संवाददाता@संदीप अग्रहरी……
— 9 अगस्त को गूंजेगा बदलाव का बिगुल, शिक्षा-नशामुक्ति और संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर आदिवासी सेवा ट्रस्ट, सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) के संस्थापक जय मंगल उरेती ने आदिवासी समाज के नाम बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि समाज का वास्तविक विकास शिक्षा, जागरूकता और एकता से ही संभव है। इसलिए अब समय आ गया है कि हर परिवार शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाए और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से हमेशा के लिए दूरी बनाए।
जय मंगल उरेती ने कहा कि शराब और अन्य नशीले पदार्थ आदिवासी परिवारों की खुशहाली, आर्थिक स्थिति और सामाजिक सम्मान पर सबसे बड़ा आघात कर रहे हैं। नशे की वजह से अनेक परिवार बिखर रहे हैं और युवा अपनी प्रतिभा से भटक रहे हैं। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारियों को अपनाकर समाज के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि आदिवासी सेवा ट्रस्ट केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव जाकर शिक्षा का प्रचार-प्रसार, नशामुक्ति अभियान और सामाजिक जागरूकता के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ट्रस्ट का उद्देश्य आदिवासी समाज को संगठित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है।

जय मंगल उरेती ने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, लोककला, लोकगीत, पारंपरिक रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि संस्कृति और परंपराओं को बचाकर ही समाज अपनी अलग पहचान को मजबूत रख सकता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि “शिक्षित, संगठित और नशामुक्त आदिवासी समाज ही विकास की नई इबारत लिखेगा।” इसी संदेश के साथ उन्होंने 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर अधिक से अधिक लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर शिक्षा, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और नशामुक्त समाज के संकल्प को मजबूत करने की अपील की।









