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बॉलीवुड एक्ट्रेस दिव्या दत्ता की ‘लास्ट मैन इन टावर’ सिनेमाघरों मे रिलीज हो चुकी है. इस बीच उन्होंने अपने करियर को लेकर बात की. दिव्या ने बताया कि शुरुआती दिनों में बेहतरीन एक्टिंग करने के बावजूद वह स्क्रीन पर सही नजर नहीं आती थीं, जिसके बाद सीनियर्स ने उनका हाथ थामकर उन्हें बारीकियां सिखाईं. मनोज बाजपेयी और निर्देशक बेन रेखी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि एक्टिंग में बहुत ज्यादा बंधने के बजाय उस पल के जादू को स्वाभाविक रूप से बहने देना चाहिए.
दिव्या दत्ता ने सीनियर्स से सीखीं एक्टिंग की बारीकियां. (फोटो साभार: Instagram@divyadutta25)
नई दिल्ली. दिव्या दत्ता की फिल्म ‘लास्ट मैन इन टावर’ रिलीज हो चुकी है. इस मूवी को दर्शकों से मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. इस बीच दिव्या दत्ता ने अभिनय के तकनीकी पहलुओं के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में एक्टिंग की तकनीकी बारीकियां सीखने में उनके सीनियर्स ने उनकी काफी मदद की थी. फिल्म के प्रमोशन के दौरान दिव्या दत्ता ने अपने को-एक्टर मनोज बाजपेयी और निर्देशक बेन रेखी के साथ एक्टिंग को लेकर खुलकर बात की.
आईएएनएस से दिव्या दत्ता ने कहा, ‘सबसे पहले, जहां तक मेरे लिए तकनीकी पहलुओं की बात है, अगर मुझे अपनी बुनियादी चीजें पता हैं, मैं अपना डायलॉग ठीक से बोल रही हूं और वह स्क्रीन पर सही तरीके से नजर आ रहा है, तो मेरे लिए इतना काफी है. एक समय ऐसा भी था, जब मुझे इन चीजों की जानकारी नहीं थी. मैं अपना बेस्ट कर रही थी, लेकिन स्क्रीन पर सही तरीके से नजर नहीं आ रही थी. उस समय मेरे सीनियर्स ने मेरा हाथ थामा और मुझसे कहा कि सुनो, तुम अच्छा कर रही हो, लेकिन स्क्रीन पर सही तरीके से नजर नहीं आ रही हो. इस मामले में मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं.’
समय के साथ ही सीखते हैं आप
दिव्या दत्ता ने कहा, ‘समय के साथ आप ये चीजें सीखते हैं. वे यह भी कहते हैं कि पहले अपनी लाइनें अच्छे से तैयार कर लो, तकनीकी चीजों को समझ लो और उसके बाद बस उस पल में पूरी तरह शामिल हो जाओ. उस पल का जादू अपने आप होने दो. अगर मैं अपने को-एक्टर की आंखों में देख रही हूं, तो शायद हर टेक अलग होगा. हर टेक में जब मैं उनकी आंखों में देखूंगी तो उससे एक अलग भावना पैदा हो सकती है.’
एक्टिंग को लेकर दिव्या दत्ता ने की बात
दिव्या ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘वह भावना कभी ऊपर जा सकती है और कभी नीचे. कई बार यह आपको हैरान भी कर देती है. इसलिए आपको उसे स्वाभाविक रूप से होने देना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा बंध जाते हैं और सोचते हैं कि नहीं, नहीं, यही सीमा है और मुझे इसी नोट पर परफॉर्म करना है, तो आपका अभिनय बहुत सीमित हो जाता है. आपको बस अपने अभिनय को स्वाभाविक रूप से बहने देना चाहिए.’
उपन्यास पर आधारित है ‘लास्ट मैन इन टावर’
‘लास्ट मैन इन टावर’ अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है. फिल्म की कहानी तेजी से बदलते मुंबई की पृष्ठभूमि पर आधारित है. फिल्म में मनोज बाजपेयी रिटायर्ड स्कूल टीचर की भूमिका निभाई है, जो एक पुरानी अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहता है. जब एक अमीर डेवलपर वहां के निवासियों को इमारत बेचने के बदले बड़ी रकम की पेशकश करता है, ताकि उसकी जगह एक लग्जरी टावर बनाया जा सके, तो ज्यादातर लोग पैसे के लालच में तैयार हो जाते हैं. हालांकि, मनोज बाजपेयी का किरदार वहां से जाने से इनकार कर देता है और इस तरह वह पुनर्विकास योजना के रास्ते में अकेली बड़ी बाधा बन जाता है.
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कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …
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