संवाददाता@वीरेंद्र यादव……

शक्तिनगर निवासी शिवाकांत बागरी के रिश्तेदार रजीत कुमार ने पुलिस को देते हुए बताया कि उनके भतीजे गणेश केशरी (11 माह) के दाहिने हाथ के अंगूठे में चार अगस्त को सुबह फुलकी मशीन से चोट लग गई थी। चोट के उपचार के लिए बच्चे को चिकित्सक डॉ. एसके सिंह के क्लीनिक में ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने ऑपरेशन की जरूरत बताते हुए उसे भर्ती कराने की बात कही।
परिजनों के मुताबिक बच्चे को करीब दोपहर मिश्रा पाली क्लीनिक अस्पताल, बैढ़न में ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया। शाम को डॉ. एसके सिंह और क्लीनिक की टीम ने बच्चे के दाहिने हाथ के अंगूठे का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों ने बच्चे को खाना-पानी नहीं देने और कुछ समय बाद पानी देने की बात कही।

इसके बाद बच्चे को लगातार उल्टी-दस्त होने लगी परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ को इसकी जानकारी दी, लेकिन रातभर बच्चे को देखने के लिए कोई चिकित्सक नहीं आया। अगले दिन सुबह क्लीनिक के एक डॉक्टर ने बच्चे को देखकर दवा लिखी, लेकिन इसके बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। दोपहर को अस्पताल में मौजूद नर्स से डॉक्टर एसके सिंह को बुलाने के लिए कहा गया।
नर्स ने फोन पर डॉक्टर से बात की, जिस पर डॉक्टर ने दोपहर दो बजे आने की बात कही चार बजे डॉक्टर एसके सिंह अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्होंने बच्चे को देखने के बजाय ऑपरेशन थिएटर चले गए शाम करीब छ बजे नर्स ने बच्चे को एक इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के बाद बच्चे को झटका आया और वह बेहोश हो गया। इसके बाद डॉक्टर एसके सिंह आईसीयू में बच्चे को देखने पहुंचे। कुछ देर बाद अस्पताल प्रबंधन भी मौके पर पहुंचा।

करीब सात बजे बाहर से दो-तीन डॉक्टर बुलाकर बच्चे की जांच कराई गई और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। रात आठ बजे गणेश केशरी की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद बच्चे का शरीर पूरी तरह नीला पड़ गया था। इसके बाद अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. डीके मिश्रा ने इलाज का पूरा भुगतान करने और शव वहां से ले जाने की बात कही। परिजनों ने मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले को दर्ज कर जांच कर रही है| मौत के वास्तविक कारणों और इलाज के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा|







