मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में 2 दिन से हो रही लगातार बारिश और तूफान में मुस्ताक अहमद के घर से छप्पड़ छीन लिया. परिवार में चार बेटियां शादी करने योग्य हो गई है, लेकिन इस बारिश में उनके घर दुखों का पहाड़ गिरा दिया. आईए जानते हैं क्या है मुस्ताक के परिवार की परेशानी, उन्हीं के परिवार के लोगो के जुबानी.
लोकल 18 से बात करते हुए हसीना बेगम बताती हैं कि उनके परिवार में इकलौते उनके पति कमाने वाले हैं. रहने के लिए घर नहीं है, खाने के लिए सही समय पर दो वक्त की रोटियां नहीं मिल पाती हैं. रहने के लिए घर नहीं है, शौच के शौचालय नहीं है और नहाने के लिए बाथरुम नहीं है, पानी पीने के लिए नल नहीं है. समस्याएं इतनी है कि आंखों से आंसू टपकना बंद नहीं होती.
आज तक ना आवास मिला, ना शौचालय
हसीना बेगम ने बताया कि मजबूरी है कि किसी तरह से जीवन यापन किया जा रहा है. कई बार ग्राम प्रधान से शिकायत की गई, लेकिन आज तक ना आवास मिला, ना शौचालय मिला और ना ही कोई सुविधा मिली. जिससे कई पर परेशानियां झेलते हुए जीवन व्यतीत किया जा रहा है. गरीबी इतनी कि पैसे ना होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई तक नहीं हो सकी.
पैसे के अभाव में नहीं हो सकी पढ़ाई
नजनी बताती हैं कि आज गरीबी इतनी है कि इधर-उधर से लकड़ियों की व्यवस्था की जाती है और इस लकड़ी से चूल्हे पर खाना बनाया जाता है. हालांकि उनके घर में यह चूल्हा रोज तो नहीं जलता, लेकिन जब जलता है तो पूरे गांव को पता चल जाता है कि आज हमारे घर चूल्हा जला हुआ है. लकड़ी के आग पर धुआं इतना निकलता है कि पूरा गांव जान जाता है कि हमारे घर आज खाना बन रहा है. समस्याएं बहुत है लेकिन कई बार जनप्रतिनिधियों से शिकायत के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका.
उन्होंने कहा कि पैसे के अभाव में पढ़ाई नहीं कर सकी और आज घर में चूल्हा फूंक रही हैं. हालत यह है कि कभी-कभी भूखे पेट ही सोना पड़ता है. बारिश होने लगे तो एक ही जगह लोग बैठ जाते हैं, क्योंकि सिर छुपाने के लिए छत नहीं है. यदि रात किसी तरह से बीत जाती है तो अगली सुबह यह सोचा जाता है कि कल सुबह क्या बनेगा, खाने के लिए खाना मिलेगा या नहीं मिलेगा. परिस्थितियां बहुत बुरी हैं, लेकिन जीवन किसी तरह से बिताया जा रहा है.
कपड़े के बनाए गए बाथरूम में करते हैं लोग स्नान
चांदनी बताती हैं कि हालात इतने बुरे हैं कि कपड़े के बनाए गए बाथरूम में स्नान किया जाता है. यदि किसी को स्नान करना होता है तो परिवार का कोई एक सदस्य बाहर खड़ा होकर निगरानी करता है कि कोई व्यक्ति कपड़े के अंदर न झांके, तब स्नान किया जाता है. मजबूरियां हैं, लेकिन कुछ किया नहीं जा सकता. आर्थिक स्थिति कमजोर है, इसलिए ना घर बन सका, न ही शौचालय और बाथरूम बन सका. यही वजह है कि इसी तरह से जीवन व्यतीत किया जा रहा है.
आज खाना मिलता है, कल का भरोसा नहीं
उन्होंने बताया कि कई बार इन समस्याओं को लेकर ग्राम प्रधान व अन्य जनप्रतिनिधियों से बात की गई, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई. जिस वजह से आज इस तरीके से जीवन व्यतीत किया जा रहा है. परिवार में एकलौते पिता कमाने वाले हैं और चार बहन व एक भाई हैं, जिस वजह से घर खर्च अधिक है. एक दिन खाना बनता है तो अगले दिन सोचना पड़ता है कि कल सुबह खाने के लिए रोटी मिलेगी या नहीं मिलेगी.
प्रधान प्रतिनिधि बोले- जल्द बनेगा आवास
चांदनी ने कहा कि 2 दिन की हुई बारिश में रहने के लिए छप्पर बनाया गया, वह भी टूट गया. सरकारी योजनाओं के नाम पर कुछ नहीं मिला, जिस वजह से समस्या ही समस्या है. जिंदगी किसी तरह से बिताई जा रही है. उनकी शासन-प्रशासन से मांग है कि इन हालातों को देखते हुए उनकी समस्याओं को दूर किया जाए. इस बाबत ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास के लिए इनका पेपर भेज दिया गया है. जैसे ही शासन द्वारा बजट आता है, इनका आवास बनाया जाएगा और हर संभव मदद की जाएगी, जिससे उनकी समस्याएं दूर हो सकें.

