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Anahat singh scripts history: 18 साल की अनाहत सिंह ने कनाडा में आयोजित 2026 वर्ल्ड स्क्वॉश जूनियर चैंपियनशिप के फाइनल में मिस्र की रुक़ैया सालेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराकर इतिहास रच दिया. वह विश्व जूनियर स्क्वॉश चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं. पिछले कुछ सालों में सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में मिली निराशा के बाद अपने आखिरी जूनियर वर्ल्ड कप में भारत की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी ने शुरुआत से अंत तक दबदबा बनाए रखा और भारत के लिए यह स्वर्णिम सफलता हासिल की.
अनाहत सिंह ने कनाडा में जीता वर्ल्ड जूनियर स्क्वॉश चैंपियनशिप खिताब.
नई दिल्ली. अनाहत सिंह पिछले कुछ वर्षों से सीनियर और प्रोफेशनल स्क्वॉश टूर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही थीं. लेकिन उनके मन में एक पुरानी ख्वाहिश थी. और वो ख्वाहिश थी वर्ल्ड जूनियर चैंपियन बनने का सपना. वह साल दर साल इस बड़े खिताब के लिए जी-जान लगाती रहीं, लेकिन हर बार मंजिल के करीब पहुंचकर भी कप दूर ही रह जाता था. आखिरकार कनाडा के ओंटारियो में मशहूर नियाग्रा फॉल्स के किनारे इस भारतीय स्टार ने अपने उस अधूरे सपने को सच कर दिखाया और एक नया इतिहास रच दिया.
अनाहत सिंह (Anahat Singh) ने वर्ल्ड स्क्वॉश जूनियर चैंपियनशिप 2026 (World Squash Jr. Championship) में लड़कियों का खिताबी मुकाबला जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया. इस ऐतिहासिक फाइनल मैच में उन्होंने मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुक़ैया सालेम को सीधे गेमों में 11-3, 11-7, 11-9 से करारी शिकस्त दी. इस शानदार जीत के साथ ही अनाहत भारत के लिए पहली वर्ल्ड जूनियर स्क्वॉश चैंपियन बन गईं.
दबाव को पछाड़कर दिखाई नंबर-1 खिलाड़ी की क्लास
विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर काबिज और टूर्नामेंट में शीर्ष वरीयता प्राप्त अनाहत ने पूरे हफ्ते किसी भी दबाव को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया. एक जूनियर खिलाड़ी के रूप में यह उनका आखिरी विश्व कप था, इसलिए उन पर पदक का रंग बदलने की भारी जिम्मेदारी थी. इसके बावजूद, उन्होंने पूरी प्रतियोगिता में शीर्ष दावेदार की तरह ही आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया और अपने कोर्ट मूवमेंट व आक्रमण से विरोधियों को कोई मौका नहीं दिया.
सालों की नाकामी और खिताब की बढ़ती तड़प
हालांकि, अनाहत के लिए इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता कतई आसान नहीं रहा है. वह पिछले कुछ सालों से सीनियर स्तर पर बड़ी-बड़ी खिलाड़ियों को हरा रही थीं, लेकिन जूनियर स्क्वॉश के इस सबसे प्रतिष्ठित मंच पर हर बार किसी न किसी मोड़ पर हार का सामना करना पड़ता था. इससे पहले के संस्करणों में भी अनाहत जीत की मजबूत दावेदार होने के बावजूद सेमीफाइनल से आगे नहीं बढ़ पाई थीं. कभी क्वार्टर फाइनल तो कभी सेमीफाइनल में मिली हार के कारण हर साल उनकी बेचैनी और खिताब की तड़प बढ़ती ही जा रही थी.
रैकेट उछालकर मनाया जीत का जश्न
इस बार जब उन्होंने फाइनल के आखिरी अंक पर विजयी शॉट मारा, तो सालों से दिल में दबा दबाव एक पल में हवा हो गया. उन्होंने खुशी के मारे अपना रैकेट हवा में उछाल दिया और सीधे स्टैंड्स में बैठे अपने माता-पिता व सपोर्ट स्टाफ की तरफ देखकर मुस्कुराईं, जो लगातार उनके हर अंक का जश्न मना रहे थे.
‘लगता है जैसे मैं कोई सपना देख रही हूं’
मैच खत्म होने के तुरंत बाद कोर्ट पर दिए अपने भावुक इंटरव्यू में अनाहत ने कहा, ‘मुझे अभी भी लग रहा है कि मैं कोई सपना देख रही हूं. पिछले कुछ सालों में सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हारने के कारण यह टूर्नामेंट मेरे लिए काफी निराशाजनक रहा था. क्योंकि यह एक जूनियर के रूप में मेरा आखिरी साल था, इसलिए मुझे पता था कि इस ट्रॉफी को उठाने का यह मेरा आखिरी और इकलौता मौका है. यह जीत मेरे और मेरे देश के लिए बहुत मायने रखती है.’
फाइनल मुकाबले में दिखा एकतरफा दबदबा
फाइनल मुकाबले की शुरुआत अनाहत ने पूरी आक्रामकता के साथ की. इससे ठीक एक दिन पहले वह 2005 में जोशना चिनप्पा के बाद इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं. उसी लय को बरकरार रखते हुए उन्होंने खिताबी मैच के पहले दो सेटों में पूरी तरह दबदबा बनाए रखा. उन्होंने पहले और दूसरे गेम में मिस्र की रुक़ैया सालेम को संभलने का जरा भी मौका नहीं दिया और शुरुआती दोनों सेटों में कुल मिलाकर प्रतिद्वंद्वी को सिर्फ 10 अंक ही बनाने दिए.
तीसरे सेट में वापसी को नाकाम कर रचा इतिहास
तीसरे सेट में मिस्र की खिलाड़ी ने वापसी की पुरजोर कोशिश की और एक समय 8-6 की बढ़त बनाकर अनाहत पर दबाव बनाने की कोशिश भी की. लेकिन अनाहत ने इस मुश्किल घड़ी में अपना आपा नहीं खोया. उन्होंने अपने संयम और रणनीतिक खेल के दम पर न केवल स्कोर बराबर किया, बल्कि लगातार अंक बटोरते हुए गेम को 11-9 से अपने नाम कर भारत के लिए यह ऐतिहासिक स्वर्णिम पन्ना लिख दिया.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…
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