गाजीपुर: सफलता मिलने के बाद जिंदगी का हर संघर्ष छोटा और सही लगने लगता है, लेकिन उस मुकाम तक पहुंचने से पहले का रास्ता अक्सर बहुत कठिन और लंबा नजर आता है. गाजीपुर के पीजी कॉलेज से पढ़ाई करने वाली अलीशा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने समाजशास्त्र विषय में JRF (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) की परीक्षा पास कर ली है.
अलीशा बताती हैं कि इस सफलता में उनके कॉलेज के शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान रहा. समाजशास्त्र विभाग के मंजीत सर, उमा मिश्रा सर, पंकज सर और रुचि मैम के अलावा अंग्रेजी विभाग के रविशंकर सर ने भी उन्हें हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
तीन असफलताओं के बाद आया निराशा का दौर
अलीशा ने बताया कि 2024 तक उन्होंने परीक्षा और प्रवेश के लिए तीन बार कोशिश की थी. बार-बार कोशिश करने के बाद भी मन मुताबिक सफलता न मिलने पर वह निराश होने लगी थीं. उनके मन में यह सवाल उठने लगा था कि आखिर यह परीक्षा कैसे पास होगी. लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने अपनी गलतियों और कमियों पर ध्यान देना शुरू किया.
साल 2024 के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पर और ज्यादा ध्यान दिया और अपनी कमजोरियों को दूर किया. इसी दौरान उन्होंने कुछ ऑनलाइन क्लासेज भी शुरू की, जिससे उन्हें अपने विषय को गहराई से समझने और पढ़ाई का सही तरीका बनाने में बहुत मदद मिली.
बिना किसी महंगे कोचिंग के की तैयारी
अलीशा की इस सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए उन्होंने किसी भी महंगे या पैसे देकर ली जाने वाली कोचिंग का सहारा नहीं लिया. उन्होंने मुख्य रूप से मुफ्त ऑनलाइन स्रोतों का इस्तेमाल किया. समाजशास्त्र की तैयारी के लिए उन्होंने अंतरा चक्रवर्ती की ‘अंतरास्क्वाड एकेडमी’ और तलवीर सिंह की ‘सीएन अचीवर्स’ की कक्षाओं से मदद ली. इसके अलावा, पेपर-2 की तैयारी के लिए उन्होंने सी.एन. शंकर राव की किताबों का इस्तेमाल किया. साथ ही उन्होंने जॉर्ज रिट्जर की किताबों को ऑनलाइन पढ़ा और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के पढ़ाई के नोट्स से भी तैयारी की
सिविल सेवा और अन्य परीक्षाओं की भी की थी तैयारी
अलीशा का सफर सिर्फ JRF तक ही सीमित नहीं रहा है. इससे पहले वह सिविल सेवा परीक्षा (आईएएस/पीसीएस), एसएससी और बीएड जैसी परीक्षाओं के लिए भी तैयारी करती रही थीं. बाद में उन्होंने अपना पूरा ध्यान समाजशास्त्र विषय पर लगाया और 2024 के बाद JRF की तैयारी को पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाया. लगातार मेहनत और कभी हार न मानने की जिद के चलते आखिरकार उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में JRF पास कर ही लिया.
शिक्षकों की बातों ने दी हिम्मत
अलीशा याद करती हैं कि अंग्रेजी विभाग के रविशंकर सर ने उनसे एक बहुत अच्छी बात कही थी. जब सफलता मिल जाती है, तो पीछे की सारी मेहनत सही (वर्थ इट) लगने लगती है, लेकिन सफलता मिलने से पहले वही सफर बहुत मुश्किल लगता है. अलीशा की जिंदगी में यह बात एकदम सटीक बैठती है, क्योंकि बार-बार असफलता मिलने पर उन्हें भी निराशा का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी.
केंद्रीय विश्वविद्यालय में करना चाहती हैं शोध
JRF पास करने के बाद अब अलीशा का अगला सपना आगे की पढ़ाई और शोध (रिसर्च) करना है. वह दिल्ली या जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे देश के किसी बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में डेवलपमेंट स्टडीज पे रिसर्च करना चाहती हैं. उनका मानना है कि JRF उनके सफर की आखिरी मंजिल नहीं है, बल्कि शोध की दुनिया में आगे बढ़ने का सिर्फ एक अहम जरिया है.
