झांसी की पुरानी पहचान सिर्फ किले से नहीं जुड़ी है. शहर के आसपास बने ऐतिहासिक दरवाजे भी यहां के पुराने शहर की तस्वीर को समझने में अहम हैं. झांसी में कभी दतिया गेट, झिरना गेट, चांद गेट, बड़ागांव गेट, लक्ष्मी गेट, भंडेरी गेट, ओरछा गेट, उन्नाव गेट, सैय्यर गेट और सागर गेट जैसे दरवाजे रहे हैं. इन दरवाजों से पुराने शहर में आने-जाने के रास्ते जुड़े हुए थे.
कहीं पुरानी पहचान कायम, तो कहीं समय का असर
आज इन दरवाजों को देखें तो हर जगह एक जैसी स्थिति नजर नहीं आती. कुछ दरवाजे अभी भी अपनी पुरानी पहचान के साथ मौजूद हैं. उनकी बनावट में पुराने समय के निशान दिखाई देते हैं.
वहीं कुछ दरवाजों को समय के साथ नुकसान पहुंचा है. कहीं पुरानी संरचना का हिस्सा ही बचा है. कहीं आसपास हुए निर्माण ने इनकी पुरानी पहचान को पीछे कर दिया है.
शहर के विकास के साथ बदलता गया स्वरूप
शहर में लगातार हुए विकास का असर इन ऐतिहासिक जगहों पर भी दिखाई देता है. रास्ते बदले हैं. आसपास की बसावट बदली है. इसके साथ इन दरवाजों का पुराना स्वरूप भी कई जगह बदल चुका है.
आज भी इतिहास की कहानी बयां करते हैं ये दरवाजे
फिलहाल तस्वीर यह है कि कुछ दरवाजे अपनी ऐतिहासिक पहचान को संभाले हुए हैं. वहीं कुछ दरवाजों पर समय का असर साफ दिखाई देता है.
इतिहासकार हर गोविंद कुशवाहा बताते हैं कि इन दरवाजों का पुराने झांसी के स्वरूप में खास महत्व रहा है. इनके जरिए उस समय के शहर की बनावट, सीमाओं, रास्तों और सुरक्षा व्यवस्था को समझा जा सकता है.
पुराने झांसी की तस्वीर दिखाते हैं ऐतिहासिक दरवाजे
वहीं आज की स्थिति में इन दरवाजों को देखकर झांसी के बदलते स्वरूप की तस्वीर भी सामने आती है. कुछ जगहों पर पुरानी धरोहर अभी भी दिखाई देती है. जबकि कुछ जगहों पर विकास के बीच इसका स्वरूप काफी बदल गया है.
इन ऐतिहासिक दरवाजों में झांसी के पुराने शहर की कई कहानियां जुड़ी हुई हैं. इसलिए इनकी मौजूदा स्थिति सिर्फ पुरानी इमारतों की तस्वीर नहीं बताती. बल्कि यह भी दिखाती है कि समय के साथ झांसी का शहर कितना बदला है.
