Last Updated:
Varanasi News: पितृपक्ष में अपनों का तर्पण करने के लिए लाखों की संख्या में लोग काशी पहुंच रहे हैं. इसी के तहत सात समंदर पार से भी लोग वाराणसी पहुंच रहे हैं, जहां वो अपने अपनों का तर्पण कर रहे है. इसी क्रम में अमेरिका के रहने वाला एक नागरिक भी वाराणसी पहुंचा है और यहां उन्होंने काशी अस्सी घाट पर अपने चाचा का पिंडदान किया.
अमेरिका के जैक्सन पिण्डदान करते हुए
वाराणसी: काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहां से अगर पितरों का तर्पण किया जाए, तो उनकी आत्मा को शांति मिलती है. वहीं पितृपक्ष के दौरान यहां काफी भीड़ देखने को मिल रही है. पितृपक्ष में अपनों का तर्पण करने के लिए लाखों की संख्या में लोग काशी पहुंच रहे हैं. इसी के तहत सात समंदर पार से भी लोग वाराणसी पहुंच रहे हैं, जहां वो अपने अपनों का तर्पण कर रहे है.
इसी क्रम में अमेरिका के रहने वाला एक नागरिक भी वाराणसी पहुंचा है और यहां उन्होंने काशी अस्सी घाट पर अपने चाचा का पिंडदान किया और उनकी आत्मा के शांति के लिए पूजन किया. बता दें कि मूलरूप से अमेरिका के मैक्सीगन के रहने वाले जंक्शन अपने चाचा के साथ ही रहते थे. लेकिन जब उनके चाचा की मृत्यु हो गई तो वह अक्सर उनके सपनों में आया करते थे.
यूट्यूब पर देखी वाराणसी के पिण्डदान की झलक
ऐसे में एक दिन यूट्यूब पर वीडियो सर्च करने के दौरान उन्होंने काशी के पिंडदान का वीडियो देखा और यहां के आचार्य का अनुष्ठान देखा. तब उनके मन में ख्याल आया कि वह भी काशी जाकर अपने चाचा का पिंडदान करेंगे. ऐसे में उन्होंने काशी के आचार्य से संपर्क किया, जहां उन्होंने काशी में पिंडदान के महत्व के बारे में जाना, समझा और उसके बाद उन्होंने पितृपक्ष में तर्पण का निर्णय लिया.
चाचा नेट का किया पिण्डदान
शनिवार, 03 अक्टूबर को वाराणसी के अस्सी घाट पर उन्होंने आचार्य के नेतृत्व में अपने चाचा नेट का पिंडदान किया. बताते चलें कि विदेशी मेहमान काशी में पूजन से लेकर श्राद्ध क्रम को लेकर खासा उत्साहित रहते हैं. सनातन की विधि-विधान से पूजन उन्हें प्रभावित करती है. यही कारण है कि हजारों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओ में कई ऐसे होते हैं, जो सिर्फ यहां पूजन पाठ के लिए आते हैं.
About the Author

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
और पढ़ें

