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Magical Diya for Diwali: दीपावली का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, बाजारों में एक से बढ़कर एक दीये और चिराग नजर आने लगे हैं. लेकिन सहारनपुर के दीपक प्रजापति द्वारा तैयार किया जा रहा ‘जादुई चिराग’ इन दिनों लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इस अनोखे दीये की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नीचे की तरफ से तेल डाला जाता है, लेकिन वह बाहर नहीं निकलता. अपनी इस अनोखी बनावट और रात भर जलने की खूबी के चलते यह जादुई चिराग लोगों को खूब भा रहा है.
सहारनपुर: दीपावली पर आपने कई तरह के दीये और चिराग देखे होंगे, लेकिन सहारनपुर में एक ऐसा चिराग बनाया जा रहा है, जिसे देखकर लोग अक्सर पूछते हैं कि आखिर इसमें तेल डाला कहां से जाता है. दरअसल, इस चिराग में नीचे से तेल डाला जाता है और ऊपर बत्ती लगाई जाती है, लेकिन जिस जगह से तेल डाला जाता है, वहां से वह वापस बाहर नहीं निकलता. इसी खासियत के कारण इसे जादुई चिराग कहा जाता है.
इस खास चिराग को सहारनपुर के दीपक प्रजापति बना रहे हैं. इसका आकार सामान्य चिरागों से बड़ा होता है और कीमत भी दूसरे चिरागों से ज्यादा रहती है. इसे बनाने में समय लगता है और हर कोई इसे नहीं बना पाता. दीपावली के मौके पर इसकी मांग बढ़ जाती है. कुछ लोग इसकी खूबसूरती देखकर इसे शोपीस के तौर पर खरीदते हैं, तो कुछ लोग दीपावली पर जलाने के लिए ऑर्डर देते हैं. सहारनपुर के अलावा आसपास के राज्यों से भी लोग इसे ऑर्डर देकर बनवा रहे हैं.
जादुई चिराग की खासियत जानकर खरीदते हैं लोग
दीपक प्रजापति ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि दीपावली पर इस चिराग की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि यह दूसरे चिरागों से बिल्कुल अलग है. कुछ लोग इसे पहले ही ऑर्डर कर देते हैं. यह चिराग हर जगह नहीं मिलता और न ही हर कोई इसे बना पाता है. इसकी खासियत और खूबसूरती के कारण लोग इसे खरीदना पसंद करते हैं.
दीपक बताते हैं कि इस चिराग में नीचे से तेल डाला जाता है और ऊपर बत्ती लगाई जाती है. जिस जगह से तेल डाला जाता है, वहां से तेल वापस बाहर नहीं निकलता और न ही उसे निकाला जा सकता है. इसी खास बनावट के कारण इसे जादुई चिराग कहा जाता है. इसे छोटे से लेकर बड़े आकार तक में तैयार किया जाता है. लोग अपनी पसंद के हिसाब से इसका आकार तय करते हैं.
150 रुपये है जादुई चिराग की कीमत
दीपक प्रजापति के मुताबिक, वह इस चिराग को 150 रुपये में बनाते हैं. इसे बनाने में समय लगता है, इसलिए एक बार में करीब 300 से 400 चिराग ही तैयार हो पाते हैं. यही वजह है कि इसे बड़ी संख्या में बनाना आसान नहीं है. कुछ लोग इस चिराग को सिर्फ शोपीस के तौर पर खरीदते हैं और घर में सजाकर रखते हैं, जबकि कुछ लोग इसे दीपावली पर जलाने के लिए लेते हैं. दीपक के मुताबिक, यह चिराग रात भर जलता रहता है और इसमें तेल की मात्रा भी ज्यादा आती है. जब लोग इसे खरीदने आते हैं, तो अक्सर यही पूछते हैं कि आखिर इसमें तेल कहां से डाला जाता है. अपनी इसी खासियत के कारण यह चिराग दीपावली पर लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता है.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…
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