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durva grass | durva ke fayde | durva grass ayurvedic fayde | औषधीय गुणों का खजाना है ये कसैली घास, पेट से लेकर त्वचा तक की समस्या में कारगर

Admin by Admin
October 6, 2026
in उत्तर प्रदेश
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durva grass | durva ke fayde | durva grass ayurvedic fayde | औषधीय गुणों का खजाना है ये कसैली घास, पेट से लेकर त्वचा तक की समस्या में कारगर


Last Updated:October 06, 2026, 16:09 IST

Durwa Health Benefits: दूर्वा को लेकर आयुर्वेदिक चिकित्सा में किडनी और मूत्र तंत्र से संबंधित कुछ समस्याओं में भी पारंपरिक प्रयोग बताए गए हैं. इसके रस का सेवन कुछ परिस्थितियों में लाभकारी माना जाता है. आइए आपको दूर्वा के आयुर्वेदिक फायदों के बारे में बताते हैं.

लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का तराई इलाका प्राकृतिक वनस्पतियों और औषधीय पौधों के लिए जाना जाता है. यहां खेतों, घरों के आसपास, खाली जमीन और घास के मैदानों में कई ऐसी वनस्पतियां आसानी से दिखाई देती हैं, जिन्हें आम लोग सामान्य घास या खरपतवार समझकर उखाड़कर फेंक देते हैं. लेकिन आयुर्वेद की नजर से देखें तो इनमें से कई पौधों का अपना अलग औषधीय महत्व है ऐसी ही एक वनस्पति है दूर्वा घास.

दूर्वा को आमतौर पर लोग घरों के आसपास या खेतों में उगने वाली सामान्य घास समझते हैं. यह जमीन पर फैलकर तेजी से बढ़ती है और थोड़ी सी नमी मिलने पर दोबारा हरी हो जाती है. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में इसे अक्सर खरपतवार समझकर हटा दिया जाता है. हालांकि आयुर्वेद में दूर्वा का पारंपरिक रूप से कई तरह से उपयोग किया जाता रहा है.

कफ दोष को शांत करने वाली वनस्पति
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ऋचा श्रीवास्तव के अनुसार, दूर्वा का स्वाद कषाय यानी कसैला और मधुर माना जाता है, जबकि इसकी तासीर शीतल यानी ठंडी होती है. आयुर्वेदिक दृष्टि से इसे मुख्य रूप से शरीर में पित्त और कफ दोष को शांत करने वाली वनस्पति माना जाता है. इसका उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है.

त्वचा की जलन और खुजली में उपयोग
डॉ. ऋचा श्रीवास्तव के अनुसार, दूर्वा का पेस्ट या रस त्वचा पर लगाने की परंपरा रही है. इसका इस्तेमाल त्वचा में होने वाली जलन और खुजली को शांत करने के लिए किया जाता है. दूर्वा को ठंडी तासीर वाली वनस्पति माना जाता है, इसलिए गर्मी या जलन से संबंधित त्वचा की कुछ परेशानियों में इसका पारंपरिक प्रयोग किया जाता है. कुछ आयुर्वेदिक प्रयोगों में दूर्वा को हल्दी के साथ मिलाकर भी त्वचा पर लगाने की बात कही जाती है. डॉ. ऋचा के अनुसार, इसका इस्तेमाल एक्जिमा, सोरायसिस और खुजली जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं में पारंपरिक रूप से किया जाता है.

पेट की एसिडिटी में भी बताया जाता है लाभकारी
आजकल खान-पान में बदलाव और अनियमित दिनचर्या के कारण बड़ी संख्या में लोग गैस, एसिडिटी और पेट से जुड़ी परेशानियों से जूझते हैं. आयुर्वेद में पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं के लिए कई प्राकृतिक वनस्पतियों का इस्तेमाल किया जाता है. दूर्वा भी उनमें से एक है. दूर्वा के रस का पारंपरिक रूप से सेवन किया जाता है. इसे पाचन और एसिडिटी से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है.

कब्ज और दस्त में भी पारंपरिक इस्तेमाल
दूर्वा का इस्तेमाल केवल एसिडिटी तक सीमित नहीं है. आयुर्वेदिक परंपरा में इसे पाचन को बेहतर करने और पेट से संबंधित कुछ समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. डॉ. ऋचा के अनुसार, दूर्वा का प्रयोग कब्ज और अतिसार यानी दस्त जैसी स्थितियों में भी पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. हालांकि कब्ज और दस्त दोनों ही अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं. सामान्य और हल्की समस्या में घरेलू देखभाल पर्याप्त हो सकती है, लेकिन अगर दस्त लगातार जारी रहें, शरीर में पानी की कमी हो, तेज बुखार हो या मल में खून आए तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह जरूरी है.

आंखों के लिए भी बताई जाती है फायदेमंद
ग्रामीण क्षेत्रों में दूर्वा को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. इनमें से एक मान्यता यह है कि सुबह ओस से भीगी दूर्वा घास पर नंगे पैर चलने से आंखों को लाभ मिलता है और आंखों की रोशनी बढ़ती है.
डॉ. ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि दूर्वा की शीतल प्रकृति को देखते हुए इसे पारंपरिक रूप से आंखों के लिए भी उपयोगी माना गया.

पेशाब में जलन की समस्या में भी इस्तेमाल
दूर्वा का पारंपरिक इस्तेमाल मूत्र संबंधी समस्याओं में भी बताया जाता है. डॉ. ऋचा श्रीवास्तव के अनुसार, इसके रस का सेवन मूत्र में होने वाली जलन जैसी समस्या में राहत देने में मददगार माना जाता है. गर्मी के मौसम में कई लोगों को पानी की कमी या अन्य कारणों से पेशाब में जलन की शिकायत हो सकती है. ऐसे में पर्याप्त पानी पीना जरूरी है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

और पढ़ें

Location :

Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh

First Published :

October 06, 2026, 16:09 IST

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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