मुंबई. प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की मौत एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त हो गया है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है. वहीं, रसिक के परिवार ने आश्रम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. रसिक की मौत पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने चिंता जताई. उन्होंने छतरपुर में दिव्य दरबार के दौरान कहा कि वर्तमान समय में सनातन पर चारों तरफ से हमले और कुठाराघात हो रहा है. उन्होंने बागेश्वर धाम आने वाली माताओं-बहनों से अपील की कि वे अकेली धाम न आएं. अगर अकेले आएं तो किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें, यहां तक धाम के किसी सेवादार पर भी भरोषा ना करें और किसी अनजान के साथ कहीं न जाएं और ज्यादा दिनों तक धाम में न ठहरें.
बागेश्वर सरकार ने कहा कि धाम करीब 5 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. मंदिर परिसर और हॉल की व्यवस्था एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी धाम की है, लेकिन पूरे क्षेत्र में सुरक्षा उपलब्ध कराना संभव नहीं है. उन्होंने कहा स्वयं सतर्क, सजग और सावधान रहें, अकेले न आएं और अनजान लोगों पर भरोसा न करें. स्वयं समझदार बनें और दूसरों को भी जागरूक करें.
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “बहुत दिनों तक यहां न ठहरे, क्योंकि ऐसी कोई विशेष व्यवस्था नहीं है. और किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें, क्योंकि लगातार बहुत शत्रु ऑलरेडी सनातन के पीछे पड़े हैं, हमारे पीछे पड़े हैं. वो कुछ न कुछ उपद्रव करते रहते हैं. तो धाम की या पूरे एरिया की हमारी जिम्मेदारी नहीं है. हम हॉल की जिम्मेदारी तो ले सकते हैं, मंदिर की ले सकते हैं, लेकिन धाम परिसर पूरा 5 किलोमीटर में, उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं है. क्योंकि आए दिन कुछ न कुछ किसी न किसी तीर्थ का सुन रहे हैं. कोई न कोई धाम का, आए दिन कुछ न कुछ कलंक धामों पर लग रहा है.”
बालाजी की बदनामी नहीं चाहते धीरेंद्र शास्त्री
धीरेंद्र शास्त्री कहा,”अभी वृंदावन में बहुत बड़ा हो गया. एक न एक आए दिन हो रहा है. और हम नहीं चाहते कि बालाजी बदनाम हों. और छोटी सी चूक के कारण. सब प्रकार के लोग आते हैं, अच्छे-भले-बुरे सब आते हैं. सब अच्छे ही थोड़े होते हैं. पर माताओं को भरोसा भी नहीं करना चाहिए. पहली बात तो अकेले नहीं आना चाहिए. अकेले आ गए, तो मंदिर और इस प्रांगण के अलावा कहीं जाना भी नहीं चाहिए. क्योंकि तरह-तरह के लोग हैं, अच्छे-भले-बुरे लोग हैं. सब जगह सिक्योरिटी तो लगा नहीं सकते. कहां-कहां तक लगाएंगे?”
धीरेंद्र शास्त्री ने महिलाओं की सुरक्षा पर उठाए सवाल
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “यहीं पर तो लगाने में जेब फट जाती है. इसलिए ये सूचना हमें रात-शाम को ही देनी थी. जब से वो वृंदावन वाला हमने देखा, तब से हमारे मन में आया कि हमको ये बात कहनी चाहिए कि ज्यादा दिन यहां कोई रुके न. ज्यादा दिनों तक यहाँ पर ठहरे न, खासकर माताएं-बहनें. क्योंकि सुना जो समय है, बड़ा गंदा है. बड़ा गंदा… मतलब कई बार हमें ऐसा लगता है न, आज के जमाने में भारत में बेटियां होना पाप जैसा हो गया है. स्त्री होना घातक जैसा हो गया है. जिसको देखो उसकी नजर राम-राम-राम… बेटियां कहीं सुरक्षित नहीं. न घर में हैं, न बाहर. ऐसा समय आ गया, इतना विपरीत समय आ गया.”

