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Ayodhya Ramleela Public Opinion : अयोध्या में इस बार फिल्मी सितारों से सजी रामलीला नहीं होगी. इस रामलीला में बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार राम, सीता, लक्ष्मण और रामायण के दूसरे पात्रों का मंचन करते रहे हैं. देशभर में इस रामलीला की चर्चा हर साल होती रही है. फिल्मी सितारों की रामलीला नहीं होने पर अयोध्या के संत समाज की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. लोकल 18 से संत अनिरुद्ध देवदास ने इसे अच्छा कदम बताया. देवेश आचार्य ने कहा कि रामलीला भगवान राम की मर्यादा और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर होनी चाहिए. स्थानीय की ओर से पारंपरिक शैली में होने वाली रामलीला अधिक उपयुक्त है.
अयोध्या. रामनगरी अयोध्या में इस बार फिल्मी सितारों से सजी रामलीला का आयोजन नहीं होगा. हर साल होने वाली इस भव्य रामलीला में बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और रामायण के अन्य पात्रों की भूमिका निभाते रहे हैं. फिल्मी कलाकारों की मौजूदगी के कारण यह रामलीला देशभर में चर्चा का विषय भी रहती थी. हालांकि इस बार आयोजन को लेकर तस्वीर अलग है. स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक शैली की रामलीला पर जोर दिया जा रहा है. फिल्मी सितारों की रामलीला नहीं होने पर अयोध्या के संत समाज और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. संतों का एक वर्ग इसे अयोध्या की धार्मिक और पारंपरिक संस्कृति से जोड़कर देख रहा है. कुछ लोगों का मानना है कि फिल्मी कलाकारों के जरिए रामलीला को देशभर में पहचान और प्रचार मिला.
तुलसी स्मारक वाली ज्यादा ठीक
रामनगरी के संत अनिरुद्ध देवदास ने फिल्मी सितारों की रामलीला इस बार नहीं होने को अच्छा कदम बताया. वे लोकल 18 से कहते हैं कि पहले से ही इसका विरोध किया जा रहा था. फिल्मी कलाकारों की रामलीला में कई बार भारतीय संस्कृति और रामचरितमानस की मूल भावना के विपरीत प्रस्तुति देखने को मिलीं. अयोध्या में तुलसी स्मारक भवन सहित अन्य स्थानों पर स्थानीय और भारतीय कलाकारों की ओर से पारंपरिक शैली में होने वाली रामलीला अधिक उपयुक्त है. ऐसी रामलीला में भारतीय संस्कृति और परंपरा का बेहतर तरीके से पालन होता है.
देवेश आचार्य ने भी इस बार फिल्मी सितारों की रामलीला नहीं होने पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामलीला भगवान राम की मर्यादा और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर होनी चाहिए. पिछले वर्षों में फिल्मी कलाकारों की रामलीला में ऐसे प्रसंग और प्रस्तुतियां देखने को मिलीं, जिनको लेकर संत समाज ने आपत्ति जताई थी. वे कहते हैं कि अयोध्या की रामलीला में स्थानीय परंपरा, धार्मिक मर्यादा और श्रद्धा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
क्यों होता रहा ऐसा
कमलाकांत सुंदरम की राय कुछ अलग है. वे कहते हैं कि फिल्मी सितारों की रामलीला मनोरंजन और प्रचार-प्रसार की दृष्टि से प्रभावी थी. इससे रामलीला को व्यापक पहचान मिली, लेकिन अयोध्या में रामलीला केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भगवान राम की उपासना और श्रद्धा से भी जुड़ी परंपरा है. उनके मुताबिक पारंपरिक रामलीला में भगवान की आरती और पूजा श्रद्धा के साथ होती है, जबकि फिल्मी सितारों की रामलीला में चकाचौंध, मेकअप और आधुनिक साज-सज्जा अधिक होने के कारण धार्मिक भाव पीछे छूट जाती है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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