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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे से पहले रामनगरी की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है. अयोध्या के अलग-अलग इलाकों में अखिलेश यादव और सपा के खिलाफ रातों-रात बड़े-बड़े पोस्टर लगा दिए गए हैं. इन पोस्टरों के जरिए अखिलेश से तीखे सवाल पूछे गए हैं कि वह रामभक्तों पर गोली चलवाने के पाप के लिए कब माफी मांगेंगे. पोस्टरों में हिंदू आस्था पर चोट पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं और पुरानी अखबारों की कटिंग भी दिखाई गई है. इस पोस्टर वार ने यूपी की राजनीति में एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है.
अयोध्या हाईवे पर अखिलेश यादव के खिलाफ लगे पोस्टर.
Akhilesh Yadav News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में रामनगरी अयोध्या हमेशा से केंद्र में रही है. अब समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के अयोध्या पहुंचने से पहले ही वहां एक नया सियासी बखेड़ा खड़ा हो गया है. अयोध्या में अखिलेश यादव के खिलाफ रातों-रात एक बड़ा पोस्टर वार शुरू हो गया है. पूरे शहर के मुख्य चौराहों और अलग-अलग इलाकों में बड़े-बड़े होर्डिंग और पोस्टर लगा दिए गए हैं, जिनमें सपा अध्यक्ष से कड़े और तीखे सवाल पूछे गए हैं.
अयोध्या की सड़कों पर लगे इन पोस्टरों के जरिए मुख्य रूप से अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी से जवाब मांगा गया है. एक पोस्टर में अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया है- ‘रामभक्तों से कब माफी मांगोगे अखिलेश?’. इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के पुराने इतिहास को कुरेदते हुए यह भी सवाल दागा गया है कि ‘रामभक्तों पर गोली चलवाने के पाप पर माफी कब मांगेंगे सपाई?’. इन होर्डिंग्स ने एक बार फिर 1990 के दशक की उस घटना की याद दिला दी है, जब अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलवाई गई थीं. एक होर्डिंग में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि ‘रामभक्तों पर गोली चलवाने का प्रायश्चित कब करेंगे सपाई?’
अखिलेश के विरोध में लगे पोस्टर
इस पोस्टर वार को और अधिक आक्रामक बनाने के लिए पोस्टरों में अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ-साथ विभिन्न समाचार पत्रों की पुरानी खबरें और मीडिया रिपोर्ट की कटिंग भी चस्पा की गई हैं, ताकि आरोपों को तथ्यात्मक रूप से भारी बनाया जा सके. इन पोस्टरों में न केवल पुरानी घटनाओं का जिक्र है, बल्कि हालिया राजनीतिक बयानों को लेकर भी सपा को घेरा गया है. होर्डिंग्स में समाजवादी पार्टी पर हिंदू आस्था पर बार-बार चोट पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. एक सवाल यह भी प्रमुखता से उकेरा गया है कि ‘हिंदू आस्था पर चोट के लिए कब मांगोगे माफी?’
सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति कहीं बैकफायर न कर जाए
अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है. एक तरफ अखिलेश यादव जहां सवर्णों को साधने में लगे हैं, दूसरी तरफ राम मंदिर का समाजवादी पार्टी से जुड़ा काला अध्याय पीछा नहीं छोड़ रहा है. सपा मुखिया के खिलाफ इस तरह के तीखे विरोध ने एक बार फिर राम मंदिर और कारसेवकों के मुद्दे को यूपी की राजनीति में प्रासंगिक कर दिया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के अन्य नेता इस पोस्टर वार और रामभक्तों से जुड़े इन सीधे सवालों का किस तरह से जवाब देते हैं.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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