यकाल की चर्चित उपलब्धियों में रहा है. दिव्या ने यह जरूर कहा है कि वह नवरात्रि के दौरान अपने अगले कदम का ऐलान करेंगी. फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि वह विधानसभा चुनाव लड़ेंगी या किस सीट से मैदान में उतरेंगी. लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वे मिर्जापुर विधानसभा सीट से ही आगामी चुनाव में ताल ठोक सकती हैं. इसमें लहुरियादह मामला एक पत्थर की लकीर बन सकता है.

