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वाराणसी में ये कैसा पीपल का पेड़, जहां लटकी रहती हैं मृतकों की तस्वीरें? पुराणों में भी है इस जगह का जिक्र

Admin by Admin
October 5, 2026
in उत्तर प्रदेश
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वाराणसी में ये कैसा पीपल का पेड़, जहां लटकी रहती हैं मृतकों की तस्वीरें? पुराणों में भी है इस जगह का जिक्र


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वाराणसी में ये कैसा पीपल का पेड़, जहां लटकी रहती हैं मृतकों की तस्वीरें?

Last Updated:October 05, 2026, 14:03 IST

Varanasi News: धर्म नगरी काशी दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है. इस शहर में पिशाच मोचन तीर्थ है. इस तीर्थ के पास खास अनुष्ठान से भटकती आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है. इसी कुंड के करीब ही एक प्राचीन पीपल का वृक्ष है, जिसमें हजारों अतृप्त आत्माएं बसती हैं. भटकते आत्माओं के शांति के लिए विशेष पूजा अनुष्ठान होता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस भी व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है. इसकी आत्मा प्रेत योनि में प्रवेश कर जाती है. ऐसी अतृप्त और भटकती आत्माएं अक्सर लोगों को परेशान भी करती है. इन्ही भटकती आत्माओं को बैठाने के लिए उनके परिजन वाराणसी स्थित एक विशाल पीपल वृक्ष के पास पिशाच मोचन कुंड पर त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण बलि देते है.

सैकड़ों साल पुराने इस पीपल के वृक्ष के कई तने है. इस विशाल वृक्ष के अलग अलग तनों पर आपको सैकड़ों कील और मृतकों की तस्वीर नजर आएगी. वृक्ष के तनों पर अनगिनत कील और इन तस्वीरों को देख लोग भयभीय भी हो जाते हैं. कई बार रात के वक्त लोग इसके करीब आने से भी कतराते हैं. इलाके में इस वृक्ष को लेकर अलग-अलग चर्चाएं भी रहती हैं.

इस विशेष अनुष्ठान के बाद इन भटकती आत्माओं को बैठाने के लिए गुपचुप तरीके से उनकी तस्वीर को लोहे के कील और सिक्के के सहारे इस पेड़ पर गाड़ा जाता है. उसके बाद कुछ जरूरी उपाय भी कराएं जाते हैं. इससे वो भटकती आत्माएं बैठ जाती हैं और उनके मुक्ति का मार्ग भी खुल जाता है.

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कई ऐसे लोग हैं, जिन्हे यहां इस उपाय से सीधा फायदा भी हुआ है. यही कारण है की ऐसी समस्याओं के दौरान लोग इससे मुक्ति के लिए पिशाच मोचन कुंड का रूख करते हैं. पितृपक्ष में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है. पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां आते हैं.

पुरे दुनियां में सात ऐसे स्थान हैं, जहां से मनुष्य के मुक्ति का मार्ग प्रसस्थ होता है. इसमें अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार,काशी,द्वारका,उज्जैन और कांची शामिल है. इन्हे सप्तपुरी भी कहा जाता है. लेकिन इन सप्तपुरियों में काशी का पिशाच मोचन तीर्थ एक ऐसा स्थान है. जहां उन अकाल मृत्यु से मरे व्यक्ति को भी मुक्ति मिल जाती है.

पिशाच मोचन तीर्थ के पुरोहित मुन्ना पांडेय ने बताया कि गया जाने से पूर्व भी लोग काशी के इस कुंड पर पितरों के मुक्ति और आत्मा के शांति के निमित श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. ऐसी परम्परा सदियों से चलती चली आ रही है.

जिन व्यक्तियों पर ऊपरी बाधा होती है वो भी यदि इस कुंड में स्नान करते हैं, तो उन्हें इससे मुक्ति मिल जाती है. बताते चलें कि काशी में इस पिशाच मोचन कुंड का इतिहास गंगा अवतरण से पूर्व का माना जाता है. स्कन्द पुराण के साथ काशी खंडोक्त में इसका वर्णन भी मिलता है.

इस तीर्थ की स्थापना महादेव के भक्त कपर्दी ने की थी. उन्होंने यहां एक शिवलिंग भी स्थापित किया था, जिसे कपर्दीश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. इनके दर्शन मात्र से भी भूत बाधा संबंधित सभी समस्याएं दूर होती हैं.

First Published :

October 05, 2026, 14:01 IST



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