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एक्टिंग की दुनिया में अमरीश पुरी का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है.अपनी दमदार आवाज, खौफनाक अंदाज और शानदार अभिनय के दम पर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई. उन्होंने अपने किरदारों के जरिए ऐसी अमिट छाप छोड़ी, जिसके लिए लोग उन्हें आज भी याद करते हैं. लेकिन जब उनके पोते वर्धन पुरी की आती है, तो उनके हिस्से ये सफलता नहीं आई. उन्होंने डेब्यू फिल्म में ही कई शेड्स वाला रोल निभाया था.लेकिन डेब्यू फिल्म ही फ्लॉप हुई और वह दादा जैसा स्टारडम आजतक नहीं हासिल कर पाए.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिनकी पहचान सिर्फ उनके नाम से बल्कि उनके किरदारों से भी होती है. ऐसे ही एक कलाकार हैं,अमरीश पुरी. दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी ने मोगेम्बो को रोल निभाकर तो इतिहास ही रच दिया था. वहीं उनके पोते वर्धन पुरी वो मुकाम हासिल नहीं कर पाए.
आज भी जब दमदार आवाज और गुस्से से भरे चेहरे के भाव की होती है, तो पहला नाम अमरीश पुरी का आता है. आज भी जब पर्दे पर किसी दमदार विलेन की बात होती है, तो अमरीश पुरी का नाम जरूर याद आता है. लेकिन वर्धन पुरी इस पहचान और स्टारडम का स्वाद नहीं चख सके. न ही वह उस मुकाम तक पहुंच सके, जिनकी उनसे उम्मीद की गई थी. आखिर अमरीश पुरी की विरासत के बावजूद वर्धन पुरी का करियर उस मुकाम तक क्यों नहीं पहुंच पाया, आइए जानते हैं.
‘ये साली आशिकी’ से किया था डेब्यू
वर्धन पुरी ने साल 2019 में फिल्म ‘ये साली आशिकी’ से बॉलीवुड में कदम रखा था. खास बात यह थी कि उन्होंने अपनी शुरुआत किसी टिपिकल रोमांटिक फिल्म से नहीं की.फिल्म उनकी इस फिल्म में प्यार, जुनून, धोखा और रिश्तों का एक डार्क पक्ष देखने को मिला था. इतना ही नहीं, कहा जा रहा था कि फिल्म में उनका किरदार डर के शाहरुख खान जैसा है. लेकिन ऐसा न हो सका. न लोगों ने उनकी एक्टिंग पसंद की और न ही फिल्म की कहानी. फिल्म दर्शकों को खास पसंद नहीं आई और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई.
दादा के स्टारडम से होने लगी थी तुलना (फोटो साभार :instagram@vardhanpuri02)
शाहरुख खान से हुई थी तुलना
फिल्म नहीं चली तो इसका सीधा असर वर्धन के करियर पर भी पड़ा. उनका नाम लोगों तक जरूर पहुंचा, लेकिन वह पहचान नहीं बन पाई जिसकी उम्मीद उनके डेब्यू से की जा रही थी. फिल्म के प्रमोशन के दौरान वर्धन पुरी ने अपने किरदार की तुलना शाहरुख खान की फिल्म ‘डर’ से भी की थी. उनके मुताबिक, फिल्म में उनका किरदार शाहरुख के ‘डर’ वाले किरदार की तरह था.उन्होंने कहा था कि लोगों को ऐसा लग रहा है. लेकिन क्या सिर्फ किसी फिल्म का फ्लॉप होना किसी अभिनेता को फ्लॉप बना देता है?
बता दें कि कहीं न कहीं डेब्यू के बाद वर्धन को वो सही फिल्में नहीं मिली,जो उनके करियर को और आगे बढ़ा सकती. या कहें कि ऐसे रोल जिनमें वो अपने टैलेंट को एक बार फिर से साबित कर सके. फिर लगातार फिल्में न करने से भी एक नए एक्टर के लिए बड़ा जोखिम हो सकता है. शायद उन्हें लगातार काम मिलता तो आज उनका करियर किसी और दिशा में होता.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…
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