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कभी फिल्मी पोस्टर रंगकर कमाते थे 35 रुपये, 100 लोगों के लिए बनाते थे खाना, नाना पाटेकर की जिंदगी के 10 अनसुने किस्से

Admin by Admin
October 9, 2026
in मनोरंजन
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कभी फिल्मी पोस्टर रंगकर कमाते थे 35 रुपये, 100 लोगों के लिए बनाते थे खाना, नाना पाटेकर की जिंदगी के 10 अनसुने किस्से

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Last Updated:October 09, 2026, 09:26 IST

Nana Patekar 10 Unknown Facts: नाना पाटेकर 75 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए. 8 अगस्त को उन्होंने अंतिम सांस ली. नाना की फिल्में आपने खूब देखी होंगी लेकिन क्या आप जानते हैं उनकी असल जिंदगी में कई किस्से हैं, जो बताते हैं कि उनकी पहचान सिर्फ दमदार संवाद और यादगार किरदारों तक सीमित नहीं थी. गरीबी से संघर्ष, परिवार की जिम्मेदारियां, निजी दुख, खेती के प्रति लगाव और दूसरों के लिए कुछ करने की इच्छा ने उनके व्यक्तित्व को कई परतें दीं. यही वजह है कि पर्दे पर सख्त नजर आने वाले इस अभिनेता की निजी जिंदगी में संघर्ष और संवेदनशीलता की कई कहानियां छिपी हुई थीं.

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नई दिल्ली. फिल्मों में कभी खतरनाक गैंगस्टर, कभी ईमानदार पुलिस अफसर तो कभी कॉमेडी से दर्शकों को हंसाने वाले नाना पाटेकर की जिंदगी पर्दे पर निभाए गए किरदारों से कहीं ज्यादा दिलचस्प रही. उनकी आवाज और अभिनय ने उन्हें हिंदी और मराठी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में जगह दिलाई, लेकिन निजी जिंदगी में उन्होंने गरीबी, परिवार की मुश्किलें और अपनों को खोने का दर्द झेला. 13 साल की उम्र में परिवार की मदद के लिए काम करने से लेकर खेती करने, खुद खाना बनाने और जरूरतमंद किसानों की सहायता करने तक, उनके जीवन के कई ऐसे पहलू हैं, जिनके बारे में कम लोग जानते हैं. आइए जानते हैं नाना पाटेकर की जिंदगी से जुड़े 10 दिलचस्प फैक्ट्स. फाइल फोटो. 

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ था. उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था. ‘नाना’ नाम बचपन में उन्हें प्यार से बुलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन समय के साथ यही नाम उनकी पहचान बन गया. आज फिल्म जगत में वह इसी नाम से जाने जाते हैं. उन्होंने मुंबई के जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से कमर्शियल आर्ट की पढ़ाई की थी. कला की यही समझ पोस्टर पेंटिंग से लेकर अभिनय तक उनके जीवन के अलग-अलग पड़ावों में काम आई. फाइल फोटो. 

नाना पाटेकर का बचपन आर्थिक तंगी के बीच गुजरा. उनके पिता के कारोबार में भारी नुकसान हुआ, जिसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. परिवार की मदद करने के लिए नाना ने महज 13 साल की उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. वह स्कूल के बाद मुंबई के चूनाभट्टी इलाके में फिल्मी पोस्टर पेंट करने जाते थे. एक पुराने इंटरव्यू के मुताबिक, इस काम के लिए उन्हें महीने के सिर्फ 35 रुपये मिलते थे. कई बार खाने के लिए एक वक्त का भोजन भी मिलता था. काम पर पहुंचने के लिए वह कई किलोमीटर पैदल चलते थे. नाना ने बाद में कहा था कि उस उम्र में भूख और अपमान से मिले अनुभवों ने उन्हें जिंदगी के बारे में बहुत कुछ सिखाया. फाइल फोटो. 

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फिल्मों में आने से पहले नाना पाटेकर का जुड़ाव थिएटर से हो गया था. उन्होंने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि वह तीसरी कक्षा में रहते हुए गांव में नाटकों में हिस्सा लेते थे. अभिनय का यह शौक आगे चलकर उनके करियर की बुनियाद बना. उनके लिए थिएटर केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि खुद को अभिव्यक्त करने का जरिया भी था. उन्होंने मराठी रंगमंच पर काम किया और फिर फिल्मों की दुनिया में कदम रखा. साल 1978 में आई फिल्म ‘गमन’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने की दिशा में सफर शुरू किया. फाइल फोटो. 

नाना पाटेकर ने साल 1978 में नीलकांति पाटेकर से शादी की थी. नीलकांति बैंक में काम करती थीं, जबकि नाना उस समय थिएटर में सक्रिय थे और उनकी कमाई काफी कम थी. एक बातचीत में नाना ने बताया था कि उन्हें थिएटर के एक शो के लिए करीब 50 रुपये मिलते थे, जबकि नीलकांति महीने में लगभग 2,500 रुपये कमाती थीं. नाना ने बताया था कि नीलकांति ने उन्हें अभिनय जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया और भरोसा दिलाया कि वक्त के साथ कमाई भी होने लगेगी. आगे चलकर दोनों लंबे समय तक अलग-अलग रहने लगे, लेकिन उन्होंने तलाक नहीं लिया. फाइल फोटो. 

नाना की जिंदगी का सबसे दुखद अध्याय उनके बड़े बेटे दुर्वासा की मौत से जुड़ा है. दरअसल, दुर्वासा की सेहत जन्म से ही ठीक नहीं थी और उसे कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं. करीब ढाई साल की उम्र में उसका निधन हो गया. कई साल बाद इस घटना के बारे में बात करते हुए नाना ने स्वीकार किया कि उस समय वह यह सोचने लगे थे कि लोग उनके बेटे को देखकर क्या सोचेंगे. बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें दूसरों की राय के बजाय अपने बच्चे के दर्द और तकलीफ पर ध्यान देना चाहिए था. इस घटना ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया. बाद में नाना और नीलकांति के घर बेटे मल्हार का जन्म हुआ. लेकिन बेटे के खोने के गम को वो भूल नहीं सके. फाइल फोटो. 

नाना पाटेकर ने एक समय बहुत ज्यादा सिगरेट पीने लगे थे. अपनी इस आदत के बारे में खुलकर बात की थी. उन्होंने बताया था कि वह दिन में करीब 60 सिगरेट तक पी लेते थे. यहां तक कि कभी-कभी नहाते वक्त भी सिगरेट पीते थे. उनकी गाड़ी में सिगरेट की गंध इतनी तेज हो जाती थी कि लोग उसमें बैठने से कतराते थे. लेकिन फिर उनकी बहन ने एक दिन कुछ ऐसा कह दिया, जिसके बाद उन्होंने सिगरेट हमेशा के लिए छोड़ दिया. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बहन ने एक दिन उन्हें सिगरेट पीने के बाद खांसते हुए देखा. तभी बहन के बच्चे का देहांत हुआ था. भाई को इस हाल में में देख वो बोली- पता नहीं अभी मुझे क्या-क्या देखना है? बहन का ये बात सुनकर नाना प्रभावित हुए. उन्होंने बताया था कि यह बदलाव अचानक हुआ और एक दिन उन्होंने तय कर लिया कि अब सिगरेट नहीं पीएंगे. फाइल फोटो. 

नाना पाटेकर सिर्फ अच्छे अभिनेता ही नहीं, बल्कि खाना बनाने के भी शौकीन थे. उन्हें अपने हाथों से खाना बनाकर लोगों को खिलाना पसंद था. साल 2015 में ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उन्हें लोगों को खाना खिलाने में खुशी मिलती है और वह खुद को अभिनेता से बेहतर कुक मानते हैं. नाना शूटिंग के दौरान कई बार पूरी फिल्म यूनिट के लिए खाना बनाते थे. एक यूनिट में 100 से ज्यादा लोग हों, तब भी वह सबके लिए भोजन तैयार करने में दिलचस्पी लेते थे. उनके लिए साथियों को खाना खिलाना केवल शौक नहीं, बल्कि लोगों से जुड़ने का एक तरीका था. फाइल फोटो. 

फिल्मों की चमक-दमक से दूर नाना पाटेकर को खेती करना पसंद था. पुणे के पास सिंहगढ़ किले के इलाके में उनके फार्म पर वह चावल, मूंगफली, लहसुन और प्याज जैसी फसलें उगाने में दिलचस्पी लेते थे. उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि वह खेतों में खुद काम करते और ग्रामीण जीवन के बीच समय बिताना पसंद करते थे. किसानों की परेशानियों को लेकर उनकी संवेदनशीलता सामाजिक कामों में भी दिखाई दी. साल 2015 में नाना पाटेकर और अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने नाम फाउंडेशन की शुरुआत की. संस्था का उद्देश्य महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों और जरूरतमंद किसानों की सहायता करना है. फाइल फोटो. 

नाना पाटेकर की फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ उनके करियर की खास फिल्मों में से एक है. इस फिल्म में उन्होंने सेना के अधिकारी की भूमिका निभाई थी. किरदार को वास्तविक बनाने के लिए उन्होंने कठिन सैन्य प्रशिक्षण लिया था. सेना से उनका जुड़ाव केवल पर्दे तक सीमित नहीं रहा और वह टेरिटोरियल आर्मी से भी जुड़े. उनके सैन्य प्रशिक्षण और सेना के साथ संबंधों का जिक्र उनके करियर से जुड़े कई लेखों में मिलता है. हालांकि, कारगिल युद्ध के दौरान उनकी भूमिका और सैन्य रैंक से संबंधित कुछ दावों को प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित करना उचित होगा. फाइल फोटो. 

नाना पाटेकर के बेटे मल्हार की दिलचस्पी भी फिल्मों में रही है, लेकिन नाना ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उन्हें सीधे एक्टर बनाने की कोशिश नहीं की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने ‘अब तक छप्पन’ के सीक्वल में मल्हार को अभिनय का मौका देने के विचार का समर्थन नहीं किया. बाद में मल्हार ने फिल्म निर्माण की दिशा में काम किया और राम गोपाल वर्मा के साथ भी जुड़े. नाना का यह फैसला उनके उस नजरिए को दिखाता है, जिसमें वह अपने बेटे को अपने दम पर रास्ता बनाने का मौका देना चाहते थे. उनके लिए परिवार का नाम सफलता की गारंटी नहीं होना चाहिए था. फाइल फोटो. 

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First Published :

October 09, 2026, 09:26 IST

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