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What is Sarpat : खेत, तालाब या खाली जमीन के आसपास अपने आप उग आने वाले सरपत आपने भी देखे होंगे. ये भले ही सामान्य घास जैसा दिखाई देता हो, लेकिन कई परिवारों के लिए सदियों से कमाई का साधन रहा है. समय के साथ इसके उपयोग में बदलाव आया है. पहले गांवों में छत इसी से बनती थीं. आज भी कुछ जगहों पर इसके छप्पर देखे जा सकते हैं. इन दिनों सरपत से बनी चटाई, टोकरी, डलिया, सूप, ट्रे, लैम्प शेड और कई तरह के सजावटी सामान की मांग खूब हो रही है. सुल्तानपुर के विक्रम कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि सरपत का ग्रामीण जीवन में इस्तेमाल काफी पुराना है.
सुल्तानपुर. गांवों में खेत, तालाब और खाली जमीन के आसपास बारिश के मौसम में नजर आने वाला सरपत भले ही सामान्य घास जैसा दिखाई देता हो, लेकिन कई परिवारों के लिए यह कमाई का साधन है. इसकी मजबूत और लंबी डंडियों से रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर सजावट तक के कई सामान तैयार किए जाते हैं. सरपत से चटाई, टोकरी, डलिया, सूप, ट्रे, लैम्प शेड और कई तरह के सजावटी सामान बनाए जाते हैं. कुछ जगहों पर इससे फर्नीचर भी तैयार किया जाता है. इसके लिए कच्चे माल पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता. यही वजह है कि सरपत से जुड़े काम को शुरू कर कमाई की जा सकती है.
कम नहीं हुई जरूरत
सुल्तानपुर के विक्रम कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि सरपत का ग्रामीण जीवन में इस्तेमाल काफी पुराना है. आज भी कई गांवों में सरपत की मदद से घरों और झोपड़ियों के छप्पर तैयार किए जाते हैं. पक्के मकानों और सीमेंट की छतों के बढ़ते चलन के बावजूद ग्रामीण इलाकों में सरपत का महत्व पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसकी लंबी और मजबूत डंडियां छप्पर तैयार करने के लिए उपयुक्त होती हैं. इसके लिए कच्चा माल आसपास के खेतों, तालाबों और खाली जमीन से आसानी से मिल जाता है. यही वजह है कि कम खर्च में छप्पर तैयार करने के लिए आज भी ग्रामीण सरपत का इस्तेमाल करते हैं.
कब तक चलेगा
विक्रम बताते हैं कि सरपत से छप्पर तैयार करने के लिए पहले इसकी डंडियों को काटकर सुखाया जाता है. इसके बाद इन्हें एक साथ व्यवस्थित करके बांधा जाता है. फिर बांस या लकड़ी के ढांचे पर परत-दर-परत लगाया जाता है. छप्पर तैयार करते समय सरपत को इस तरह जमाया जाता है कि बारिश का पानी अंदर न पहुंच सके. गांवों में अनुभवी लोग यह काम काफी आसानी से कर लेते हैं. अगर सरपत अच्छी तरह सूखा और छप्पर सही तरीके से तैयार किया गया हो, तो यह कई साल तक काम आ सकता है. हालांकि इसकी वास्तविक उम्र मौसम, पानी, धूप और रखरखाव पर निर्भर करती है.
रख लेते हैं काटकर
सरपत की उपयोगिता सिर्फ छप्पर तक सीमित नहीं है. इसकी मजबूत डंडियों से चटाई, टोकरी, डलिया, सूप, ट्रे और सजावटी सामान भी तैयार किए जाते हैं. कुछ जगहों पर सरपत से लैम्प शेड और फर्नीचर तक बनाए जाते हैं. जिस सरपत को कई लोग बेकार घास समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, वही जरूरत का सामान और कमाई का जरिया बन सकता है. यही वजह है कि गांवों में आज भी सरपत को काटकर सुरक्षित रखा जाता है और जरूरत के मुताबिक इसका इस्तेमाल किया जाता है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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