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मिर्जापुर: अमेरिका के द्वारा रुस से तेल खरीदने वाले देशों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव पास कर दिया है. ऐसे में 10 देश को चिन्हित भी किया गया है, जिसमें भारत भी शामिल है. 200 प्रतिशत टैरिफ बिल पास किए जाने के बाद कालीन कारोबारियों में दहशत का माहौल है. कालीन कारोबारी का कहना है कि अमेरिका के साथ भारत का सबसे ज्यादा कारोबार होता है. ऐसे में कालीन बिजनेस उनमें से एक है. अगर भारत के ऊपर भारी भरकम रैरिफ लगेगा तो कालीन का कारोबार प्रभावित होगा. हालांकि, अभी 10 प्रतिशत टैरिफ है, जिसका प्रभाव कालीन कारोबार पर नहीं है. टैरिफ बढ़ेगा तो निश्चित तौर पर कालीन का कारोबार प्रभावित होगा.
मिर्जापुर में कालीन के बड़े व्यवसाई परवेज खान ने लोकल 18 से बताया कि लोकल लेवल पर लगभग 50 सालों से फेयर लग रहा है. पहले बनारस लगता था और अब काफी सालों से भदोही के अंदर एग्जीबिशन सेंटर बना है, यहाँ लगाया जा रहा है. कार्पेट फेयर से लोकल लोग हैं, जो छोटे व्यवसायी भी हैं. उनको भी मौका मिलता है यहाँ पार्टिसिपेट करने का. ऐसे में छोटे लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है. बड़े लोगों को भी आसानी होती है कि वो अपनी चीज़ों को डिस्प्ले करें, तो ओवरऑल अगर आप देखें तो फायदा तो हो रहा है. अगर आप देखेंगे तो मेन एक्सपोर्ट जो है वो यूएस का है. तमाम कस्टमर यहाँ आये हुए हैं. मैं देख रहा हूँ कि लोग एक दूसरे से मिल रहे हैं और एक दूसरे के स्टॉल पर जा रहे हैं. उम्मीद तो है कि कालीन का बिजनेस आने वाले दिनों में बढ़िया होना चाहिए.
अभी 10 प्रतिशत है टैरिफ
परवेज खान ने बताया कि अभी तो अमेरिकी टैरिफ 10 प्रतिशत के आसपास है. अमेरिका ने बहुत मिनिमाइज़ कर दिया और इतना टैरिफ अगर है तो कोई दिक्कत नहीं है. दिक्कत तब थी, जब 25 प्रतिशत टैरिफ था और बाद में 25 से 50 किया गया. उस वक्त हिंदुस्तान का कारपेट बेल्ट है. वैसे और सेक्टर में भी इससे प्रॉब्लम हुई थी, लेकिन कारपेट बेल्ट को इसका बहुत नुकसान हुआ था. क्योंकि, हमारे ऊपर टैरिफ ज्यादा था और भी तमाम ऐसी कंट्रीज़ हैं, जो कारपेट बनाती हैं. उनके ऊपर टैरिफ कम था. उनका बिज़नेस बढ़ा है और हमारे बिज़नेस के ऊपर इसका इंपैक्ट पड़ा है.
अच्छा चल रहा काम
परवेज खान ने बताया कि वर्तमान समय में सब कुछ सामान्य चल रहा है. काम आगे बढ़ रहा है. लोगों का इंटरेस्ट बढ़ रहा है. भारतीय कालीन में एक्सपोर्टरों का रुझान बढ़ रहा है. मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सब अच्छा होना चाहिए, लेकिन जहाँ तक सुनने में आ रहा है कि जो भी रशिया से तेल खरीद रहा है. ऐसे 10 कंट्री को अमेरिका ने सॉर्ट आउट किया है कि जो रशिया से तेल खरीद रहा है उनके ऊपर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे. उसमें हिंदुस्तान भी है. यह टैरिफ बहुत बड़ा है और इतना अगर लगता है तो बहुत दिक्कत होगी. क्योंकि, कारपेट इंडस्ट्री के अंदर बहुत कम्पटीशन है. तमाम कंट्रीज़ के साथ हमारा कम्पटीशन है.
शॉर्ट आउट करेगी मामला
परवेज खान ने बताया कि हम लोगों को पूरी उम्मीद है अपने हिंदुस्तान के गवर्नमेंट पर कि इसको वो सॉर्ट आउट करेंगे और दोबारा इस तरीके का टैरिफ हमारे ऊपर इम्पोज़ न हो. ऐसा पूरा प्रयास करेंगे. ऊपर वाले ने चाहा तो हमारे ऊपर टैरिफ नहीं लगेगा. जो है उसी से आगे काम चलेगा, ऐसी मैं उम्मीद करता हूँ. अमेरिका के साथ कालीन का कारोबार 60 प्रतिशत है. एक बड़ा पार्ट हमारा यूएस के साथ बिज़नेस है. इसलिए हमें इसको बचाये रखना और खासतौर से टैरिफ से इस इंडस्ट्री को बचाये रखना बहुत जरूरी है.
बुनकरों को नुकसान
कॉरपेट व्यवसाई अनिल सिंह ने बताया कि जियोपॉलिटिक्स में यह टैरिफ वॉर जो चल रहा है. केवल कालीन से ही संबंधित नहीं है. कई सेक्टरों में है. कालीन भी उसमें से एक सेक्टर है. चूंकि, यह यहाँ भी लेबर इसमें लार्ज़ली इन्वॉल्व रहता है तो असर पड़ता है. पैनिक शुरू में हुआ था. पहले 50 प्रतिशत लगा. फिर 100 प्रतिशत किया गया और फिर 25 प्रतिशत किया. फिर 200 प्रतिशत की बात आ रही है. अमेरिका की ट्रंप सरकार खुद कन्फ्यूज्ड है. अब क्या डिसाइड होगा. यह मालूम नहीं है, लेकिन ठीक है. हमें उम्मीद है कि सरकार कोई न कोई रास्ता जो है निकाल लेगी. 60 से 65 प्रतिशत के करीब अमेरिका का व्यापार होता है.
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